Is lipstick allowed in Fasting: व्रत में लिपस्टिक लगाने से पहले जरूर जान लें ये बातें, पैकेट पर चेक करें ये 3 चीजें

Is lipstick allowed in Fasting: व्रत में लिपस्टिक लगाने से पहले जरूर जान लें ये बातें, पैकेट पर चेक करें ये 3 चीजें

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Is lipstick allowed in Fasting: सनातन संस्कृति में व्रत और त्योहारों का सिलसिला पूरे साल चलता रहता है, विशेषकर सावन के पवित्र महीने में महिलाएं विभिन्न व्रतों के दौरान अपनी आस्था और श्रृंगार दोनों का पूरा ध्यान रखती हैं। पूजा-पाठ के दौरान पारंपरिक पहनावे के साथ हल्का मेकअप करना आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस लिपस्टिक का इस्तेमाल आप कर रही हैं, वह आपके व्रत के नियमों पर असर डाल सकती है? जी हां, मेकअप का यह सबसे आम हिस्सा दिखने में भले ही खूबसूरत हो, लेकिन कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में ऐसे छिपे हुए तत्व होते हैं जो जानवरों से प्राप्त किए जाते हैं। इसलिए व्रत के दौरान या सामान्य दिनों में भी अपनी आस्था की शुद्धता बनाए रखने के लिए खरीदारी करते समय पैकेट पर कुछ जरूरी बातों की जांच करना बहुत आवश्यक हो जाता है।

Is lipstick allowed in Fasting: लिपस्टिक में छिपा हो सकता है कीटों से बना कारमाइन रंग

बाजार में मिलने वाली आकर्षक लाल और गुलाबी रंग की कई लिपस्टिक में चमकीले शेड के लिए कारमाइन का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक प्रकार के छोटे कीड़ों से प्राप्त किया जाता है। यदि आप पूरी तरह से शाकाहारी जीवनशैली का पालन करती हैं और किसी भी ऐसे उत्पाद से बचना चाहती हैं जिसमें जीवों का अंश हो, तो सामग्री की सूची में इसे अवश्य देखें। इस तरह के केमिकल और नेचुरल रंग अनजाने में आपके व्रत के नियमों को खंडित कर सकते हैं, क्योंकि देखने में यह रंग बेहद सामान्य लगते हैं लेकिन इनका स्रोत पशु-आधारित होता है। इसलिए किसी भी नए कॉस्मेटिक उत्पाद को खरीदने से पहले उसके भीतर इस्तेमाल होने वाले पिगमेंट की पूरी जानकारी प्राप्त करना समझदारी का काम माना जाता है।

बीवैक्स यानी मधुमक्खियों के मोम की होती है मौजूदगी

अक्सर होंठों को लंबे समय तक मुलायम रखने और लिपस्टिक को सही टेक्सचर देने के लिए इसमें बीवैक्स मिलाया जाता है, जो सीधे तौर पर मधुमक्खियों के छत्तों से निकाला जाता है। बाजार में बिकने वाले अधिकांश लिप बाम और पारंपरिक लिपस्टिक में यह मोम एक मुख्य घटक के रूप में काम करता है, जो उत्पाद को जमने में मदद करता है। अगर आप वीगन या पूरी तरह से अहिंसक उत्पादों का उपयोग करना पसंद करती हैं, तो आपको ऐसे विकल्पों की तलाश करनी चाहिए जिन पर स्पष्ट रूप से बीवैक्स-फ्री लिखा हो। छोटी सी लापरवाही के कारण अनजाने में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल हो जाता है जिन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से वर्जित माना जाता है।

ऊन से मिलने वाले लैनालिन तत्व की भी करें जांच

होंठों की नमी बनाए रखने वाले कई उत्पादों में लैनालिन का उपयोग बहुतायत से किया जाता है, जिसे भेड़ों की ऊन से निकाला जाने वाला एक प्रकार का तैलीय पदार्थ माना जाता है। इसका प्रयोग केवल लिपस्टिक में ही नहीं बल्कि लिप ग्लॉस, कोल्ड क्रीम और कई तरह के हेयर केयर उत्पादों में भी धड़ल्ले से किया जाता है। खरीदारी करते समय केवल मुख्य ब्रांड या उसके विज्ञापनों पर भरोसा करने के बजाय उसके पीछे छपे छोटे अक्षरों में लिखी सामग्री को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि उत्पाद में इस तरह के पशु-व्युत्पन्न तत्व मौजूद हैं, तो व्रत रखने वाली महिलाओं को धार्मिक शुचिता का ध्यान रखते हुए उनसे दूरी बना लेना ही बेहतर विकल्प साबित होता है।

वीगन और क्रूएल्टी-फ्री उत्पादों का अंतर समझना जरूरी

आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकांश सौंदर्य उत्पादों पर वीगन और क्रूएल्टी-फ्री जैसे शब्द लिखे होते हैं, जिन्हें अक्सर लोग एक ही मान लेते हैं जबकि दोनों में जमीन-आसमान का फर्क होता है। वीगन उत्पादों का मतलब होता है कि उनमें किसी भी प्रकार के पशु-आधारित या एनिमल-डेरिव्ड तत्वों का उपयोग नहीं किया गया है, जबकि क्रूएल्टी-फ्री का अर्थ होता है कि उस उत्पाद की टेस्टिंग जानवरों पर नहीं की गई है। कोई भी सामान क्रूएल्टी-फ्री होने के बावजूद वीगन नहीं हो सकता है क्योंकि उसमें जीवों से प्राप्त होने वाले तत्व हो सकते हैं। इसलिए व्रत के दौरान पूरी शुद्धता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि आप पैकेट पर दोनों ही मानकों की बारीकी से जांच करें।

Is lipstick allowed in Fasting: सही और शुद्ध उत्पाद चुनने के अन्य व्यावहारिक तरीके

किसी भी लिपस्टिक को खरीदने से पहले उसके डिब्बे पर छपे लेबल को गौर से पढ़ना और उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी सामग्री की पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है। केवल उस पर लिखे नेचुरल या हर्बल जैसे लुभावने शब्दों के झांसे में न आएं, क्योंकि कई बार प्राकृतिक दिखने वाले उत्पादों में भी गुप्त रूप से पशु-अंश मिलाए जाते हैं। यदि किसी विशिष्ट घटक का स्रोत आपको स्पष्ट रूप से समझ न आए, तो दुकान के कर्मचारियों से पूछने के बजाय इंटरनेट पर उसकी प्रामाणिकता की जांच कर लें। सही जानकारी और थोड़ी सी जागरूकता आपको अनजाने में होने वाली गलतियों से बचा सकती है और आपके मन को पूरी तरह संतुष्ट रख सकती है।
व्रत और उपवास के दौरान शारीरिक पवित्रता के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता का भी विशेष महत्व होता है, जिसमें हमारे द्वारा उपयोग की जाने वाली हर छोटी-बड़ी वस्तु महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सावन के पवित्र दिनों में जब महिलाएं उपवास रखती हैं, तो उनकी यह छोटी सी सावधानी न केवल उनके व्रत के नियमों की रक्षा करती है बल्कि उन्हें सौंदर्य प्रसाधनों के प्रति अधिक जागरूक भी बनाती है। पैकेट पर दिए गए निर्देशों और सामग्रियों की पूरी सूची को पढ़कर ही किसी भी प्रसाधन का चयन करना एक समझदार उपभोक्ता की पहचान है। इस प्रकार आप अपनी आस्था का सम्मान करते हुए बिना किसी संकोच के अपने पर्व और त्योहारों का भरपूर आनंद उठा सकती हैं।

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