UP Gold Market Update: अब ग्राहकों को नहीं मिलेगा शुद्ध सोना और चांदी, सराफा कारोबारियों का बड़ा फैसला और कीमतों में भारी उछाल

UP Gold Market Update: ग्राहकों को नहीं मिलेगा शुद्ध सोना

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UP Gold Market Update:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद उत्तर प्रदेश के सराफा बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कारोबारियों ने अब आम ग्राहकों को सीधे शुद्ध सोना (बुलियन), सोने के बिस्कुट और चांदी की सिल्ली बेचना बंद करने का कड़ा फैसला लिया है। कस्टम ड्यूटी में वृद्धि और वैश्विक अस्थिरता के कारण सोने की कीमतें 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई हैं। इस अप्रत्याशित महंगाई और नए नियमों ने बाजार का गणित पूरी तरह बदल दिया है, जहां अब लोग नए जेवर खरीदने के बजाय पुराने सोने को रीसायकल कराने पर मजबूर हैं।

UP Gold Market Update: सराफा बाजार में नया नियम

उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन ने एक स्वर में निर्णय लिया है कि अब बाजार में केवल तैयार जेवरात ही बेचे जाएंगे। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के समर्थन में उठाया गया है, जिसमें उन्होंने देश के सोने-चांदी के आयात को घटाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए गैर-जरूरी बुलियन खरीद से बचने की सलाह दी थी। गुरुवार को कानपुर के बिरहाना रोड, नयागंज और चौक सराफा जैसे प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। शोरूम संचालकों का कहना है कि अब शुद्ध सोने के बिस्कुट और चांदी की सिल्ली का कारोबार केवल व्यापारियों के बीच सीमित रहेगा, ताकि निवेश के उद्देश्य से होने वाली सोने की जमाखोरी को कम किया जा सके।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा को बचाना और घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने को बाजार के चक्र में वापस लाना है। राज्य कर विभाग के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में कारोबारियों ने साफ कर दिया कि वे 24 कैरेट खरा सोना सीधे ग्राहकों को नहीं देंगे। हालांकि, उन्होंने सरकार के सामने यह शर्त भी रखी है कि यह नियम केवल छोटे व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट ज्वैलर्स पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन बना रहे।

सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी का जमीनी विश्लेषण

पिछले कुछ दिनों के भीतर सराफा बाजार में जो तेजी आई है, उसने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी की कीमतों में महज चार दिनों के भीतर 35,000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा का उछाल आया है। जो चांदी पिछले शनिवार को 2,63,000 रुपये प्रति किलो थी, वह अब 2,95,000 रुपये के पार जा चुकी है। सोने का हाल भी कुछ ऐसा ही है; 9 मई को जो सोना 1,54,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर था, वह गुरुवार को 1,65,000 रुपये के स्तर को छू गया।

बाजार के जानकारों का मानना है कि ईरान के साथ जारी युद्ध की स्थितियों और वैश्विक तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का रुख किया है, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है। कानपुर के नयागंज बाजार में मौजूद व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी तेजी पहले कभी नहीं देखी थी। शोरूम खाली पड़े हैं और जो इक्का-दुक्का लोग आ भी रहे हैं, वे केवल रेट पूछकर वापस जा रहे हैं। मध्यवर्गीय परिवारों के लिए अब सोना खरीदना किसी सपने जैसा होता जा रहा है।

शादी-ब्याह के सीजन में जेवर खरीदने का बदला तरीका

उत्तर प्रदेश में शादियों का सीजन अपने चरम पर है, लेकिन सोने के आसमान छूते दामों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जिन परिवारों में बेटी या बहू के लिए गहने बनने थे, उन्होंने अब खरीद का एक नया तरीका अपनाया है। अब लोग बाजार में नकद पैसे लेकर कम, बल्कि घर में रखे पुराने जेवर लेकर ज्यादा पहुंच रहे हैं। सराफा एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार में हो रही कुल ज्वैलरी सेल में से लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा ‘ओल्ड गोल्ड एक्सचेंज’ का है।

