Yoga for Better Sleep: ऑफिस से लौटकर 5 मिनट करें विपरीत करणी आसन
ऑफिस की थकान और तनाव से राहत पाने के लिए जानें विपरीत करणी आसन करने का सही तरीका।
Yoga for Better Sleep: आधुनिक कॉर्पोरेट जीवनशैली में दिनभर कंप्यूटर स्क्रीन के सामने एक ही मुद्रा में बैठे रहना, मानसिक तनाव, डेडलाइन का दबाव और शारीरिक निष्क्रियता आम बात हो चुकी है। घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहने के कारण शाम तक शरीर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और टांगों में भारीपन या सूजन महसूस होने लगती है। घर लौटने के बाद भी काम के विचार मस्तिष्क को शांत नहीं होने देते, जिससे रात को बिस्तर पर जाने के बाद करवटें बदलते हुए घंटों बीत जाते हैं और गहरी, आरामदायक नींद नहीं मिल पाती। ऐसे में हठयोग की एक अत्यंत सरल और प्रभावी मुद्रा ‘विपरीत करणी आसन’, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘लेग्स अप द वॉल पोज’ (Legs-Up-The-Wall Pose) कहा जाता है, मानसिक सुकून पाने और बेहतर नींद के लिए एक प्राकृतिक समाधान साबित हो सकती है। शाम के समय मात्र पांच से दस मिनट इस आसन का नियमित अभ्यास शरीर के थके हुए तंत्रिका तंत्र को पूरी तरह शांत करने में सक्षम है।
Yoga for Better Sleep: क्या है विपरीत करणी आसन और आधुनिक जीवनशैली में क्यों है लोकप्रिय?
संस्कृत ग्रंथों में ‘विपरीत’ का अर्थ उल्टा और ‘करणी’ का अर्थ क्रिया अथवा प्रक्रिया होता है। यह एक अर्ध-शीर्षासन जैसी आरामदायक मुद्रा है, जिसमें व्यक्ति अपनी पीठ के बल जमीन पर लेटकर दोनों पैरों को लंबवत रूप से दीवार के सहारे ऊपर की ओर टिका देता है। पारंपरिक शीर्ष या सर्वांगासन की तुलना में इस आसन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गर्दन, कंधों या रीढ़ पर कोई हानिकारक दबाव नहीं पड़ता और न ही किसी जटिल शारीरिक लचीलेपन की आवश्यकता होती है।
यही कारण है कि वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और योगाचार्यों द्वारा इसे एक रिस्टोरेटिव यानी पुनर्जीवन देने वाले आसन के रूप में अनुशंसित किया जाता है। दिनभर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में रहने के बाद जब शरीर के निचले हिस्से को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर उठाया जाता है, तो यह संपूर्ण शरीर में रक्त संचार की दिशा को सहजता से हृदय और मस्तिष्क की ओर मोड़ देता है, जिससे थकान का त्वरित निवारण होता है।
विपरीत करणी आसन करने की प्रामाणिक और सुरक्षित विधि
इस आसन का अभ्यास करने के लिए घर का कोई शांत और हवादार कोना चुनें जहां दीवार के पास पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो। फर्श पर एक आरामदायक योग मैट बिछाएं। यदि आपकी पीठ के निचले हिस्से या कूल्हों में तनाव रहता है, तो दीवार से सटाकर एक मुड़ा हुआ कंबल या पतला तकिया रख सकते हैं।
शुरुआत करने के लिए दीवार के किनारे एक तरफ होकर बैठ जाएं और फिर धीरे-धीरे अपने धड़ को पीछे की ओर फर्श पर ले जाते हुए दोनों पैरों को घुमाकर दीवार पर सीधा ऊपर की ओर फैला दें। आपके नितंब दीवार के बहुत करीब हो सकते हैं, लेकिन यदि हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों में अत्यधिक खिंचाव महसूस हो, तो नितंबों को दीवार से कुछ इंच पीछे रखना भी पूरी तरह उचित है।
इसके बाद दोनों हाथों को शरीर से थोड़ी दूरी पर बगल में फैला दें और हथेलियों को आकाश की ओर खुला रखें। कंधों और गर्दन को ढीला छोड़ दें ताकि छाती का विस्तार हो सके। अपनी आंखें बंद कर लें और सांस लेने की गति को पूरी तरह स्वाभाविक बनाए रखें। सांसों को खींचने या रोकने का प्रयास न करें, केवल आती-जाती सांस पर ध्यान केंद्रित करें। शुरुआत में दो से पांच मिनट तक इस स्थिति में रहें, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर दस से पंद्रह मिनट किया जा सकता है।
आसन से बाहर निकलते समय कभी भी झटके से न उठें। पहले दोनों घुटनों को मोड़कर छाती के करीब लाएं, दाईं ओर करवट लें और कुछ पलों तक उसी स्थिति में विश्राम करें। इसके बाद हाथों के सहारे धीरे से उठकर बैठ जाएं।
तनाव निवारण और गहरी नींद में कैसे सहायक बनती है यह मुद्रा?
