High Uric Acid Diet: हाई यूरिक एसिड में कौन सी दाल खानी चाहिए और कौन सी बचें, जानें डॉक्टरों की सलाह, स्वस्थ रहने का आसान उपाय
यूरिक एसिड में मूंग और मसूर दाल फायदेमंद, चना-अरहर-राजमा से बचें, डॉक्टरों की सलाह
High Uric Acid Diet: आजकल की आधुनिक और असंतुलित जीवनशैली में हाई यूरिक एसिड की समस्या एक बेहद आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरी है। देश में हर उम्र के लोग जोड़ों में तेज दर्द, अचानक आने वाली सूजन, जकड़न और चलने-फिरने में होने वाली असहनीय दिक्कत जैसी शिकायतों से परेशान हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे दैनिक खान-पान में की गई थोड़ी सी भी लापरवाही या अज्ञानता शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को अचानक बढ़ा सकती है। विशेष रूप से भारतीय थाली का मुख्य हिस्सा माने जाने वाली दालों का चुनाव इस समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेदिक और आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि सही दालों का चयन करके यूरिक एसिड को पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है, जबकि गलत दालों का सेवन इस समस्या को कई गुना अधिक गंभीर और दर्दनाक बना सकता है।
चिकित्सीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो यूरिक एसिड हमारे शरीर में प्रोटीन और प्यूरीन नामक तत्वों के मेटाबॉलिज्म (पाचन प्रक्रिया) के दौरान बनने वाला एक प्राकृतिक अपशिष्ट या बाय-प्रोडक्ट है। सामान्य स्थिति में हमारी किडनी इसे रक्त से फिल्टर करके मूत्र के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में प्यूरीन की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है या फिर किडनी इसे ठीक से बाहर निकालने में असमर्थ हो जाती है, तो यह यूरिक एसिड रक्त में बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे क्रिस्टल्स के रूप में हमारे जोड़ों, हड्डियों और ऊतकों के बीच जमा होने लगता है। यदि समय रहते सही और संतुलित आहार की मदद से इसे कंट्रोल न किया जाए, तो यह गाउट (गठिया) और किडनी स्टोन जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले लेता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि हाई यूरिक एसिड की स्थिति में कौन सी दालें आपके लिए अमृत समान हैं और किन दालों से आपको पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
यूरिक एसिड में अच्छी मानी जाने वाली दालें
मूंग की दाल को यूरिक एसिड के मरीजों के लिए दुनिया भर के डॉक्टरों और आहार विशेषज्ञों द्वारा सबसे सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यह दाल स्वभाव से बेहद हल्की, सुपाच्य और शरीर को ठंडक पहुंचाने वाली होती है। मूंग की दाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्राकृतिक रूप से प्यूरीन की मात्रा बहुत ही कम होती है, जिसके कारण इसके सेवन से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने का खतरा बिल्कुल न के बराबर रहता है। इसके साथ ही यह शरीर को आवश्यक मात्रा में फाइबर और जरूरी विटामिंस भी प्रदान करती है, जो मेटाबॉलिज्म को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं।
यूरिक एसिड के मरीजों को मूंग दाल का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसे बनाने से कम से कम एक से दो घंटे पहले साफ पानी में भिगोकर रखना चाहिए। पानी में भिगोने से दाल में मौजूद फाइटिक एसिड बाहर निकल जाता है, जिससे इसका पाचन और भी ज्यादा आसान और हल्का हो जाता है। इसे बनाते समय बहुत अधिक तेल, तीखे मसालों या भारी घी का उपयोग करने के बजाय, बेहद हल्के जीरे और हींग के तड़के के साथ पकाना चाहिए। इसके नियमित और संतुलित सेवन से न केवल हमारा पाचन तंत्र मजबूत होता है, बल्कि जोड़ों में होने वाले पुराने दर्द और सूजन में भी धीरे-धीरे काफी राहत महसूस होने लगती है।
