जयपुर रोड शो: Bhajanlal Sharma निकाय चुनाव में क्यों उतरे मैदान में
जयपुर रोड शो: Bhajanlal Sharma निकाय चुनाव में क्यों उतरे मैदान में
Bhajanlal Sharma: राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने राजधानी जयपुर के परकोटे में रोड शो कर 149 वार्डों के भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे। इससे पहले बीकानेर, उदयपुर समेत अन्य शहरों में भी वे मैदान में उतर चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ साथ दिखे। दो चरणों में कुल 309 निकायों के चुनाव एक साथ हो रहे हैं, जिसे सरकार वन नेशन-वन इलेक्शन की थीम से जोड़कर पेश कर रही है। आज 162 निकायों में मतदान चल रहा है। शेष 147 निकायों में 11 सितंबर को वोट पड़ेंगे और नतीजे 14 सितंबर को आएंगे। दस नगर निगमों में मेयर, 47 नगर परिषदों में सभापति तथा 252 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष चुने जाने हैं। ढाई वर्ष के कार्यकाल बाद यह शहरी चुनाव सरकार की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ता इसे मुख्यमंत्री और सरकार दोनों की साख से जोड़ रहे हैं। आलाकमान निगरानी कर रहा है और संगठन महामंत्री बीएल संतोष की जयपुर बैठक के बाद वरिष्ठ नेताओं को मैदान में झोंका गया है।
Bhajanlal Sharma: दो चरणों में 309 निकायों का चुनाव कैसे हो रहा है
सभी 309 निकायों को एक साथ चुनाव प्रक्रिया में लाने का दावा सरकार कर रही है, हालांकि मतदान दो तिथियों पर बंटा है। पहले चरण में 162 निकाय आज वोट डाल रहे हैं। दूसरा चरण 11 सितंबर को 147 निकायों में होगा। परिणाम 14 सितंबर को घोषित होने हैं। जयपुर समेत दस निगमों के मेयर पद सीधे इन नतीजों से जुड़ेंगे। नगर परिषद और पालिका स्तर पर सभापति व अध्यक्ष चुने जाएंगे। निकायों के बाद पंचायत चुनाव भी आने वाले हैं, इसलिए दोनों दल इसे अगली कड़ी का आधार मान रहे हैं। एक साथ कराए जाने से प्रशासनिक तैयारी बड़ी रही है। मतदान शांतिपूर्ण हो और मत प्रतिशत अच्छा रहे, यही फिलहाल मैदानी परीक्षा है।
मुख्यमंत्री शहर-दर-शहर क्यों प्रचार कर रहे हैं
भाजपा नेता स्वयं कह रहे हैं कि यह चुनाव भजनलाल शर्मा के ढाई वर्ष के कामकाज पर जनमत जैसा है। इसलिए वे केवल संदेश नहीं दे रहे, रोड शो से प्रत्यक्ष संपर्क कर रहे हैं। जयपुर के 149 वार्डों में उन्होंने खुद वोट मांगा। पहले के दौरे बीकानेर और उदयपुर जैसे शहरों तक फैले। निकाय चुनाव आमतौर पर स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, फिर भी मुख्यमंत्री का सक्रिय रहना साख से जुड़ा संकेत है। नतीजों का असर मंत्रियों की छवि पर भी पड़ सकता है, ऐसा दल के भीतर कहा जा रहा है। रोड शो का मकसद कार्यकर्ताओं में ऊर्जा और मतदाताओं में पहचान दोनों बताया जा रहा है। भीड़ और नारेबाजी से आगे जाकर वोट कितने ढलते हैं, यह 14 सितंबर बताएगा।
जयपुर परकोटे में कौन से मुद्दे उठाए गए
जयपुर के परकोटे में हिंदू और मुस्लिम दोनों आबादी है। जोधपुर जैसे कुछ अन्य शहरों में भी मिश्रित बस्तियां हैं। मुख्यमंत्री ने पलायन रोकने और लव जिहाद का जिक्र कर भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण की कोशिश की, ऐसा रिपोर्ट में कहा गया। उन्होंने डिस्टर्ब एरिया एक्ट बिल का हवाला दिया और कहा कि इससे पलायन रुकेगा तथा मजबूर करने वालों को जेल जाना होगा। पिछली कांग्रेस सरकार पर लव जिहाद न रोकने का आरोप भी लगाया। ये राजनीतिक दावे हैं, जिनकी सच्चाई विपक्ष अलग तरीके से पेश करता है। स्थानीय विकास, पानी, सड़क और कचरा जैसे मुद्दे भी निकाय चुनाव में पारंपरिक रूप से हावी रहते हैं। परकोटे की संकरी गलियों में रोड शो प्रतीकात्मक भी रहा और चुनावी भी।
आलाकमान की निगरानी का क्या मतलब निकाला जा रहा है
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने जयपुर में बैठक कर वरिष्ठ नेताओं को चुनाव में झोंक दिया। केंद्रीय प्रभारी और पर्यवेक्षक भी तैनात बताए गए। दल इसे सामान्य नगर चुनाव से बड़ी परीक्षा मान रहा है। दिल्ली में सीजेपी आंदोलन के बाद और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शहरी संकेत तलाशे जा रहे हैं। युवा मतदाताओं का मूड निकाय नतीजों से पूरी तरह नहीं नापा जा सकता, फिर भी भाजपा इसे जनमत की एक परत मान रही है। कांग्रेस भी जीतकर पंचायत चुनाव में लाभ चाहती है। दोनों तरफ संगठन सक्रिय है। निगरानी का अर्थ यह भी है कि टिकट और प्रचार पर केंद्र की नजर है, केवल प्रदेश इकाई पर भार नहीं छोड़ा गया।
Bhajanlal Sharma: नतीजों से साख और अगले चुनाव कैसे जुड़ सकते हैं
दस निगमों समेत बड़े शहरों का रुख सरकार की शहरी छवि तय करेगा। हार-जीत का असर मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल तक की चर्चा में आएगा, ऐसा दल के अंदर कहा जा रहा है। पंचायत चुनाव निकायों के तुरंत बाद हैं, इसलिए मनोबल और संगठन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। विकास कार्यों को जनमत बताने का दावा सत्ता पक्ष कर रहा है, विपक्ष स्थानीय शिकायतों को मुद्दा बनाएगा। मतदान प्रतिशत और शहरवार अंतर वास्तविक तस्वीर देंगे। रोड शो कितना वोट में बदला, यह अनुमान से नहीं परिणाम से तय होगा। अभी मैदान में प्रचार और दो चरणों का बाकी मतदान बाकी है।
राजस्थान के निकाय चुनाव में भजनलाल शर्मा जयपुर समेत कई शहरों में खुद उतरे हैं। 309 निकायों में से 162 पर आज वोट पड़े, 147 पर 11 सितंबर को पड़ेंगे और नतीजे 14 सितंबर को आएंगे। दस मेयर समेत सैकड़ों स्थानीय पद दांव पर हैं। सरकार इसे अपने कामकाज का जनमत बता रही है, आलाकमान निगरानी कर रहा है। मुख्यमंत्री ने पलायन और लव जिहाद जैसे मुद्दे उठाए, जो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हैं। असली परीक्षा मतपेटियों में है। शहरी नतीजे पंचायत चुनाव से पहले दोनों दलों का मनोबल तय करेंगे।
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