Gold-Silver Price 1 June 2026: Lucknow में 24 कैरेट सोना ₹1.86 लाख के पार, Mumbai और Delhi में भी निवेशकों की खरीदारी तेज, सुरक्षित निवेश की मांग से बाजार में मजबूती

लखनऊ, दिल्ली और मुंबई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे कीमती धातुओं के दाम

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Gold-Silver Price 1 June 2026: निवेशक और आभूषण खरीदार दोनों ही बाजार की इस तेजी पर नजर रखे हुए हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की नीतियों का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के बाकी महीनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं, लेकिन अल्पावधि में कुछ सुधार भी संभव है।

लखनऊ और उत्तर प्रदेश में आज के भाव

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 1 जून 2026 को 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम लगभग 1,86,200 रुपये दर्ज की गई है। इसके साथ ही आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 1,71,000 रुपये के आसपास बना हुआ है। वहीं चांदी की बात करें तो स्थानीय सर्राफा बाजार में इसकी कीमत 2,86,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है।

उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों जैसे कानपुर, वाराणसी, मेरठ और आगरा में भी कीमतें लगभग इसी के समान स्तर पर देखी जा रही हैं। स्थानीय आभूषण कारोबारियों का कहना है कि शादियों का मुख्य सीजन समाप्त होने के बावजूद सर्राफा बाजार में मंदी नहीं है। पारंपरिक खरीदारों के साथ-साथ सुरक्षित निवेश की तलाश में आए नए निवेशक भी बाजार को लगातार मजबूती दे रहे हैं, जिससे खरीदारी का स्तर मध्यम से उच्च बना हुआ है।

दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों का हाल

देश की राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरेट शुद्ध सोना प्रति 10 ग्राम 1,85,800 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में तेजी का रुख और अधिक आक्रामक है, जहां सोने का भाव 1,87,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। इसके साथ ही मुंबई में चांदी की कीमत भी भारी उछाल के साथ 2,88,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को छू चुकी है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी दिल्ली के समान ही मजबूत दरें देखी जा रही हैं। मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में आभूषणों के साथ-साथ डिजिटल और फिजिकल गोल्ड दोनों की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है। शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिल्ली-एनसीआर के बड़े और छोटे निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मानकर आक्रामक तरीके से खरीदारी कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रमुख संकेत

वैश्विक सर्राफा बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत रिकॉर्ड 4,500 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच चुकी है, जबकि चांदी भी 45 से 48 डॉलर प्रति औंस के मजबूत दायरे में कारोबार कर रही है। मध्य पूर्व के देशों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त नीतियां और चीनी अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े बदलाव इन कीमतों को हवा दे रहे हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण आयातक देश है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की हर हलचल का सीधा असर यहां के खुदरा बाजार पर पड़ता है। विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपया दबाव में है और रुपये की इस कमजोरी से सोने का आयात काफी महंगा हो गया है। यही मुख्य वजह है कि अंतरराष्ट्रीय दरों में मामूली बदलाव होने पर भी घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर की ओर भाग रही हैं।

कीमतें लगातार बढ़ने के मुख्य कारण

साल 2026 में सोने की कीमतों में लगातार आ रही इस ऐतिहासिक तेजी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती मुद्रास्फीति और आर्थिक जोखिम हैं। जब भी दुनिया भर के शेयर बाजारों या प्रमुख मुद्राओं में अस्थिरता आती है, तब वैश्विक केंद्रीय बैंक और बड़े संस्थागत निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए भारी मात्रा में सोने का भंडार बढ़ाना शुरू कर देते हैं।

चांदी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी के पीछे सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि इसका बढ़ता हुआ औद्योगिक उपयोग सबसे प्रमुख कारक है। दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी पर बढ़ते फोकस के कारण सोलर पैनलों, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है। औद्योगिक मांग की इस भारी बढ़ोतरी के चलते चांदी का प्रदर्शन रिटर्न के मामले में सोने से भी ज्यादा आकर्षक और आक्रामक साबित हो रहा है।

आभूषण बाजार और ग्राहकों का रुख

घरेलू आभूषण बाजार में सोने की सांस्कृतिक और पारंपरिक मांग हमेशा की तरह ऊंची बनी हुई है, लेकिन आसमान छूती कीमतों ने ग्राहकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव ला दिया है। अब लोग भारी-भरकम गहनों के बजाय कम वजन वाले और आधुनिक डिजाइन के आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी कारण बाजार में इस समय 22 कैरेट और 18 कैरेट के आभूषणों की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है।

