UP Bihar Heatwave Alert: मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी, कम बारिश और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से बढ़ सकती हैं मुश्किलें
UP Bihar Heatwave Alert: अल नीनो के कारण जून में सुस्त रहेगा मानसून, यूपी-बिहार समेत 8 राज्यों में भीषण लू का अलर्ट।
UP Bihar Heatwave Alert: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को देश के करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ाने वाली एक बड़ी रिपोर्ट जारी की है। मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक पूर्वानुमान (Long-range Forecast) जारी करते हुए बताया कि इस साल जून के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने देश को सचेत किया कि जून की शुरुआत से ही उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 8 प्रमुख राज्यों में भीषण लू (Severe Heatwave) का भयंकर प्रकोप देखने को मिल सकता है। प्रशांत महासागर में तेजी से सक्रिय हो रहा ‘अल नीनो’ (El Nino) भारतीय मानसून की रफ्तार को धीमा कर रहा है, जिससे इस बार जून के महीने में गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि मौसम विभाग की इस नई चेतावनी का आपके राज्य पर क्या असर पड़ने वाला है और आने वाले महीनों में मानसून का मिजाज कैसा रहेगा।
UP Bihar Heatwave Alert: देश के इन बड़े हिस्सों में इस बार कम बरसेंगे बादल
आईएमडी के ताजा क्षेत्रीय पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान पूरे देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) की केवल 90 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है, जिसमें 4 प्रतिशत का उतार-चढ़ाव हो सकता है। यह आंकड़ा सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है, जिसने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेष रूप से मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और देश के मुख्य मानसूनी क्षेत्रों में इस बार बादलों की बेरुखी देखने को मिल सकती है। हालांकि, देश के कुछ अलग-अलग हिस्सों में छिटपुट तौर पर सामान्य बारिश भी हो सकती है, जो एलपीए का 94 से 106 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।
UP Bihar Heatwave Alert, जून महीने का हाल: धीमी शुरुआत और तपती रातें बढ़ाएंगी टेंशन
जून के महीने को लेकर डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने साफ कहा है कि देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की एंट्री काफी सुस्त और धीमी रहेगी। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ चुनिंदा और सीमित इलाकों में सामान्य या उससे थोड़ी अधिक बारिश देखी जा सकती है।
बारिश की कमी के साथ-साथ जून के दौरान देश के ज्यादातर राज्यों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार केवल दिन का अधिकतम तापमान ही नहीं, बल्कि रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर बना रहेगा, यानी जून के महीने में लोगों को रातों में भी भीषण गर्मी और उमस से चैन नहीं मिलने वाला है।
यूपी, बिहार और हरियाणा समेत इन 8 राज्यों में चलेगी भयंकर लू
आईएमडी ने अपनी एडवायजरी में देश के 8 राज्यों के लिए रेड अलर्ट जैसी चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, जून के महीने में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से अधिक दिनों तक खतरनाक लू (Heatwave) चलने वाली है। इन राज्यों में पारा रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है।
इसके अलावा, मध्य भारत और दक्षिण के कुछ अन्य हिस्सों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु में भी लू की गतिविधियां तेजी से बढ़ने की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर निकलते वक्त विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
82% तक पहुंचा अल नीनो का खतरा, प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड वार्मिंग
