Ramayana Movie: ‘रामायण’ में रावण बनने पर यश ने जताया दबाव, बोले- एनटीआर और अरविंद त्रिवेदी जैसी विरासत के सामने डरना स्वाभाविक

'रामायण' के प्रचार के दौरान यश ने रावण के किरदार, विरासत और तैयारी पर खुलकर की बात

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Ramayana Movie: साउथ सिनेमा के पैन-इंडिया सुपरस्टार यश इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की पौराणिक एवं बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ में रावण (लंकेश) का किरदार निभाने को लेकर वैश्विक स्तर पर भारी चर्चा में बने हुए हैं। अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित ‘सैन डिएगो कॉमिक-कॉन’ (San Diego Comic-Con) में अपनी इस मेगा-बजट फिल्म के वैश्विक प्रचार के दौरान यश ने रावण जैसे अत्यंत जटिल और महान चरित्र को पर्दे पर जीवंत करते समय मन में उठने वाले डर और दबाव को खुलकर साझा किया। यश ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि भारतीय जनमानस के मन में रावण की एक बेहद स्पष्ट, मजबूत और पूजनीय-विद्वान की छवि दशकों से बसी हुई है, जिसे फिर से रचना किसी भी अभिनेता के लिए एक बहुत बड़ा जोखिम और मानसिक दबाव का विषय होता है।

सैन डिएगो कॉमिक-कॉन के भव्य मंच पर यश बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर, दूरदर्शी निर्देशक नितेश तिवारी और ऑस्कर विजेता वीएफएक्स कंपनी के संस्थापक व निर्माता नमित मल्होत्रा के साथ उपस्थित थे। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क आईजीएन (IGN) के साथ एक विशेष इंटरव्यू में यश ने अपने बचपन की स्मृतियों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि रामायण संभवतः वह पहली महागाथा थी जो उन्होंने बचपन में अपने दादाजी की गोद में बैठकर सुनी थी। ऐसे में जब इस पौराणिक ग्रंथ के सबसे बहुआयामी चरित्र को पर्दे पर उकेरने की बात आई, तो पुरानी स्थापित छवियों और लोक-स्मृतियों का दबाव उनके दिमाग पर होना स्वाभाविक था।

पुरानी ऐतिहासिक छवियों ने बढ़ाया दबाव और नया दृष्टिकोण अपनाने की चुनौती

यश ने इंटरव्यू में बहुत ही तार्किक बात कहते हुए स्पष्ट किया कि जब कोई अभिनेता किसी नई काल्पनिक कहानी पर काम करता है, तो उसका अभिनय ही उस किरदार की पहचान बन जाता है। लेकिन रावण जैसे जगजाहिर, सर्वविदित और विश्वप्रसिद्ध पौराणिक चरित्र के लिए काम करना किसी भी कलाकार के लिए बेहद कठिन कसौटी होता है। उन्होंने बताया कि उनसे पहले भारतीय सिनेमा और रंगमंच के कई महान दिग्गज इस भूमिका को अपनी-अपनी शैली में अमर कर चुके हैं। इसलिए उन्होंने सबसे पहले बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित किया और यह समझने का प्रयास किया कि रावण जैसे महान विद्वान ने जीवन में वे विवादित फैसले क्यों लिए।

निर्देशक नितेश तिवारी और फिल्म के लेखकों ने यश को पूरी आजादी दी कि वे इस पौराणिक चरित्र में पारंपरिक दृष्टिकोण से हटकर अपना एक नया और आधुनिक दृष्टिकोण ला सकें। यश के अनुसार, यह आजादी उनके लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी लेकर आई। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में पुरानी विरासत से तुलना का डर जरूर था, लेकिन उन्होंने इस डर और दबाव को सकारात्मक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और रावण के चरित्र को एक खलनायक मात्र मानने के बजाय उसकी विद्वत्ता, शिव भक्ति और रणनीतिक क्षमता के धरातल पर गढ़ने की कोशिश की।

एनटीआर और अरविंद त्रिवेदी की अमर छवि से तुलना की चुनौती

भारतीय सिनेमा और छोटे पर्दे के इतिहास में रामायण की गाथा सैकड़ों बार दिखाई जा चुकी है, लेकिन दर्शकों के दिलों-दिमाग पर कुछ प्रस्तुतियां हमेशा के लिए अमिट हो चुकी हैं। इनमें 1960 के दशक में तेलुगु सिनेमा के महान युगांतरकारी अभिनेता एन. टी. रामा राव (NTR) द्वारा सिल्वर स्क्रीन पर निभाए गए रावण के विभिन्न अवतार बेहद मशहूर हैं। वहीं, वर्ष 1988 में रामानंद सागर के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘रामायण’ में महान अभिनेता अरविंद त्रिवेदी द्वारा निभाया गया रावण का किरदार आज भी भारत के करोड़ों घरों में साक्षात रावण का पर्याय माना जाता है।