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब व्यक्ति लगातार मानसिक तनाव में रहता है, तो उसका स्वायत्त तंत्रिका तंत्र ‘सिम्पैथेटिक’ यानी ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में फंसा रहता है, जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ा रहता है। विपरीत करणी आसन का शांत और उल्टा शारीरिक ढांचा वेगस तंत्रिका को उत्तेजित करता है, जिससे शरीर तुरंत ‘पैरासिम्पेथेटिक’ यानी ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में स्थानांतरित हो जाता है।
पैरासिम्पेथेटिक तंत्र के सक्रिय होते ही हृदय की गति सामान्य हो जाती है, रक्तचाप संतुलित होता है और मस्तिष्क में अल्फा तरंगों का संचार बढ़ने लगता है, जो मन को गहन शांति का अहसास कराती हैं। इसके अलावा, दिनभर पैरों में जमा हुआ लिम्फैटिक द्रव और शिरापरक रक्त गुरुत्वाकर्षण के सहज प्रवाह से पेट और हृदय की ओर वापस लौटने लगता है, जिससे पैरों की सूजन, पिंडलियों का दर्द और वैरिकोज वेंस के शुरुआती खिंचाव में उल्लेखनीय राहत मिलती है। जब शारीरिक तनाव समाप्त होता है, तो मस्तिष्क स्वाभाविक रूप से मेलाटोनिन हार्मोन जारी करने के लिए तैयार हो जाता है, जिससे व्यक्ति को बिना किसी दवा के गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद प्राप्त होती है।
किन परिस्थितियों और व्यक्तियों को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी?
यद्यपि विपरीत करणी एक अत्यंत सौम्य और सुरक्षित मुद्रा है, फिर भी कुछ विशिष्ट चिकित्सीय स्थितियों में इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए अथवा योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। ग्लूकोमा यानी काला मोतियाबिंद या रेटिना से जुड़ी गंभीर आंखों की समस्याओं से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए, क्योंकि उल्टी मुद्रा में सिर की ओर दबाव बढ़ने से आंखों का आंतरिक दबाव (इंट्राओकुलर प्रेशर) बढ़ सकता है।
इसके अतिरिक्त, अत्यधिक अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), हृदय की गंभीर बीमारियों, हर्निया या गर्दन व रीढ़ की हालिया सर्जरी वाले रोगियों को इस मुद्रा से परहेज करना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म के भारी प्रवाह के दिनों में यह आसन न करने की सलाह दी जाती है ताकि प्राकृतिक अपान वायु के अधोमुखी प्रवाह में कोई व्यवधान न आए। गर्भावस्था के दौरान भी पेट पर खिंचाव से बचने के लिए इसे केवल प्रमाणित प्रसवपूर्व योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। अभ्यास के दौरान यदि पैरों में सुन्नता, तीव्र झनझनाहट, सिरदर्द या चक्कर का अनुभव हो, तो तुरंत आसन समाप्त कर देना चाहिए।
Yoga for Better Sleep: योग के साथ इन आदतों का भी रखें ध्यान
विपरीत करणी आसन अनिद्रा और तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी उत्प्रेरक का काम कर सकता है, किंतु इसे एक व्यापक स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है। केवल पांच मिनट योग करके यदि व्यक्ति देर रात तक बिस्तर पर मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी के संपर्क में रहता है, तो नींद का चक्र पुनः बाधित हो सकता है। इसलिए सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी डिजिटल उपकरणों को बंद करने का नियम बनाएं।
शाम के समय चाय, कॉफी या निकोटीन जैसे उत्तेजक पदार्थों के सेवन से बचें और रात का भोजन सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले हल्का व सुपाच्य रखें। बेडरूम के तापमान को हल्का ठंडा और पूरी तरह अंधेरा रखने से शरीर को प्राकृतिक रूप से सोने का संकेत मिलता है। यदि तमाम सावधानियों और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद अनिद्रा, अत्यधिक घबराहट या मानसिक अवसाद के लक्षण कई हफ्तों तक लगातार बने रहते हैं, तो इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करने के बजाय किसी योग्य मनोचिकित्सक या स्लीप स्पेशलिस्ट से विधिवत चिकित्सकीय परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।
Read More Here
जमानत के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को क्राइम ब्रांच का नोटिस, जांच में शामिल होने का निर्देश
बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से हटाईं गईं 74 तस्वीरें, प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल
Guruvar Puja: भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा से जुड़ी मान्यताएं, जानें विधि, मंत्र और शुभ उपाय
Toxic Relationship: रिश्ते में प्यार की जगह मिल रहा तनाव? बाहर निकलने के ये 5 तरीके आएंगे काम