आखिरकार इस बार मानसून के कमजोर पड़ने और भीषण गर्मी के पीछे की असली वजह क्या है? डॉ. महापात्र ने बताया कि प्रशांत महासागर में जो ‘न्यूट्रल एनसो’ (ENSO Neutral) की स्थिति बनी हुई थी, वह अब तेजी से ‘अल नीनो’ फेज की तरफ बढ़ रही है। जून के महीने तक समुद्र में अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना बढ़कर 82 प्रतिशत हो जाएगी।
यह खतरा यहीं नहीं रुक रहा है, बल्कि जुलाई और अगस्त के मुख्य मानसूनी महीनों में इसके 90 प्रतिशत को पार करने की आशंका है। वैश्विक जलवायु डेटा के अनुसार, जनवरी 2026 से अब तक मध्य प्रशांत महासागर का औसत तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ चुका है, जो इस पूरी सदी का सबसे तेज वार्मिंग ट्रेंड (गर्म होने की रफ्तार) है। महासागर के नीनो 3.4 इंडेक्स का तापमान मई 2024 के बाद पहली बार +0.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अल नीनो के पूरी तरह हावी होने का पुख्ता सबूत है।
75 साल का इतिहास: जब-जब आया ‘सुपर अल नीनो’, तब-तब पड़ा सूखा
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो साल 1950 के बाद से अब तक केवल 6 बार ही महासागर में ‘सुपर अल नीनो’ की ऐसी भयावह स्थिति बनी है, और जब भी ऐसा हुआ है, भारत में मानसून पर इसका बेहद गंभीर और नकारात्मक असर पड़ा है। नीचे दी गई तालिका से समझिए कि पिछले 75 सालों में अल नीनो ने भारतीय मानसून को किस तरह प्रभावित किया है:
| साल | अल नीनो की स्थिति | मानसून की दस्तक | कुल बारिश (%) |
| 1951 | मोडरेट (मध्यम) | 31 मई | 81.3% |
| 1957 | मजबूत | 1 जून | 97.6% |
| 1965 | मजबूत | 26 मई | 81.8% |
| 1972 | मजबूत (सुपर अल नीनो) | 18 जून | 76.1% |
| 1987 | मजबूत | 2 जून | 80.6% |
| 2009 | कमजोर | 23 मई | 78.2% |
| 2015 | मजबूत | 5 जून | 86.2% |
| 2023 | मजबूत | 8 जून | 94.4% |
इतिहास गवाह है कि साल 1972 के सबसे मजबूत सुपर अल नीनो के दौरान जब समुद्री तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ा था, तब देश में केवल 76.1% बारिश हुई थी, जिससे चारों तरफ हाहाकार मच गया था। इसी तरह साल 1982 और 2009 में भी देश को भारी सूखे का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि वैज्ञानिक आगामी मानसून को लेकर बेहद चिंतित हैं।
UP Bihar Heatwave Alert, राहत की बात: मई में झमाझम बरसे बादल और मानसून का मौजूदा सफर
इन तमाम डराने वाले आंकड़ों के बीच देश के लिए एक छोटी सी राहत की खबर भी है। मई के महीने में देश भर में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा 27 मई तक की संचयी मौसमी बारिश भी सामान्य से 1 प्रतिशत ऊपर रही है, जिससे जलाशयों में थोड़ा पानी जमा है।
अगर मानसून के सफर की बात करें, तो दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपनी सामान्य तारीख से चार दिन पहले ही, यानी 16 मई को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में धमाकेदार दस्तक दे दी थी। इसके बाद यह दक्षिण अरब सागर और लक्षद्वीप तक सफलतापूर्वक आगे बढ़ चुका है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले एक सप्ताह के भीतर इसके केरल और पूर्वोत्तर राज्यों में एंट्री करने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल और मजबूत बनी हुई हैं।
UP Bihar Heatwave Alert: उत्तर-पश्चिम भारत को अगले 3 दिनों में मिलेगी थोड़ी राहत
आईएमडी ने दिल्ली, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर-पश्चिम भारत के लोगों को भीषण नौतपा की गर्मी से थोड़ी फौरी राहत मिलने की उम्मीद भी जताई है। एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और पूर्वी हवाओं के आपस में टकराने के कारण अगले तीन दिनों में इन इलाकों में मौसम का मिजाज बदलेगा।
देश के कई मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज धूल भरी आंधियां चलने, हल्की बौछारें पड़ने और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने की संभावना है। इस प्री-मानसून गतिविधि के कारण तापमान में कुछ डिग्रियों की गिरावट आएगी, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से कुछ समय के लिए निजात मिल सकेगी। हालांकि, मध्य प्रदेश के खजुराहो जैसे इलाके अभी भी 46.5 डिग्री सेल्सियस के साथ तप रहे हैं, जहां जल्द ही मौसम में बदलाव देखा जाएगा।
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