इसके अलावा, छिलके वाली लाल मसूर की दाल को भी यूरिक एसिड के मरीजों के लिए एक अच्छा और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। लाल मसूर की दाल को मध्यम प्यूरीन वाली श्रेणी में रखा जाता है, जिसका अर्थ है कि यदि इसे सीमित मात्रा में और अच्छी तरह से पकाकर खाया जाए, तो यह शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह दाल शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का एक बहुत ही शानदार और सुलभ स्रोत है। चूंकि यूरिक एसिड के मरीजों को पूरी तरह से प्रोटीन बंद नहीं करना चाहिए, इसलिए लाल मसूर की दाल उनके शरीर में प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता को पूरा करती है और यूरिक एसिड के स्तर को ज्यादा प्रभावित भी नहीं होने देती।
जिन दालों से बचना चाहिए
हाई यूरिक एसिड की समस्या से परेशान मरीजों को चना दाल, अरहर (तुअर) दाल और सूखी मटर की दाल का सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि ये दालें अत्यंत उच्च प्यूरीन (High Purine) वाली श्रेणी में आती हैं। जब कोई मरीज इन भारी दालों का सेवन करता है, तो शरीर में प्यूरीन का ब्रेकडाउन तेजी से होता है, जिससे यूरिक एसिड का स्तर अचानक से स्पाइक कर जाता है। इसके परिणामस्वरूप जोड़ों में तीव्र और असहनीय चुभन वाला दर्द शुरू हो जाता है और गाउट की समस्या और अधिक गंभीर रूप धारण कर लेती है।
इनके अलावा, राजमा, सफेद छोले, लोबिया और काले चने जैसी अत्यधिक हाई प्रोटीन और भारी गेंहू-अनाज की श्रेणी वाली दालों का सेवन भी यूरिक एसिड के मरीजों को बिल्कुल न्यूनतम कर देना चाहिए या कुछ समय के लिए रोक देना चाहिए। इन मोटे दानों वाली दालों और बीन्स में प्यूरीन और जटिल प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसे पचाने में हमारे पाचन तंत्र और किडनी को अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है। जब किडनी पर दबाव बढ़ता है, तो वह यूरिक एसिड को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती, जो अंततः जोड़ों में सूजन और यूरिक एसिड को बढ़ावा देने का मुख्य कारण बनता है।
यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के उपाय
शरीर में बढ़े हुए यूरिक एसिड को तेजी से कम करने और उसे प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने का सबसे आसान और अचूक उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी पीना। यूरिक एसिड के प्रत्येक मरीज को दिनभर में कम से कम तीन से चार लीटर या 10 से 12 गिलास साफ पानी जरूर पीना चाहिए। अधिक मात्रा में पानी पीने से हमारे शरीर में यूरिन का फ्लो बढ़ता है, जिससे किडनी सक्रिय रूप से काम करती है और जोड़ों में जमा टॉक्सिंस तथा यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को घोलकर यूरिन के रास्ते आसानी से शरीर से बाहर निकाल देती है।
इसके साथ ही, अपने दैनिक आहार में से कुछ विशेष सब्जियों जैसे पालक, मशरूम, बंदगोभी, टमाटर और बहुत अधिक बीज वाली चीजों का सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद कर देना चाहिए, क्योंकि ये भी प्यूरीन को बढ़ा सकती हैं। बाजार में मिलने वाले अत्यधिक मीठे पैक्ड ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड सोडा, मिठाइयां और बहुत ज्यादा तला-भुना या जंक फूड खाने से पूरी तरह परहेज करें। पुरुष मरीजों के लिए विशेष सलाह है कि वे शराब, बियर और किसी भी प्रकार के नॉनवेज (विशेषकर रेड मीट और सीफूड) का सेवन तुरंत बंद कर दें, क्योंकि ये चीजें यूरिक एसिड की सबसे बड़ी दुश्मन मानी जाती हैं।
अपने दिन की शुरुआत करने के लिए सुबह खाली पेट हल्का गुनगुना पानी पीने की एक अच्छी आदत जरूर डालें। इसके साथ ही, शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह या शाम को कम से कम तीस मिनट का हल्का व्यायाम, योग या तेज गति से वॉक (पैदल चलना) अवश्य करें। जिन लोगों का वजन बहुत अधिक है, उन्हें अपना वजन नियंत्रण में रखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक वजन होने से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और जोड़ों पर दबाव भी बढ़ता है।
आहार में संतुलन कैसे बनाएं
