Gold-Silver Price 4 June 2026: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर स्थिरता, निवेशकों की नजर मॉनसून और जियो-पॉलिटिकल घटनाओं पर

दिल्ली में सोना 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम, चांदी 2,65,000 रुपये प्रति किलो, जानें ताजा भाव

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Gold-Silver Price 4 June 2026: गुरुवार को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं के दामों में आई आंशिक सुस्ती के बावजूद घरेलू खुदरा बाजार में आज कीमतें काफी हद तक स्थिर दर्ज की गईं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास बना रहा, जबकि चमकीली धातु चांदी की कीमत 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब कारोबार करती देखी गई।

कमोडिटी बाजार के तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक (जियो-पॉलिटिकल) तनाव, अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के दामों में आ रहे बड़े उछाल और वैश्विक बाजार में भारतीय रुपये की बदलती विनिमय दर ने स्थानीय कीमतों को एक सीमित दायरे में बांध रखा है। हालांकि, देश के दक्षिणी हिस्सों में मॉनसून की समय पर हुई दस्तक और आगामी त्योहारी व वैवाहिक सीजन की मजबूत मांग को देखते हुए लंबी अवधि के निवेशक सोने और चांदी में एक नई तेजी आने की पूरी संभावना जता रहे हैं। आइए जानते हैं आज के हाजिर भाव, प्रमुख महानगरों की स्थिति और बुलियन मार्केट के भविष्य का पूरा विश्लेषण।

आज के सोने-चांदी के भाव: देश के प्रमुख शहरों का हाल

घरेलू वायदा और हाजिर बाजार में आज सोने की कीमतों में स्थिरता से लेकर मामूली नरमी का दौर देखा गया। दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1,54,800 रुपये से लेकर 1,55,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच दर्ज किया गया, जबकि आम उपभोक्ताओं के बीच सबसे ज्यादा मांग में रहने वाला 22 कैरेट जेवर सोने का भाव लगभग 1,41,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर टिका रहा। देश के अन्य महानगरों की तुलना करें तो मुंबई में टैक्स संरचना के कारण सोना हमेशा की तरह थोड़ा महंगा बिक रहा है, जहां 24 कैरेट का हाजिर भाव 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। इसके अलावा कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख तटीय केंद्रों में भी शुद्ध सोने की दरें 1,55,000 रुपये के करीब ही बनी हुई हैं।

उत्तर प्रदेश की स्थानीय मंडियों पर नजर डालें तो राजधानी लखनऊ में आज 24 कैरेट सोना 1,54,700 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर उपलब्ध है। चांदी के बाजार की बात करें तो दिल्ली में आज औद्योगिक चांदी का भाव 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर मजबूती से टिका हुआ है, जबकि मुंबई के खुदरा बाजार में चांदी छलांग लगाते हुए 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे दक्षिण भारतीय शहरों में चांदी का कारोबार 2,63,000 रुपये से लेकर 2,67,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच दर्ज किया जा रहा है। स्थानीय सर्राफा एसोसिएशन से जुड़े आभूषण निर्माताओं (ज्वेलर्स) का कहना है कि आने वाले दिनों में शादियों की खरीदारी शुरू होने से मांग में और सुधार होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रीमियम बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख और भारतीय आयात पर इसका गहरा असर

वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंज (COMEX) पर आज सोने का भाव 4,450 डॉलर से लेकर 4,480 डॉलर प्रति औंस के बेहद संवेदनशील और ऊंचे दायरे में कारोबार कर रहा है। वहीं, वैश्विक चांदी बाजार भी 73 डॉलर से 75 डॉलर प्रति औंस के बीच अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य और राजनीतिक गतिरोध के कारण दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशकों ने इक्विटी और बॉन्ड मार्केट से अपना पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर मोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी कीमतों को एक मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

चूंकि भारत अपनी सोने-चांदी की कुल घरेलू मांग का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से सीधे आयात (Import) करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मूल्य सीधे हमारे देश के खुदरा भाव को तय करता है। हाल के दिनों में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों के कारण रुपये में आई आंशिक मजबूती ने आयातित सोने की लैंडिंग कॉस्ट को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद की है, जिससे घरेलू ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगी आग के बावजूद एक बड़ी राहत मिली है।

