India pilot drug test: एयर इंडिया ने सभी पायलटों के लिए अनिवार्य किया डोप टेस्ट, फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में कैप्टन के मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद बड़ा फैसला
फुकेत-दिल्ली फ्लाइट घटना के बाद एयर इंडिया ने 100% पायलटों की जांच अनिवार्य की
India pilot drug test: भारतीय विमानन क्षेत्र की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) ने यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। कंपनी ने अपने ग्रुप के अंतर्गत आने वाले सभी पायलटों के लिए ‘पूर्ण डोप टेस्ट’ (Dope Test) अनिवार्य कर दिया है। यह सख्त कदम फुकेत से दिल्ली आ रही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के मुख्य पायलट के डोप टेस्ट में गांजा (मारिजुआना) पॉजिटिव पाए जाने की चौंकाने वाली घटना के बाद उठाया गया है। एयर इंडिया का यह नया आदेश 13 अगस्त से ही प्रभाव में आ चुका है, जिसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) के पायलटों को भी पूरी तरह से शामिल किया गया है।
कंपनी का स्पष्ट कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा, उड़ानों के सुचारू संचालन और पेशेवर मानकों को उच्चतम स्तर पर बनाए रखने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के निर्धारित नियमों से एक कदम आगे बढ़कर काम करना समय की आवश्यकता बन गया है।
India pilot drug test: फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक आई गिरावट और घटना का पूरा विवरण
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 4 अगस्त को हुई थी, जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 थाईलैंड के फुकेत से भारत की राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। इस एयरबस A320 विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे। हवा में उड़ान भरते समय अचानक विमान करीब 300 फीट नीचे गिर गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इस अचानक आई गिरावट के कारण यात्रियों और क्रू सदस्यों समेत कुल 24 लोग घायल हो गए। हालांकि, स्थिति पर काबू पाते हुए विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली में लैंड करा लिया गया।
शुरुआती दौर में इस घटना की वजह हवा के दबाव में बदलाव या टर्बुलेंस (Turbulence) को माना जा रहा था। लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जब दोनों पायलटों को फ्लाइंग रोस्टर से हटाकर अनिवार्य ‘पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग’ के लिए भेजा गया, तो मामला पूरी तरह बदल गया। मुख्य पायलट की शुरुआती यूरिन जांच नॉन-नेगेटिव आई, जिसके बाद कराए गए गहन कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) की उपस्थिति की पुष्टि हुई। इस रिपोर्ट के सामने आते ही भारतीय एविएशन सेक्टर में हड़कंप मच गया।
कंपनी ने पायलटों को भेजा औपचारिक पत्र, सुरक्षा संस्कृति पर दिया जोर
एयर इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (फ्लाइट ऑपरेशंस) कैप्टन मनीष उप्पल ने इस घटना के बाद ग्रुप के सभी पायलटों को एक औपचारिक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उल्लेख किया गया कि एयर इंडिया दशकों से भारतीय विमानन का ध्वजवाहक (Flag Carrier) रहा है। इस लंबी यात्रा के दौरान कर्मचारियों के कौशल, निष्ठा और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने ही देश-विदेश के लाखों यात्रियों का विश्वास अर्जित किया है।
कैप्टन उप्पल ने पत्र में स्पष्ट किया कि यात्रियों का यह विश्वास ही एयरलाइन की सबसे अनमोल संपत्ति है। हाल के दिनों में कई जिम्मेदार पायलटों ने खुद प्रबंधन से संपर्क कर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की इच्छा जताई थी। हालांकि एयर इंडिया डीजीसीए, यूरोप और अमेरिका जैसे वैश्विक विमानन निकायों के सभी सेफ्टी नियमों का अक्षरशः पालन करती है, फिर भी सुरक्षा के प्रति पूर्ण आश्वस्त होने के लिए सभी पायलटों की सौ प्रतिशत डोप जांच कराने का निर्णय लिया गया है ताकि कोई भी कर्मचारी किसी प्रतिबंधित नशीले पदार्थ के प्रभाव में ड्यूटी न करे।
कहाँ और कैसे आयोजित होंगी डोप जांच प्रक्रियाएं
एयर इंडिया द्वारा शुरू की गई यह जांच प्रक्रिया बेहद व्यापक और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा रही है। पायलटों के यूरिन सैंपल और डोप टेस्ट की व्यवस्था मुख्य रूप से गुरुग्राम स्थित एयर इंडिया अकादमी में प्रशिक्षण सत्रों के दौरान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, उड़ानों की समाप्ति के बाद देश भर में स्थित एयर इंडिया के फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटरों और कॉर्पोरेट कार्यालयों में भी सैंपलिंग होगी।