अरविंद त्रिवेदी के अट्टहास, भारी आवाज, चाल-ढाल और आंखों के तेवर की जो छाप भारतीय दर्शकों पर पड़ी है, उससे आगे निकलना या उसकी बराबरी करना किसी भी आधुनिक स्टार के लिए माउंट एवरेस्ट चढ़ने जैसा है। यश को इस बात का पूरा भान था कि उनके हर एक संवाद, हाव-भाव और शारीरिक भाषा की तुलना सीधे इन महान दिग्गजों से की जाएगी। यही वजह थी कि यश ने रावण को केवल एक ‘विलेन’ के रूप में पेश करने के बजाय उसके भीतर छिपे प्रकांड पंडित, महान संगीतकार, परम शिव भक्त और राजनीतिज्ञ के जटिल ताने-बाने को पर्दे पर उकेरने पर जोर दिया।

कॉमिक-कॉन में अंतरराष्ट्रीय डील और ट्रेलर रिलीज टालने की रणनीतिक वजह

अमेरिका के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन से फिल्म ‘रामायण’ का अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियान बहुत ही भव्य पैमाने पर शुरू हुआ। दुनिया भर के सिनेमा प्रेमी और भारतीय दर्शक इस आस में थे कि इस विशाल इवेंट का समापन फिल्म के पहले आधिकारिक टीज़र या ट्रेलर के साथ होगा। हालांकि, ऐन वक्त पर निर्माता नमित मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी करके ट्रेलर की रिलीज को फिलहाल आगे बढ़ाने की घोषणा की, जिससे प्रशंसकों को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ा।

निर्माता नमित मल्होत्रा ने इसके पीछे की रणनीतिक वजह बताते हुए खुलासा किया कि रामायण को वैश्विक हॉलीवुड फिल्मों के स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से ‘सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट’ (Sony Pictures Entertainment) के साथ एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय वितरण डील पूरी की गई है। इस नई ग्लोबल पार्टनरशिप के तहत फिल्म को दुनिया भर के हजारों थिएटर्स में एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इसी वैश्विक रणनीति के कारण यह तय किया गया कि ट्रेलर को किसी क्षेत्रीय मंच के बजाय एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर नए सिरे से लॉन्च किया जाएगा ताकि पूरी दुनिया का ध्यान खींचा जा सके।

फिल्म की विशाल स्टारकास्ट और दिवाली पर रिलीज की मास्टर प्लानिंग

नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही यह महाकाव्य फिल्म दो बड़े भागों में तैयार की जा रही है, जो आधुनिक भारतीय सिनेमा का सबसे महंगा प्रोजेक्ट है। ‘रामायण: पार्ट वन’ इसी वर्ष दिवाली के शुभ अवसर पर दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस फिल्म में बॉलीवुड सुपरस्टार रणबीर कपूर भगवान श्री राम के पावन चरित्र को साकार कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठित और सादगी पसंद अभिनेत्री साईं पल्लवी माता सीता के पावन रूप में नजर आएंगी।

मुख्य तिकड़ी के अलावा फिल्म में भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकारों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिलेगा। सनी देओल भगवान हनुमान की भूमिका में अपनी गरजदार आवाज देंगे, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण, रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा, लारा दत्ता कैकेयी, अरुण गोविल राजा दशरथ, विवेक ओबेरॉय और कुणाल कपूर अन्य महत्वपूर्ण पौराणिक किरदारों में दिखाई देंगे। यश ने बताया कि फिल्म की शूटिंग तकनीक, स्पेशल इफेक्ट्स, मेकअप, कॉस्ट्यूम और विस्तृत रिहर्सल में काफी समय लगा है, जो एक अभिनेता के रूप में बेहद डिमांडिंग लेकिन संतोषजनक अनुभव रहा।

सेट पर शिव तांडव और ट्रांस का माहौल: यश की खास तैयारी

रावण के परम शिव भक्त वाले पहलू को अपने भीतर महसूस करने के लिए यश ने शूटिंग के दौरान एक बेहद अनोखा तरीका अपनाया। फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी ने खुलासा किया कि यश जब भी सेट पर अपने वैनिटी वैन या मेकअप रूम से बाहर निकलते थे, तो उनके आसपास जोर-जोर से ‘शिव तांडव स्तोत्रम्’ और महाकाल के शक्तिशाली मंत्र गूंजते रहते थे। इस आध्यात्मिक संगीत के जरिए यश खुद को एक खास तरह के ‘ट्रांस’ (आध्यात्मिक मनोदशा) में ले जाते थे ताकि वे लंकेश की भक्ति और उसके अहंकार के उस अनूठे मेल को जीवंत कर सकें।