मध्यम वर्ग की चुनौतियां और डिजिटल गोल्ड जैसे नए विकल्प

बुलियन मार्केट में लगातार बनी रहने वाली इस रिकॉर्ड तोड़ महंगाई ने देश के आम मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले साल की तुलना में इस साल 10 ग्राम सोने की कीमत में आए भारी अंतर के कारण अब शादियों के लिए भारी आभूषण खरीदना आम आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है। यही मुख्य कारण है कि भारतीय उपभोक्ता अब पारंपरिक भौतिक सोने (Physical Gold) के बजाय निवेश के आधुनिक और सुरक्षित डिजिटल माध्यमों जैसे ई-गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और सरकारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जहां मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं होती।

इसके विपरीत, चांदी के बाजार में इस समय आभूषणों से कहीं अधिक इसकी औद्योगिक मांग (Industrial Demand) में एक ऐतिहासिक उछाल देखा जा रहा है। आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी, सौर ऊर्जा (सोलर पैनल निर्माण), एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी और सर्किट निर्माण में बड़े पैमाने पर चांदी का औद्योगिक उपयोग किया जा रहा है। कमोडिटी विशेषज्ञों का आकलन है कि अपनी इसी जबरदस्त औद्योगिक खपत के कारण साल 2026 के आगामी महीनों में चांदी का रिटर्न प्रतिशत, सोने की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और मुनाफा देने वाला साबित हो सकता है।

भविष्य की संभावनाएं और बाजार के दिग्गजों का सटीक पूर्वानुमान

कमोडिटी और वित्तीय बाजार के शीर्ष विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 की दूसरी छमाही सोने और चांदी के निवेशकों के लिए अत्यधिक अप्रत्याशित और मुनाफे वाली साबित हो सकती है। यदि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और अधिक बिगड़ते हैं या अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों में कटौती का चक्र शुरू करता है, तो आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में सोना बेहद आसानी से 1,60,000 रुपये से लेकर 1,70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए ऐतिहासिक शिखर को छू सकता है। वहीं, औद्योगिक मांग के सहारे चांदी भी 2,80,000 रुपये से लेकर 3,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम के जादुई आंकड़े को पार करने का माद्दा रखती है।

खुदरा ग्राहकों और छोटे निवेशकों को बाजार के जानकारों की यही सलाह है कि वे मौजूदा ऊंचे स्तरों पर एकमुश्त (Lump-sum) बड़ा पैसा लगाने के बजाय सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की तरह हर मामूली गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदारी की रणनीति अपनाएं। इसके साथ ही, खुदरा आभूषण खरीदते समय हमेशा शुद्धता की कड़ाई से जांच करें और केवल ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के 6-डिजिट वाले अल्फ़ान्यूमेरिक हॉलमार्क वाले गहने ही खरीदें, ताकि भविष्य में उसे बेचते या एक्सचेंज करते समय आपको अपनी संपत्ति का पूरा और वास्तविक मूल्य मिल सके।

निष्कर्ष

4 जून 2026 को भारतीय खुदरा और वायदा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों का स्थिर बने रहना आम उपभोक्ताओं को एक व्यावहारिक राहत प्रदान करता है। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में ये कीमती धातुएं न केवल एक सुरक्षित वित्तीय ढाल के रूप में काम करती हैं, बल्कि हमारे समाज में इनका एक गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व भी है। आने वाले दिनों में देश के ग्रामीण इलाकों में मॉनसून की प्रगति कैसी रहती है, क्योंकि ग्रामीण भारत देश के कुल सोना उपभोग का एक बहुत बड़ा हिस्सा तय करता है, और आगामी केंद्रीय बजटीय नीतियां क्या मोड़ लेती हैं—इन्हीं मुख्य कारकों से सराफा बाजार की अगली दिशा और दशा तय होगी। उपभोक्ताओं को अपनी वित्तीय जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही किसी भी प्रकार का निवेश करना चाहिए।

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