Bihar Politics 2026: मोकामा विधायक अनंत सिंह को JDU से 6 साल के लिए निष्कासित, पत्नी नीलम देवी पर भी कार्रवाई
Bihar Politics 2026: मोकामा विधायक अनंत सिंह को JDU से 6 साल के लिए निष्कासित, पत्नी नीलम देवी पर भी कार्रवाई
Bihar Politics 2026: बिहार की सत्ताधारी जेडीयू ने मोकामा से विधायक अनंत कुमार सिंह के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। पार्टी ने उन्हें और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही जेडीयू ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की है। यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों और हाल ही में संपन्न विधान परिषद चुनाव में विरोधी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने के आरोप में की गई है।
जेडीयू ने अनंत सिंह को क्यों निष्कासित किया?
पार्टी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि अनंत सिंह लगातार पार्टी के निर्देशों की अवहेलना कर रहे थे। उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ काम किया और दूसरे दल के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के आदेश पर उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई और अगले छह वर्षों के लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
पत्नी नीलम देवी पर भी क्यों कार्रवाई हुई?
अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है। जेडीयू के अनुसार नीलम देवी भी दल विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थीं। पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी है। यह फैसला दोनों पर एक साथ लागू हुआ है। आदेश में साफ कहा गया है कि यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा क्यों की गई?
जेडीयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। पार्टी ने भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया है। दसवीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि अनंत सिंह ने पार्टी के खिलाफ काम करके दलबदल की स्थिति पैदा की है। अब यह विधानसभा अध्यक्ष और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा कि सदस्यता रद्द होती है या नहीं।
हाल के घटनाक्रम से क्या संबंध है?
इस कार्रवाई से पहले अनंत सिंह के कुछ बयान चर्चा में आए थे। विधान परिषद चुनाव के दौरान उन्होंने कुछ टिप्पणियां की थीं जिन्हें पार्टी ने गंभीरता से लिया। इसके अलावा नीरज कुमार के अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद भी अनंत सिंह का एक बयान सामने आया था। पार्टी का कहना है कि लंबे समय से निर्देशों की अनदेखी और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल हो रहा था। विधान परिषद चुनाव में विरोधी पक्ष में प्रचार आखिरी वजह बनी।
आगे क्या हो सकता है और इसका राजनीतिक असर?
अनंत सिंह अब जेडीयू के सदस्य नहीं रहे। अगर विधानसभा अध्यक्ष उनकी सदस्यता रद्द करने का फैसला करते हैं तो मोकामा सीट खाली हो सकती है। बिहार में अगले कुछ महीनों में चुनावी माहौल बनने वाला है। ऐसे में यह कार्रवाई पार्टी अनुशासन बनाए रखने का संकेत देती है। अनंत सिंह की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या वे किसी और दल के साथ जाएंगे या स्वतंत्र रूप से सक्रिय रहेंगे।
जेडीयू का यह कदम पार्टी के अंदर अनुशासन लागू करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। छह साल की अवधि काफी लंबी है और सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा मामले को और गंभीर बनाती है। अब देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस सिफारिश पर क्या कार्रवाई करते हैं और अनंत सिंह आगे क्या रास्ता चुनते हैं।
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