UP Cabinet Decisions: 5 नए जेलों को मंजूरी, 18 शहरों में ई-बसें, सरकारी वकीलों को मिला तोहफा
सरकारी वकीलों को मानदेय बढ़ा, 18 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें, कानपुर समेत 5 जिलों में नई जेलें
UP Cabinet Decisions: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में विकास, सुदृढ़ कानून व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई ऐतिहासिक व दूरगामी फैसले लिए हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश में पांच नए अत्याधुनिक जेलों के निर्माण, सरकारी वकीलों के मासिक मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी और राज्य के 18 प्रमुख शहरों में 1725 नई ई-बसें (इलेक्ट्रिक बसें) चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है।
कैबिनेट के ये ताजा फैसले प्रदेश की जेल प्रणाली को सुधारने, बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बढ़ते शहरी प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। राज्य सरकार का मुख्य विजन बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत बनाकर आम नागरिकों तक सुलभ, पारदर्शी और आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि योगी कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इन बड़े फैसलों के तकनीकी और व्यावहारिक पहलू क्या हैं और जमीन पर इनका क्या प्रभाव पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में नए जेलों के निर्माण को स्वीकृति
उत्तर प्रदेश की वर्तमान जेल प्रणाली पर कैदियों और बंदियों की संख्या का भारी दबाव है, जिसके कारण कई केंद्रीय व जिला कारागारों में क्षमता से अधिक कैदी रखने को मजबूर होना पड़ता है। इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए कैबिनेट ने प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों—कानपुर, मुरादाबाद, ललितपुर, भदोही और औरैया में एक-एक नया जिला जेल बनाने की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।
ये सभी नए कारागार पूरी तरह से आधुनिक सुरक्षा मानकों और तकनीकी सुविधाओं से लैस होंगे। इनके निर्माण के दौरान कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य, उचित चिकित्सा देखभाल, बैरकों के चौड़ीकरण और बंदियों के कौशल विकास व पुनर्वास कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन पांचों जिलों में नई जेलें बन जाने से न केवल पुरानी जेलों की भीड़भाड़ काफी हद तक कम होगी, बल्कि बंदियों को एक सुधारात्मक और मानवीय वातावरण भी मिल सकेगा, जो जेल सुधार नीतियों के लिए बेहद जरूरी है।
जेल के भीतर बंदियों की मृत्यु पर वित्तीय मुआवजे का नया नीतिगत बदलाव
कारागारों को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने जेलों में बंदियों की मृत्यु के मामलों में एक नई और पारदर्शी मुआवजा नीति को मंजूरी दी है। इस नए वैधानिक प्रावधान के तहत, यदि किसी कैदी की जेल के अंदर पूरी तरह से प्राकृतिक कारणों या बीमारी की वजह से मृत्यु होती है, तो राज्य सरकार द्वारा उसके आश्रित परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
इसके विपरीत, यदि जेल परिसर के भीतर किसी बंदी द्वारा आत्महत्या (खुदकुशी) का प्रयास किया जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उस स्थिति में परिजनों को 3 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। सरकार का यह संवेदनशील फैसला जेल प्रशासन की आंतरिक जवाबदेही को तय करने, बैरकों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और जेल अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मुस्तैद बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार है।
न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती: सरकारी वकीलों के मानदेय और भत्तों में भारी वृद्धि
राज्य सरकार के मुकदमों की अदालतों में प्रभावी पैरवी करने वाले सरकारी वकील लंबे समय से अपनी रिटेनर फीस और दैनिक भत्तों में न्यायसंगत संशोधन की मांग कर रहे थे। कैबिनेट ने वकीलों के हितों का ध्यान रखते हुए विभिन्न श्रेणियों के शासकीय अधिवक्ताओं के मानदेय में एकमुश्त और उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
इस नए वित्तीय संशोधन के बाद जिला शासकीय अधिवक्ता (DGA) की मासिक रिटेनर फीस को 9 हजार रुपये से सीधे बढ़ाकर 14 हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि अदालतों में रोजाना बहस करने की उनकी दैनिक फीस को 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। ठीक इसी तर्ज पर अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGA), सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (Agha) और उप जिला शासकीय अधिवक्ता की भी रिटेनर और दैनिक फीस में आनुपातिक रूप से अच्छी वृद्धि की गई है। यह ऐतिहासिक फैसला न केवल सरकारी वकीलों के मनोबल और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि अदालतों में सरकारी मुकदमों की पैरवी में अधिक दक्षता और तेजी लाएगा जिससे लंबित मामलों का निपटारा जल्द हो सकेगा।
शहरी परिवहन का कायाकल्प: 18 शहरों में दौड़ेंगी 1725 नई इलेक्ट्रिक बसें
बढ़ते हुए वैश्विक तापमान और वायु प्रदूषण पर कड़ा प्रहार करने के लिए योगी कैबिनेट ने राज्य के 17 नगर निगमों और औद्योगिक रूप से विकसित नोएडा शहर सहित कुल 18 प्रमुख शहरी केंद्रों में 1725 अत्याधुनिक ई-बसें संचालित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत विशेष रूप से नोएडा और उसके आसपास के रूटों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों की कनेक्टिविटी को सीधे महत्वाकांक्षी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) तक विस्तारित किया जाएगा।
यह दूरगामी पहल शहरों में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने, पारंपरिक डीजल-पेट्रोल पर राज्य की निर्भरता को घटाने और आम कामकाजी जनता को एक बेहद सस्ता, सुलभ और वातानुकूलित (AC) सफर मुहैया कराने में गेम चेंजर साबित होगी। ई-बसें न केवल पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होती हैं, बल्कि जीवाश्म ईंधन की तुलना में इनकी दीर्घकालिक परिचालन लागत (Running Cost) भी काफी कम बैठती है, जिससे सरकारी परिवहन निगमों को घाटे से उबारने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा 3 जून 2026 को लिए गए ये नीतिगत कैबिनेट फैसले उत्तर प्रदेश के ढांचागत विकास, न्यायिक सुदृढ़ता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए मील के पत्थर साबित होने वाले हैं। पांच नए जिला जेलों का निर्माण जहां एक तरफ कानून व्यवस्था को नई दिशा देगा, वहीं सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में बड़े पैमाने पर ई-बसों का शामिल होना प्रदेश के शहरी जीवन स्तर को अधिक स्वच्छ और आधुनिक बनाएगा। इसके साथ ही, न्याय के प्रहरियों यानी सरकारी वकीलों को मिला यह वित्तीय तोहफा राज्य की कानूनी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाएगा। अब पूरी प्रशासनिक मशीनरी का मुख्य फोकस इन स्वीकृत योजनाओं के लिए तुरंत बजट जारी कर इन्हें समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने का है, ताकि उत्तर प्रदेश देश की सबसे अग्रणी और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से शामिल हो सके।
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