रील और सेल्फी के चक्कर में जान गंवाते युवा! CM योगी का भावुक संदेश – “रियल और रील के बीच फर्क समझो”, अभिभावकों को भी की चेतावनी
4 मई 2026 को CM योगी ने बच्चों और अभिभावकों को लिखा भावुक संदेश, खतरनाक स्टंट और वायरल होने की होड़ पर चेतावनी
Yogi Adityanath Message: उत्तर प्रदेश में रील और सेल्फी के चक्कर में हो रहे हादसों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 मई 2026 को बच्चों और अभिभावकों के लिए एक भावपूर्ण संदेश लिखा, जिसमें उन्होंने चेताया कि लाइक, व्यूज और फॉलोअर्स की अंधी चाह में युवा अपनी अनमोल जान दांव पर लगा रहे हैं। रेलवे ट्रैक पर रील बनाना, ऊंची इमारतों की छतों पर सेल्फी लेना और तेज रफ्तार बाइक पर खतरनाक स्टंट करना—यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं को ‘रील’ (आभासी) और ‘रियल’ (वास्तविक) जिंदगी के बीच का फर्क समझना होगा। आखिर क्यों हमारे युवा इस खतरनाक होड़ में शामिल हो रहे हैं और क्या महज एक संदेश से यह समस्या हल होगी? इस लेख में हम इस बढ़ती डिजिटल महामारी की मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और प्रशासनिक परतों को समझने की कोशिश करेंगे।
Yogi Adityanath Message: सीएम योगी की ‘पाती’ के प्रमुख बिंदु और उनका महत्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संदेश किसी सख्त सरकारी आदेश के बजाय एक पिता की ओर से लिखी गई भावुक चिट्ठी जैसा था। उन्होंने बच्चों को “मेरे प्यारे बच्चों” कहकर संबोधित किया और पूरे संदेश में एक संवदेनशील और आत्मीय स्वर बनाए रखा। उनके संदेश की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
-
सृजनात्मकता बनाम जोखिम: मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया को तकनीकी प्रगति और संचार का सशक्त माध्यम माना, लेकिन इसके गलत उपयोग को समस्या की असली जड़ बताया।
-
सांस्कृतिक रील का सुझाव: उन्होंने युवाओं को रील बनाने से मना नहीं किया, बल्कि सुझाव दिया कि वे अपनी प्रतिभा का उपयोग उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और सामाजिक सकारात्मकता को फैलाने के लिए करें।
-
अभिभावकों की जिम्मेदारी: सीएम ने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और उन्हें डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ जीवन के वास्तविक मूल्यों के प्रति जागरूक करें।
-
हादसों की चेतावनी: उन्होंने साफ कहा कि चंद सेकंड की वायरलिटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालना बहादुरी नहीं, बल्कि एक अपूरणीय भूल है जो पूरे परिवार को उम्र भर का दुख दे सकती है।
Yogi Adityanath Message: रील और सेल्फी हादसों के पीछे का मनोविज्ञान
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, सोशल मीडिया पर रील और सेल्फी के जरिए जोखिम उठाने के पीछे ‘डोपामाइन’ (Dopamine) नामक रसायन की बड़ी भूमिका होती है। जब किसी युवा की रील वायरल होती है या उस पर हजारों ‘लाइक्स’ आते हैं, तो मस्तिष्क में खुशी और उत्साह का संचार होता है। यह एक प्रकार के नशे की तरह काम करता है, जिसे पाने के लिए युवा बार-बार और अधिक खतरनाक जोखिम लेने को तैयार हो जाते हैं। किशोरावस्था में पहचान की तलाश और साथियों (Peer pressure) के बीच ‘कूल’ दिखने की चाहत इस व्यवहार को और अधिक उकसाती है।
आज के डिजिटल युग में, सोशल मीडिया के एल्गोरिदम भी उन्हीं वीडियो को अधिक प्रमोट करते हैं जो चौंकाने वाले या खतरनाक होते हैं। इससे युवाओं में यह गलत धारणा बन जाती है कि जितना बड़ा खतरा होगा, उतनी ही जल्दी वे प्रसिद्ध होंगे। ऑनलाइन गेमिंग की लत ने भी युवाओं के मन में वास्तविक खतरे और काल्पनिक स्टंट के बीच के अंतर को धुंधला कर दिया है। रेलवे ट्रैक पर रील बनाते वक्त उन्हें अपनी जान जाने का डर कम और वीडियो के हिट होने का लालच ज्यादा रहता है।
Yogi Adityanath Message: सामाजिक चुनौतियां और डिजिटल पैरेंटिंग की आवश्यकता
वर्तमान समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम अत्यधिक बढ़ गया है, जबकि वास्तविक सामाजिक संपर्क कम हुए हैं। सीएम योगी ने अपनी ‘पाती’ में डिजिटल पेरेंटिंग (Digital Parenting) की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है। आज के समय में माता-पिता के लिए यह जानना जरूरी है कि उनका बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है और किस तरह का कंटेंट बना रहा है। लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों के काउंसलर्स का मानना है कि घर में ‘नो फोन जोन’ और निश्चित स्क्रीन टाइम की परंपरा फिर से शुरू करनी होगी।
स्कूल और शिक्षण संस्थानों को भी ‘डिजिटल वेलनेस’ को अपने पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए। बच्चों को यह सिखाना अनिवार्य है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने फायदे के लिए कैसे काम करती हैं और वायरल होने की अंधी दौड़ उन्हें किस तरह के मानसिक तनाव में डाल सकती है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी अब ऐसे खतरनाक कंटेंट बनाने वालों पर निगरानी तेज कर दी है, लेकिन केवल कानूनी सख्ती इस समस्या का समाधान नहीं है; इसके लिए व्यापक सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है।
read more here