सर्राफा डीलरों का अनुमान है कि आगामी तिमाहियों में त्योहारों और शादियों का अगला दौर शुरू होते ही मांग में और ज्यादा तेजी आएगी। वर्तमान में भले ही गहनों की खुदरा बिक्री में थोड़ी सतर्कता देखी जा रही हो, लेकिन शुद्ध सोने के सिक्कों और बार (बिस्कुट) के रूप में निवेश करने वाले खरीदार बाजार में लगातार सक्रिय हैं, जिससे सर्राफा दुकानों पर रौनक गायब नहीं हुई है।

Gold-Silver Price 1 June 2026: निवेश की दृष्टि से बेहतर विकल्प

बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए हर व्यक्ति को अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का कम से कम 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा सोने में जरूर रखना चाहिए। भौतिक सोना खरीदने के झंझट और मेकिंग चार्ज से बचने के लिए निवेशक अब गोल्ड ईटीएफ (ETF), सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और डिजिटल गोल्ड जैसे आधुनिक विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं।

चांदी को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह लंबी अवधि में बेहतरीन रिटर्न देने की क्षमता रखती है, लेकिन इसमें सोने के मुकाबले उतार-चढ़ाव बहुत तेजी से होता है। जो निवेशक थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं, उनके लिए मौजूदा दरों पर भी चांदी में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करना एक समझदारी भरा और अत्यधिक फायदेमंद सौदा साबित हो सकता है।

सरकारी नीतियां और डिजिटल गोल्ड

केंद्र सरकार चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के लिए सोने के आयात पर लगातार कड़े कदम उठा रही है। देश में सोने और चांदी की अंतिम खुदरा कीमतों के निर्धारण में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) की दरें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हाल के दिनों में सरकार द्वारा नियमों में किए गए कुछ नीतिगत बदलावों से बाजार को लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद मिली है।

इसके साथ ही सरकार की नीतियों का पूरा जोर अब डिजिटल गोल्ड और ई-गोल्ड ट्रेडिंग को बढ़ावा देने पर है। इस डिजिटल बदलाव के कारण सोने के व्यापार में पारदर्शिता बहुत अधिक बढ़ गई है और आम मध्यमवर्गीय ग्राहक भी अब मात्र कुछ रुपयों से शुद्ध 24 कैरेट सोना ऑनलाइन खरीदकर सुरक्षित रख पा रहा है, जिससे प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी परेशानियां दूर हो गई हैं।

भविष्य की संभावनाएं और अनुमान

कमोडिटी बाजार के शीर्ष विश्लेषकों और आर्थिक जानकारों का अनुमान है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह तनावपूर्ण बनी रहीं, तो साल 2026 के अंत तक सोना 2,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के जादुई आंकड़े को छू सकता है। वहीं औद्योगिक मांग के सहारे आगे बढ़ रही चांदी बहुत जल्द 3,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत और गहरे होते हैं, तो सोने की कीमतों को और अधिक मजबूती मिलेगी। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इतनी बड़ी तेजी के बाद बाजार में किसी भी समय ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली आ सकती है, जिससे कीमतों में कुछ समय के लिए गिरावट या सुधार देखने को मिल सकता है।

Gold-Silver Price 1 June 2026: खरीदारों के लिए जरूरी सावधानियां

सर्राफा बाजार के इस ऊंचे स्तर पर खरीदारी करते समय आम उपभोक्ताओं और नए निवेशकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी प्रकार के धोखे या मिलावट से बचने के लिए हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) वाले हॉलमार्क प्रमाणित आभूषण या शुद्ध सोने के सिक्के ही खरीदें। नकली सोने और चांदी के विज्ञापनों से पूरी तरह सतर्क रहना जरूरी है।

गहने खरीदते समय केवल सोने के वजन और मौजूदा दर पर ही नहीं, बल्कि उस पर लगने वाले मेकिंग चार्ज और 3 प्रतिशत जीएसटी के गणित को भी अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। जानकारों की सबसे बड़ी सलाह यही है कि सोने और चांदी को हमेशा लंबी अवधि (कम से कम 3 से 5 वर्ष) के दृष्टिकोण के साथ ही खरीदना चाहिए, क्योंकि अल्पावधि के उतार-चढ़ाव में मेकिंग चार्ज के कारण नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।

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