हाई यूरिक एसिड में शरीर को कमजोर होने से बचाने के लिए आहार में सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। दोपहर या रात के भोजन में दालों का सेवन करते समय उसके साथ साधारण सफेद चावल के बजाय ब्राउन राइस, क्विनोआ या जौ की रोटी मिलाकर खाना एक बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक विकल्प साबित होता है। सब्जियों में विशेष रूप से लौकी, तोरई, परवल, टिंडा, भिंडी और हल्की हरी पत्तेदार सब्जियों को अपने भोजन में प्रमुखता से शामिल करें, क्योंकि ये सब्जियां शरीर को क्षारीय (Alkaline) बनाती हैं जो एसिड को शांत करता है।
फलों के सेवन की बात करें तो यूरिक एसिड के मरीजों के लिए सेब, केला, संतरा, मौसमी और विशेष रूप से चेरी व जामुन जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इसके अलावा, घर में जमी हुई ताजी दही और पतली छाछ का नियमित सेवन भी पाचन को दुरुस्त रखता है। जो लोग पूरी तरह शाकाहारी नहीं हैं और प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं, वे अपने शरीर की जरूरत को पूरा करने के लिए अंडे का सफेद भाग (Egg White) या बहुत ही कम मात्रा में बिना तेल-मसाले के उबला हुआ चिकन (Chicken Breast) ले सकते हैं।
डॉक्टरों की सलाह
प्रसिद्ध आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि यूरिक एसिड के मरीजों को केवल इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि वे क्या खा रहे हैं, बल्कि इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि उसे कैसे खा रहे हैं। उनके अनुसार, दालों को हमेशा कुकर में बंद करके पकाने के बजाय पारंपरिक रूप से खुले बर्तन में पकाना चाहिए और उबलते समय ऊपर आने वाले सफेद झाग को पूरी तरह से निकालकर बाहर फेंक देना चाहिए, क्योंकि वही झाग यूरिक एसिड बढ़ाने का मुख्य कारण होता है। दाल में हमेशा लहसुन, अदरक, हींग और हल्दी का हल्का तड़का लगाना चाहिए जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
इसके साथ ही, आधुनिक चिकित्सा के डॉक्टरों का भी यही मानना है कि केवल दवाओं के सहारे यूरिक एसिड को कभी भी जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है, जब तक कि मरीज अपने खान-पान और दिनचर्या में उचित सुधार न करे। यूरिक एसिड के सभी मरीजों को हर तीन से छह महीने में अपनी नियमित ब्लड टेस्ट जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि शरीर में इसके स्तर का पता चलता रहे। जोड़ों में दर्द या सूजन के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और बिना चिकित्सीय सलाह के कोई भी पेनकिलर दवा खाने से बचना चाहिए।
यूरिक एसिड से बचाव के अन्य टिप्स
यूरिक एसिड से हमेशा बचे रहने के लिए अपने रात के खाने (डिपर) को हमेशा बेहद हल्का और सुपाच्य रखना चाहिए। कोशिश करें कि रात का खाना हर हाल में 8 बजे से पहले या सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले जरूर खा लें, ताकि सोते समय पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। इसके अलावा, आज के मानसिक तनाव भरे माहौल में खुद को तनावमुक्त रखने का प्रयास करें, क्योंकि अत्यधिक तनाव लेने से भी शरीर के हार्मोंस असंतुलित होते हैं और यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है। हर दिन कम से कम सात से आठ घंटे की गहरी और अच्छी नींद अवश्य लें।
दैनिक जीवन में नियमित रूप से किया जाने वाला प्राणायाम और ध्यान आपके शरीर के संपूर्ण मेटाबॉलिज्म रेट को प्राकृतिक रूप से बेहतर बनाता है, जिससे किडनी सुचारू रूप से और दोगुनी शक्ति से काम करना शुरू कर देती है। पानी में थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर पीना भी शरीर को डिटॉक्स करने का एक बहुत ही सरल और प्रभावी घरेलू तरीका है।
निष्कर्ष: संक्षेप में कहा जाए तो हाई यूरिक एसिड (High Uric Acid Diet) की समस्या में आपके द्वारा किया गया सही और सचेत दालों का चुनाव ही आपको इस गंभीर बीमारी के दर्द से हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकता है। अपनी थाली में मूंग और लाल मसूर जैसी हल्की व सुपाच्य दालों को प्राथमिकता दें और चना, अरहर व राजमा जैसी भारी, प्यूरीन युक्त दालों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। एक अनुशासित जीवनशैली, स्वस्थ संतुलित आहार और डॉक्टरों द्वारा दिए गए इन आसान सुझावों का पालन करके आप बिना किसी परेशानी के हमेशा स्वस्थ और दीर्घायु बने रह सकते हैं।
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