यश रावण के चरित्र को महज एक नकारात्मक या काले पन्नों वाले व्यक्ति के रूप में नहीं देखते। उनका मानना है कि दुनिया का कोई भी महान पौराणिक चरित्र पूरी तरह काला या सफेद (Black or White) नहीं होता। रावण ने अपनी कामवासना और अहंकार के कारण भले ही कई अक्षम्य अपराध किए, लेकिन उसकी विद्वत्ता, वास्तुकला की समझ और भक्ति की मिसाल आज भी सनातन संस्कृति में दी जाती है। यश ने किरदार के इन्हीं दोनों विरोधाभासी पक्षों को पर्दे पर पूरी ईमानदारी से उतारने का प्रयास किया है।

मानवता का सार्वभौमिक संदेश और राम-रावण महायुद्ध की शूटिंग

रामायण की सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर बात करते हुए यश ने इसे केवल एक धार्मिक ग्रंथ न मानकर संपूर्ण मानवता की कहानी करार दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन हर आम और खास इंसान को विपरीत परिस्थितियों में मर्यादा में रहने की प्रेरणा देता है। एक राजा के रूप में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने 14 वर्षों का वनवास, पारिवारिक कष्ट और कई विपदाएं मुस्कुराते हुए झेलीं। यह एक ऐसी सार्वभौमिक भावना है जो दुनिया के किसी भी देश या धर्म के नागरिक को गहराई से प्रभावित कर सकती है।

फिल्म को दो भागों में विभाजित करने का सबसे बड़ा कारण इसकी विस्तृत कहानी और विशाल कैनवास है। पहला भाग इस साल दिवाली पर और दूसरा भाग अगले साल यानी दिवाली पर रिलीज किया जाएगा। रणबीर कपूर और यश ने इस बात की पुष्टि की कि श्री राम और रावण के बीच लड़े गए ऐतिहासिक युद्ध का महा-क्लाइमेक्स अभी तक शूट नहीं हुआ है। दोनों दिग्गज अभिनेताओं के बीच के सभी शक्तिशाली और बड़े सीन्स को आगामी शूटिंग शेड्यूल में बेहद भव्य और आधुनिक वीएफएक्स तकनीक के साथ शूट किया जाएगा।

Ramayana Movie: दर्शकों की विशाल उम्मीदें और उत्तर-दक्षिण सिनेमा का अद्भुत मेल

फिल्म ‘रामायण’ में भारतीय सिनेमा के दो सबसे समृद्ध और बड़े उद्योगों—बॉलीवुड और साउथ सिनेमा का ऐसा ऐतिहासिक मेल देखने को मिल रहा है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। एक तरफ जहां बॉलीवुड के सबसे प्रतिभावान अभिनेताओं में शुमार रणबीर कपूर हैं, तो दूसरी तरफ ‘केजीएफ’ से पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाने वाले कन्नड़ सुपरस्टार यश हैं। इन दोनों दिग्गजों का एक ही फ्रेम में आमने-सामने होना सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

समीक्षकों का मानना है कि यश का यह बयान कि वे रावण के किरदार को लेकर डरे हुए थे, उनके एक संजीदा और परिपक्व अभिनेता होने का प्रमाण है। जब कोई कलाकार अपनी विरासत और जिम्मेदारी को समझता है, तभी वह अपने अभिनय में गहराई ला पाता है। पुरानी तस्वीरों और अरविंद त्रिवेदी जैसे दिग्गजों की विरासत का दबाव होना स्वाभाविक है, लेकिन यश की मेहनत और नितेश तिवारी की आधुनिक सोच इस महाकाव्य को एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम देने में सक्षम नजर आ रही है।

निष्कर्ष और रिलीज को लेकर उत्सुकता

जैसे-जैसे ‘रामायण: पार्ट वन’ की रिलीज डेट (Ramayana Movie) पास आ रही है, वैसे-वैसे दुनिया भर में इस फिल्म को लेकर उत्साह और कौतुहल का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। सोनी पिक्चर्स के साथ हुई ग्लोबल डील के बाद अब हर किसी की निगाहें इसके आने वाले ग्रैंड इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च पर टिकी हैं। क्या यश अपने शानदार अभिनय से पुरानी तुलनाओं को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रच पाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि यश का यह नया रूप भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

प्रशंसक अब बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब पर्दे पर रणबीर कपूर के श्री राम अवतार के सामने यश का महाबली रावण रूप टकराएगा। यह फिल्म केवल एक पौराणिक कहानी की प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का एक ऐसा संगम बनने जा रही है जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।

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