लोग अपनी पुरानी अंगूठियां, हार और टूटे हुए गहने लाकर उन्हें गलाकर नए डिजाइन बनवा रहे हैं। इससे उन्हें केवल मेकिंग चार्ज और सोने की शुद्धता के अंतर का भुगतान करना पड़ रहा है। सराफा कारोबारी भी ग्राहकों को पुराने जेवर रीसायकल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इससे बाजार में सोने की लिक्विडिटी बनी हुई है और नया सोना आयात करने की जरूरत कम पड़ रही है। यह स्थिति उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण है जिनके पास पुराना सोना नहीं है और उन्हें पूरी तरह नई खरीद करनी है।

निवेशकों के लिए चांदी बनी मुनाफा कमाने का जरिया

जहां एक तरफ खरीदार परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ चांदी के निवेशकों के लिए यह समय ‘चांदी काटने’ जैसा है। जिन लोगों ने पिछले दो-तीन महीनों के दौरान कीमतों में गिरावट आने पर चांदी की सिल्ली या सिक्के खरीदे थे, वे अब भारी मुनाफा कमाने के लिए बाजारों का रुख कर रहे हैं। जब ईरान-इजरायल तनाव की शुरुआत हुई थी, तब चांदी 2,15,000 रुपये के आसपास थी। अब 3 लाख के करीब पहुंचने पर निवेशक अपनी होल्डिंग बेचकर मोटा लाभ कमा रहे हैं।

बाजार में ऐसे लोगों की आवाजाही बढ़ी है जो चांदी बेचने आ रहे हैं। सर्राफा विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में अस्थिरता अभी कुछ और समय तक बनी रह सकती है। जो लोग ऊंचे दामों पर चांदी बेच रहे हैं, वे बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ा रहे हैं, लेकिन इससे उन उद्योगों पर बुरा असर पड़ रहा है जहां चांदी का कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है।

UP Gold Market Update: कारीगरों और कर्मचारियों के भविष्य पर मंडराता संकट

कारोबार घटने और बिक्री में आई भारी गिरावट का सीधा असर उन हजारों कारीगरों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो इस उद्योग की रीढ़ हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन ने भरोसा दिलाया है कि वे इस मुश्किल घड़ी में अपने स्टाफ के साथ खड़े हैं। वर्तमान सहालग का काम लगभग पूरा हो चुका है और अगली सहालग शुरू होने में अभी एक महीने का समय बाकी है। इस बीच कारोबारियों की कोशिश है कि पुराने जेवरों की रीसायकलिंग और रिपेयरिंग के काम के जरिए कारीगरों को रोजगार मिलता रहे।

प्रमुख सचिव राज्य कर कामिनी रतन चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस बात पर जोर दिया गया कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बुलियन खरीद को कुछ समय के लिए टालना जरूरी है। सरकार का मानना है कि अगर लोग सोने में निवेश करने के बजाय उसे आभूषण के रूप में उपयोग करेंगे या पुराने सोने को बाजार में लाएंगे, तो इससे घरेलू बाजार मजबूत होगा।

UP Gold Market Update: भविष्य की राह और सराफा बाजार की अगली रणनीति

आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश का सराफा बाजार पूरी तरह से ‘ज्वैलरी ओनली’ मॉडल पर काम करता दिखेगा। उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र जैन और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के हर उस कदम का स्वागत करेंगे जो देशहित में हो। अब सारा ध्यान इस बात पर है कि ग्राहकों को कैसे प्रेरित किया जाए कि वे शुद्ध सोने के बिस्कुट जमा करने के बजाय तैयार आभूषणों की ओर रुख करें।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव कम नहीं हुआ, तो सोने की कीमतें 2 लाख रुपये के स्तर को भी छू सकती हैं। ऐसी स्थिति में ‘डिजिटल गोल्ड’ और ‘गोल्ड बॉन्ड्स’ जैसे विकल्पों पर भी चर्चा तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश का सराफा जगत अब एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है, जहां पारंपरिक निवेश के तरीकों को छोड़कर नए नियमों को अपनाना उनकी मजबूरी भी है और जिम्मेदारी भी।

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