Adhir Ranjan Chowdhury: परिसीमन और वन नेशन वन इलेक्शन का रास्ता साफ, कांग्रेस नेता अधीर रंजन बोले- TMC के बागी करेंगे पीएम मोदी का सपना पूरा
Adhir Ranjan Chowdhury: ONOE और परिसीमन का रास्ता साफ, TMC में बड़ी बगावत
Adhir Ranjan Chowdhury: पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची आंतरिक कलह को लेकर देश के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुए इस बड़े विद्रोह पर अपनी गहरी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। इसके साथ ही उन्होंने देश की राजनीति को लेकर एक बहुत बड़ी भविष्यवाणी भी कर दी है।
अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस में हुई इस बगावत के पीछे असल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का हाथ है। बीजेपी इस विद्रोह के जरिए देश में अपने बड़े राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने साफ कहा कि टीएमसी के बागी सांसद अब संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के अधूरे सपनों को पूरा करने का माध्यम बनेंगे। इस बगावत के बाद अब केंद्र सरकार के लिए संसद में परिसीमन बिल (Delimitation Bill) और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (ONOE) जैसे बड़े और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना बेहद आसान हो जाएगा।
Adhir Ranjan Chowdhury: टीएमसी के टुकड़े-टुकड़े कर रही है बीजेपी- अधीर रंजन चौधरी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल के पुराने सियासी घटनाक्रमों को याद करते हुए ममता बनर्जी की पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि साल 2011 में जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, तब उसने राज्य के विकास का झूठा तर्क दिया था। उस समय टीएमसी ने पंचायत स्तर पर काम करने वाले कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं को जबरन डरा-धमकाकर पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया था।
अधीर रंजन चौधरी ने मौजूदा स्थिति की तुलना पुराने दिनों से करते हुए कहा कि आज समय का चक्र पूरी तरह घूम चुका है। अब भारतीय जनता पार्टी बंगाल में अपनी बड़ी राजनीतिक जीत हासिल करने के बाद देश के विकास के नाम पर तृणमूल कांग्रेस के ही टुकड़े-टुकड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि जो तरीका कभी ममता बनर्जी ने कांग्रेस को कमजोर करने के लिए अपनाया था, आज वही तरीका बीजेपी उनकी अपनी पार्टी के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है।
बागी सांसदों पर कसा तंज: ‘डूबकर नहाना चाहते हैं, पर बाल भींगाना नहीं चाहते’
संसद और पार्टी के भीतर बगावत का झंडा बुलंद करने वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसदों को लेकर अधीर रंजन चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी के ये तमाम बागी सांसद पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के इशारों और उंगलियों पर काम कर रहे हैं। अगर इन नेताओं में थोड़ी भी राजनीतिक नैतिकता बची है, तो इन्हें बिना किसी बहानेबाजी के सीधे तौर पर आधिकारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने बागियों की इस राजनीतिक रणनीति पर बेहद ही अनोखा और तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के ये बागी नेता बीजेपी के साथ डूबकर नहाना तो चाहते हैं, मगर अपने सिर के बाल भींगाना नहीं चाहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि वे बीजेपी की सत्ता का पूरा लाभ तो उठाना चाहते हैं, लेकिन सीधे तौर पर जनता के सामने अपनी पहचान बदलने का जोखिम नहीं लेना चाहते।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बीजेपी के पास इस समय देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक सुनहरा और ऐतिहासिक मौका है। बीजेपी इस बड़े मौके का इस्तेमाल अपने सभी लंबित बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए करेगी। अब केंद्र सरकार संसद में काफी समय से लटके हुए अपने सारे एजेंडे वाले बिलों को आसानी से पास करवा लेगी। बीजेपी का एजेंडा बहुत बड़ा है और वह देश में परिसीमन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे कानूनों को लागू करने के लिए जो भी संख्या बल चाहिए, उसी दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।
युसूफ पठान पर बड़ा आरोप: ‘कुरान बांटकर और दंगे कराकर मुझे चुनाव हराया’
अधीर रंजन चौधरी ने अपनी बात रखते हुए साल 2024 के बहरामपुर लोकसभा चुनाव के दौरान के विवादित घटनाक्रमों का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बहरामपुर से सांसद और पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस उन्हें किसी भी कीमत पर बहरामपुर सीट से चुनाव हराना चाहती थी। इसी सियासी चाल के तहत टीएमसी ने उनके खिलाफ युसूफ पठान को मैदान में उतारा, क्योंकि उन्हें वहां से अधीर रंजन को हराने के लिए एक मुस्लिम चेहरे की तलाश थी।
अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी के चुनावी अभियान पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव के दौरान टीएमसी ने ‘बार-बार दादा को, इस बार भाईजान को’ का एक बेहद सांप्रदायिक नारा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि युसूफ पठान ने चुनाव जीतने के लिए स्थानीय मौलानाओं को अपने साथ लिया, मस्जिदों के ताबड़तोड़ दौरे किए और वहां धार्मिक रूप से कुरान बांटे। अधीर रंजन ने दावा किया कि टीएमसी ने बहरामपुर क्षेत्र में 30 फीसदी हिंदू और 70 फीसदी मुसलमान का एक सोशल और धार्मिक आंकड़ा तैयार किया और इसके बाद वहां जानबूझकर दंगे कराए गए, जिसके कारण वे चुनाव हार गए। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि युसूफ पठान सिर्फ टीएमसी की ओर से तैयार किए गए एक पुतले मात्र हैं, और इतिहास गवाह है कि राजनीतिक पुतलों की अपनी कोई रीढ़ की हड्डी नहीं होती।
Adhir Ranjan Chowdhury: लोकसभा में सीटों के समीकरण पर क्या होगा असर?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची इस बगावत का सीधा असर संसद के निचले सदन यानी लोकसभा के समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी को लंबे समय से अपने कुछ बेहद महत्वाकांक्षी बिलों जैसे ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और पूरे देश में लोकसभा सीटों के नए सिरे से निर्धारण (परिसीमन बिल) को पास कराने के लिए संसद में भारी समर्थन की जरूरत थी।
टीएमसी के इन बागी सांसदों के रुख से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में जब भी ये बिल संसद के पटल पर रखे जाएंगे, तब सरकार को विपक्ष के एक बड़े धड़े का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से साथ मिल सकता है। यही कारण है कि विपक्षी खेमे के बड़े नेता भी अब संसद के भीतर सरकार के रास्ते को पूरी तरह साफ मान रहे हैं।
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