CBSE 12वीं रिजल्ट 2026 के बाद CUET पर निर्भर DU, JNU प्रवेश! बोर्ड अंक अब सिर्फ पात्रता और टाई-ब्रेक के लिए, जानें पूरी एडमिशन प्रक्रिया
CBSE 12वीं के बाद CUET स्कोर मुख्य आधार, बोर्ड अंक केवल पात्रता और टाई-ब्रेक में काम आएंगे – DU, JNU में दाखिले की नई प्रक्रिया
CUET Admission Process: सीबीएसई कक्षा 12वीं के लाखों छात्रों के लिए साल 2026 का परिणाम आने वाला समय उनके करियर की दिशा तय करने वाला साबित होगा। रिजल्ट जारी होने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की असली होड़ शुरू होगी। वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव यह आया है कि अब केवल बोर्ड के अंक ही आपकी सफलता की गारंटी नहीं हैं, बल्कि CUET (Common University Entrance Test) प्रवेश परीक्षा का प्रदर्शन ही मुख्य भूमिका निभाएगा। इसने भारत के टॉप विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है, जिससे अब सभी छात्रों को प्रतिस्पर्धा का एक समान धरातल प्राप्त हो रहा है।
CUET Admission Process: CUET Exam 2026 का महत्व और चयन प्रक्रिया
पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे कॉलेजों में 12वीं के बोर्ड अंकों के आधार पर ऊंची कट-ऑफ तय होती थी, जिससे कई बार प्रतिभाशाली छात्र कुछ अंकों के अंतर से रह जाते थे। लेकिन 2026 में यूजी एडमिशन के लिए चयन पूरी तरह से CUET (UG) 2026 के स्कोर पर आधारित होगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी में सिलेक्शन ‘Common Seat Allocation System’ (CSAS) के जरिए किया जाएगा। बोर्ड परीक्षा के अंक सीधे मेरिट बनाने में इस्तेमाल नहीं होंगे, लेकिन बोर्ड पास करना अनिवार्य होगा। बोर्ड के अंक अब पात्रता और छात्र के बुनियादी शैक्षणिक स्तर को दर्शाने के एक मानक के रूप में देखे जाते हैं, जो प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाते हैं।
जेएनयू और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) जैसे संस्थानों में भी यही रुख अपनाया गया है। यहां बोर्ड के अंक मुख्य रूप से केवल पात्रता यानी योग्यता जांचने के लिए उपयोग किए जाते हैं। हालांकि, यह देखा गया है कि जो छात्र बोर्ड परीक्षा में 75 से 90 प्रतिशत के बीच अंक प्राप्त करते हैं, उनका अकादमिक आधार मजबूत होने के कारण वे प्रवेश परीक्षा में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया और कई प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में भी बोर्ड अंक केवल एक प्रवेश द्वार की तरह काम करते हैं, जबकि असली मेरिट का निर्धारण प्रवेश परीक्षा में प्राप्त स्कोर ही करता है।
CUET Admission Process: टाई-ब्रेक नियम और बोर्ड अंकों की उपयोगिता
भले ही चयन का मुख्य आधार एंट्रेंस स्कोर हो, लेकिन बोर्ड परीक्षा के अंकों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि दो उम्मीदवारों के CUET स्कोर बिल्कुल बराबर हो जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में 12वीं और उसके बाद 10वीं के अंकों का उपयोग ‘टाई-ब्रेक’ करने के लिए किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र को प्रवेश में प्राथमिकता मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष पाठ्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय न्यूनतम प्रतिशत की शर्त भी रख सकते हैं, जिसे पूरा करना छात्र के लिए अनिवार्य होगा। इसलिए बोर्ड परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन न केवल पात्रता सुनिश्चित करता है बल्कि संकट की स्थिति में सुरक्षा कवच का भी काम करता है।
छात्रों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि उन्हें अब ‘डबल तैयारी’ की रणनीति अपनानी होगी। बोर्ड परीक्षा की तैयारी जहां विषय की गहराई और बुनियादी समझ विकसित करती है, वहीं एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी उसे समय प्रबंधन और बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करने का कौशल सिखाती है। बोर्ड के अच्छे अंक छात्र के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं, जो अंततः प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव को झेलने में मदद करता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पसंदीदा कोर्स के लिए आवेदन करते समय संबंधित यूनिवर्सिटी की विशिष्ट शर्तों और न्यूनतम अंकों की पात्रता की सावधानीपूर्वक जांच करें ताकि भविष्य में किसी भी तरह की तकनीकी बाधा से बचा जा सके।
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