Vitamin D की कमी,- शरीर पर क्या पड़ते हैं गहरे असर, जानें लक्षण, बीमारियां और बचाव के उपाय

धूप कम मिलने से विटामिन D की कमी, हड्डी कमजोर, थकान, अवसाद; सुबह 15-20 मिनट धूप और डाइट से बचाव

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Vitamin D deficiency: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अधिकतर लोग घर के अंदर या ऑफिस में इतना समय बिताते हैं कि उनके शरीर को पर्याप्त धूप ही नहीं मिल पाती। नतीजा यह है कि विटामिन डी की कमी तेजी से एक आम स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है।

Vitamin D deficiency: विटामिन डी है क्यों इतना जरूरी?

  • सनशाइन विटामिन: इसे अक्सर ‘सनशाइन विटामिन’ कहा जाता है क्योंकि सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर त्वचा इसे खुद बनाती है।

  • अवशोषण: यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में अहम भूमिका निभाता है, जो हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए अनिवार्य हैं।

  • अन्य लाभ: यह रोग प्रतिरोधक क्षमता, मांसपेशियों की कार्यक्षमता और मस्तिष्क की सेहत के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है।

Vitamin D deficiency: शरीर में कमी होने पर दिखते हैं ये लक्षण

विटामिन डी की कमी के लक्षण अक्सर शुरुआत में नजरअंदाज कर दिए जाते हैं:

  • शारीरिक कमजोरी: हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में असामान्य कमजोरी, अत्यधिक थकान और सुस्ती।

  • मानसिक प्रभाव: मूड में बार-बार बदलाव आना (मूड स्विंग) और तनाव महसूस करना।

  • इम्यून सिस्टम: बार-बार बीमार पड़ना और संक्रमण से जल्दी ठीक न होना।

Vitamin D deficiency: इन गंभीर बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा

लंबे समय तक विटामिन डी की कमी से निम्नलिखित बीमारियां दस्तक दे सकती हैं:

  • ऑस्टियोमलेशिया: हड्डियां नरम और कमजोर पड़ने लगती हैं।

  • रिकेट्स: बच्चों में होने वाली हड्डियों की समस्या।

  • ऑस्टियोपोरोसिस: हड्डियां इतनी भंगुर हो जाती हैं कि मामूली चोट पर भी फ्रैक्चर हो सकता है।

  • अवसाद (Depression): मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को प्रभावित करने के कारण मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है।

Vitamin D deficiency: धूप और डाइट दोनों हैं जरूरी

विटामिन डी की कमी दूर करने के लिए संतुलित जीवनशैली आवश्यक है:

  1. धूप: हर रोज सुबह की धूप में 15 से 20 मिनट बिताना फायदेमंद होता है।

  2. आहार: मछली (सालमन और टूना), अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड दूध, दही और अनाज को भोजन में शामिल करें।

  3. कैल्शियम: दूध, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और तिल भी साथ में लें ताकि पोषक तत्वों का संतुलन बना रहे।

Vitamin D deficiency: कब लेने पड़ सकते हैं सप्लीमेंट्स?

  • जांच: अगर खून की जांच में विटामिन डी का स्तर बहुत कम पाया जाए, तो डॉक्टर सप्लीमेंट्स की सलाह दे सकते हैं।

  • सावधानी: बिना चिकित्सकीय परामर्श के सप्लीमेंट्स लेना उचित नहीं है क्योंकि अत्यधिक विटामिन डी भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

निष्कर्ष: विटामिन डी एक ऐसा पोषक तत्व है जिसे हम अक्सर हल्के में लेते हैं, लेकिन इसके दुष्परिणाम हड्डियों से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक फैले हुए होते हैं। नियमित धूप, संतुलित आहार और समय-समय पर रक्त परीक्षण से इस कमी को समय रहते पहचाना और दूर किया जा सकता है।

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