जिन पायलटों के मुख्य बेस मुंबई, बेंगलुरु या अन्य शहरों में हैं, वहां भी विशेष चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया है। कंपनी का मानना है कि केवल नियामक नियमों का पालन करना ही काफी नहीं है, बल्कि यात्रियों, हितधारकों और पूरे समाज के सामने यह उदाहरण पेश करना जरूरी है कि उड़ान सुरक्षा के मामले में एयर इंडिया किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और जांच एजेंसियों का रुख
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मंत्रालय ने नियामक संस्था डीजीसीए (DGCA) को निर्देश दिया है कि वह भारतीय विमानन क्षेत्र में साइकोएक्टिव पदार्थों (Psychoactive Substances) के उपयोग की रोकथाम के लिए मौजूदा डोप टेस्ट नियमों की समीक्षा करे। इसके लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों के उड्डयन प्रोटोकॉल का अध्ययन किया जा रहा है।
दूसरी तरफ, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने भी 4 अगस्त की इस दुर्घटना की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। इस जांच में विमान निर्माता कंपनी ‘एयरबस’ और फ्रांस की सुरक्षा एजेंसी की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 300 फीट की अचानक गिरावट में मानवीय भूल या तकनीकी गड़बड़ी की कितनी भूमिका थी।
डीजीसीए के वर्तमान नियम और उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान
वर्तमान में डीजीसीए के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारत में एयरलाइन कंपनियों को अपने कुल फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों (ATC) में से कम से कम 10 प्रतिशत कर्मचारियों की सालाना रैंडम (यादृच्छिक) डोप टेस्टिंग करना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, नई भर्ती के समय, किसी हादसे के तुरंत बाद और पूर्व में पॉजिटिव पाए गए कर्मचारियों के फॉलो-अप के दौरान भी टेस्ट किया जाता है। इन टेस्ट्स में गांजा, कोकीन, एम्फेटामिन और ओपिओइड्स जैसे पदार्थों की जांच होती है।
डीजीसीए नियमों के अनुसार, यदि कोई पायलट पहली बार डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे तुरंत उड़ान ड्यूटी से हटाकर नशामुक्त केंद्र (रीहैब) या काउंसलिंग के लिए भेजा जाता है। पूर्ण मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही उसकी वापसी संभव होती है। वहीं, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर पायलट का लाइसेंस 3 साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है और तीसरी बार में लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है। टेस्ट देने से मना करने पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
यात्रियों के विश्वास को बहाल करने की कवायद और उद्योग पर असर
किसी भी एयरलाइन के लिए यात्रियों का भरोसा उसकी सबसे बड़ी पूंजी होता है। एक पायलट की शारीरिक और मानसिक फिटनेस सीधे तौर पर सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी से जुड़ी होती है। एयर इंडिया द्वारा अपने internal नियमों को सरकारी मानकों से भी अधिक सख्त बनाते हुए 100% स्क्रीनिंग लागू करने के कदम का नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों ने स्वागत किया है।
इस फैसले से न केवल एयर इंडिया के भीतर सुरक्षा का माहौल मजबूत होगा, बल्कि इंडिगो, स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी अन्य भारतीय एयरलाइंस पर भी अपने क्रू मेंबर्स की नियमित जांच बढ़ाने का नैतिक दबाव बनेगा। यात्रियों में यह संदेश जाएगा कि भारतीय विमानन उद्योग हवा में उनकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग और गंभीर है।
India pilot drug test: निष्कर्ष एवं भविष्य की राह
4 अगस्त की घटना ने भारतीय उड्डयन क्षेत्र के सामने एक गंभीर चुनौती पेश की थी, लेकिन एयर इंडिया ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसे एक सुधारात्मक मोड़ दे दिया है। 13 अगस्त से शुरू हुई यह 100% डोप टेस्टिंग प्रक्रिया अब एयर इंडिया के कार्यबल और ट्रेनिंग मॉडल का स्थायी हिस्सा बन चुकी है।
विमानन सुरक्षा में जरा सी भी लापरवाही या ढील बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ऐसे में एयर इंडिया का यह कदम पूरे उद्योग के लिए एक नया मानक (Benchmark) स्थापित करता है। आने वाले दिनों में डीजीसीए की समीक्षा रिपोर्ट और एएआईबी की जांच के निष्कर्ष भारत में एविएशन सेफ्टी प्रोटोकॉल को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने में मदद करेंगे।
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