Bhai Tera Star Hai Review: राघव जुयाल का दमदार अभिनय भी नहीं बचा पाया कमजोर और लाउड कॉमेडी फिल्म को

Bhai Tera Star Hai Review: राघव जुयाल का दमदार अभिनय भी नहीं बचा पाया कमजोर और लाउड कॉमेडी फिल्म को

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Bhai Tera Star Hai Review: सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन नृत्य कला और अनूठे अंदाज से दर्शकों का दिल जीतने वाले अभिनेता राघव जुयाल इन दिनों अपनी नई फिल्म भाई तेरा स्टार है को लेकर चर्चा में हैं। डांसर से अभिनेता बने राघव की बतौर सोलो लीड यह पहली बड़ी फिल्म है, जिससे उनके प्रशंसकों को काफी उम्मीदें थीं। लंदन की पृष्ठभूमि पर आधारित यह पूरी कहानी एक ही रात के घटनाक्रम के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें गलतफहमियों और भाग-दौड़ के जरिए कॉमेडी पैदा करने की कोशिश की गई है। हालांकि, दमदार कलाकारों की फौज होने के बावजूद यह फिल्म एक बेहद कमजोर, उलझी हुई और लाउड पटकथा के कारण दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम साबित होती है।

Bhai Tera Star Hai Review: एक रात की कहानी और लंदन के बैकड्रॉप पर बुनी गई फिल्म का प्लॉट

फिल्म की शुरुआत ठंड से ठिठुरते लंदन शहर से होती है, जहाँ अजय सिंह यानी राघव जुयाल नाम का एक महत्वाकांक्षी युवा रहता है जो खुद को बॉलीवुड का अगला बड़ा सुपरस्टार मानता है। अजय के पास अभिनय प्रतिभा के नाम पर केवल असीमित ओवरकॉन्फिडेंस और बचकानी हरकतें हैं, जो उसे शॉर्टकट तरीके से अमीर बनने के सपने दिखाती हैं। इसी सनक के चक्कर में वह क्रिकेट सट्टेबाजी के दलदल में फंस जाता है और एक खतरनाक क्लब मालिक फैटी यानी संजय कपूर से दस हजार पाउंड हार बैठता है। फैटी उसे चेतावनी देता है कि सूरज उगने से पहले पैसे न मिलने पर उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अपनी जान और इज्जत बचाने के लिए अजय के पास केवल एक रात का समय बचता है, जिसके बाद पूरे शहर में झूठ और अफरा-तफरी का एक लंबा सिलसिला शुरू हो जाता है।

पटकथा की कमजोरी और बार-बार दोहराए जाने वाले सिचुएशनल गैग्स

सिनेमा के इतिहास में एक ही रात की घटनाओं पर आधारित फिल्मों ने हमेशा से दर्शकों को बांधे रखा है, क्योंकि इस प्रारूप में समय की कमी एक अलग रोमांच पैदा करती है। निर्देशक विवेक बी. अग्रवाल और सह-लेखक सुदीप्तो सरकार ने कागज पर एक बेहतरीन स्लैपस्टिक कॉमेडी की नींव रखी थी, जो नब्बे के दशक की गोविंदा और प्रियदर्शन शैली की याद दिलाती है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि परदे पर उतरते ही यह फिल्म अपनी गति खो देती है और बार-बार एक ही तरह के ड्रामे को दोहराने लगती है। फिल्म का कुल समय पौने दो घंटे का है, लेकिन कमजोर संपादन और अनावश्यक रूप से खींचे गए दृश्यों के कारण यह सफर दर्शकों के लिए काफी लंबा और थकाऊ महसूस होने लगता है।

Bhai Tera Star Hai Review: कलाकारों का बेहतरीन अभिनय लेकिन कमजोर संवादों से निराशा

फिल्म के कलाकारों की बात करें तो उन्होंने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी दिखाने की कोशिश की है, लेकिन खराब संवादों ने उनके हुनर को बांध दिया है। राघव जुयाल ने अपने किरदार में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी है और उनकी कॉमिक तथा फिजिकल टाइमिंग सराहनीय है, लेकिन खराब लेखन के कारण उनकी यह एनर्जी कई जगह ओवरएक्टिंग लगने लगती है। पार्वती ओमानाकुट्टन ने अपनी भूमिका को काफी संतुलित तरीके से निभाया है, जो अराजकता के बीच राहत देती है। डिजिटल दुनिया से कदम रखने वाली नहारिका एनएम की कॉमिक टाइमिंग तो ठीक है, लेकिन उनकी डायलॉग डिलीवरी औसत रही है। संजय कपूर और चंदन रॉय सान्याल जैसे मंझे हुए कलाकारों को भी चीखने-चिल्लाने वाले किरदारों तक सीमित कर दिया गया, जिससे उनकी क्षमता का सही उपयोग नहीं हो सका।

Bhai Tera Star Hai Review: संगीत, तकनीकी पक्ष और कॉमेडी के नाम पर बढ़ता हुआ शोर-शराबा

तकनीकी मोर्चे पर फिल्म के कुछ पहलू ठीक कहे जा सकते हैं, क्योंकि सिनेमेटोग्राफी ने लंदन की रातों और क्लब संस्कृति को बहुत खूबसूरती से परदे पर उतारा है। अमित त्रिवेदी का संगीत ऊर्जावान है, लेकिन गानों का गलत समय पर आना कहानी के प्रवाह को तोड़ देता है। इसके अलावा, बैकग्राउंड स्कोर में इंस्टाग्राम रील्स के वायरल साउंड इफेक्ट्स का बेहिसाब इस्तेमाल किया गया है, जो बहुत जल्दी झुंझलाहट पैदा करने लगता है। फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हास्य पैदा करने के लिए स्थितियों की सहजता के बजाय आवाज़ के वॉल्यूम और लाउड एक्टिंग का सहारा लिया गया है। वन-लाइनर्स इतने कृत्रिम और बासी हैं कि वे दर्शकों को हंसाने के बजाय उलझन में डाल देते हैं।

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