Bank of Baroda Q1 Results: NMC समझौते के एकमुश्त खर्च से मुनाफा 48% घटा, CEO बोले- मूल कारोबार मजबूत बना हुआ है
NMC मामले में एकमुश्त भुगतान का असर, लेकिन शुद्ध ब्याज आय और लोन ग्रोथ में दर्ज हुई बढ़ोतरी
Bank of Baroda Q1 Results: बैंक ऑफ बड़ौदा का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान एकीकृत शुद्ध लाभ 48 फीसदी घटकर 1,783 करोड़ रुपये रह गया है। मुनाफे में यह गिरावट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एनएमसी (NMC) ग्रुप मामले में अदालत के बाहर हुए समझौते के तहत किए गए एकमुश्त भुगतान के कारण आई है। बैंक ने विवाद सुलझाने के लिए करीब 5,680 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
बैंक के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर देबदत्त चंद ने स्पष्ट किया कि यह समझौता कई सालों से चल रहे जटिल विवाद को समाप्त करने के लिए व्यावसायिक रूप से उचित फैसला था। बैंक ने 2 जुलाई को शेयर बाजार को इस एकमुश्त भुगतान की जानकारी दी थी।
एनएमसी मामले में हुआ बड़ा भुगतान
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी अबू धाबी शाखा के माध्यम से 60 करोड़ डॉलर यानी करीब 5,700 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह राशि एनएमसी हेल्थ पीएलसी, एनएमसी हेल्थकेयर लिमिटेड और एनएमसी होल्डिंग लिमिटेड से जुड़े लंबे कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए चुकाई गई।
यह मामला अबू धाबी (ADGM) तथा इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में चल रहा था, जिसमें यूएई के नागरिक कानून और ब्रिटेन के दिवाला नियमों से जुड़े मुद्दे शामिल थे। सीईओ देबदत्त चंद ने कहा कि अदालत के बाहर समझौता करने से बैंक को लंबी और खर्चीली मुकदमेबाजी से मुक्ति मिल गई है, जबकि बैंक का मूल व्यवसाय पूरी तरह मजबूत बना हुआ है।
शुद्ध ब्याज आय और लोन पोर्टफोलियो में वृद्धि
एकमुश्त भुगतान के कारण मुनाफे में आई गिरावट के बावजूद बैंक का कोर बिजनेस मजबूत रहा है:
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शुद्ध ब्याज आय (NII): बैंक की शुद्ध ब्याज आय करीब 10 फीसदी बढ़कर 12,524 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
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लोन पोर्टफोलियो: लोन पोर्टफोलियो में 17 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
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ब्याज मार्जिन: वैश्विक शुद्ध ब्याज मार्जिन 2.77 फीसदी रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 2.91 फीसदी था।
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प्रावधानों में कमी: बैंक के प्रावधान (Provisions) घटकर 643 करोड़ रुपये रह गए, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 1,967 करोड़ रुपये था। प्रावधानों में यह कमी संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार का सीधा संकेत है।
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विदेशी मुद्रा जमा: बैंक ने एफसीएनआर-बी (FCNR-B) जमा के जरिए अब तक 70 करोड़ डॉलर जुटाए हैं और जुलाई अंत तक इसे एक अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
सीईओ का बयान और आगे की योजना
देबदत्त चंद ने कहा कि एनएमसी समझौता एकमुश्त खर्च था और इसे छोड़कर देखें तो बैंक का परिचालन मुनाफा और अन्य पैरामीटर काफी सकारात्मक हैं। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 में लोन पोर्टफोलियो में 12 से 14 फीसदी की वृद्धि हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जबकि शुद्ध ब्याज मार्जिन को 2.75 से 2.95 फीसदी के दायरे में बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि फंडिंग लागत को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
शेयर बाजार में प्रतिक्रिया और संपत्ति गुणवत्ता
वित्तीय नतीजों के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda Q1 Results) के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया। बीएसई (BSE) पर बैंक का शेयर 1.48 फीसदी की बढ़त के साथ 246.60 रुपये पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में यह 239.30 रुपये के निचले स्तर से 247.10 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा।
निवेशक एकमुश्त खर्च को नजरअंदाज करते हुए लोन ग्रोथ और सुधरती एसेट क्वालिटी पर भरोसा जता रहे हैं। क्रेडिट कॉस्ट नियंत्रण में है और स्लिपेज अनुपात में कमी आई है।
Bank of Baroda Q1 Results: पीएसयू बैंकों के बीच स्थिति और आगे की राह
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि एनएमसी जैसे पुराने और जटिल विवादों का निपटारा लंबे समय में बैंक के हित में रहेगा, क्योंकि अनिश्चितता खत्म होने से प्रबंधन का पूरा ध्यान मूल बैंकिंग व्यवसाय पर केंद्रित रहेगा।
यद्यपि ब्याज दरों में बदलाव के चलते जमा लागत को नियंत्रित रखना एक चुनौती होगी, लेकिन रिटेल और कॉरपोरेट सेगमेंट में लोन की मजबूत मांग तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेश के जरिए बैंक अपनी परिचालन दक्षता को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
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