UNESCO Tentative List: भारत की 5 धरोहरें अस्थायी सूची में शामिल

उदयगिरि, बाघ गुफाएं, गिन्नौरगढ़ और चंबल के मंदिर UNESCO सूची में शामिल

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UNESCO Tentative List: भारत की समृद्ध, विविध और सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक और गौरवशाली पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने अपने वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर के अंतर्गत भारत द्वारा प्रस्तावित पांच नए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को ‘विश्व धरोहर अस्थायी सूची’ (Tentative List) में सम्मिलित कर लिया है। नवीनतम संशोधन के बाद भारत की इस अस्थायी सूची में दर्ज कुल प्रविष्टियों की संख्या 78 पर पहुंच गई है।

इस बार की सूची की सबसे विशिष्ट बात यह है कि जोड़े गए पांच प्रस्तावों में से चार धरोहरें सीधे तौर पर मध्य प्रदेश की धरती से जुड़ी हैं। इनमें विदिशा की प्रसिद्ध उदयगिरि गुफाएं, धार जिले की ऐतिहासिक बाघ गुफाओं के भित्तिचित्र, सीहोर-रायसेन क्षेत्र का गिन्नौरगढ़ किला और मुरैना-चंबल अंचल के प्राचीन मंदिर समूह शामिल हैं। वहीं पांचवां प्रस्ताव भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच साझा रूप से फैला हुआ एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कॉरिडोर है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्याग्रह और अहिंसक संघर्ष के उद्भव को रेखांकित करता है।

UNESCO Tentative List: क्या होती है यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट और इसका महत्व?

यूनेस्को के कड़े नियमों और 1972 के विश्व धरोहर सम्मेलन (World Heritage Convention) के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी स्मारक, प्राकृतिक स्थल या सांस्कृतिक परिदृश्य को अंतिम ‘विश्व धरोहर स्थल’ (World Heritage Site) घोषित किए जाने से पहले कम से कम एक वर्ष तक उस देश की आधिकारिक अस्थायी सूची में रहना अनिवार्य होता है।

अस्थायी सूची वास्तव में उन असाधारण सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value – OUV) वाली संपत्तियों का राष्ट्रीय इन्वेंट्री दस्तावेज है, जिन्हें संबंधित राष्ट्र आगामी वर्षों में मुख्य सूची के नामांकन हेतु प्राथमिकता देता है। हालांकि इस सूची में नाम दर्ज होने मात्र से कोई स्थल सीधे तौर पर यूनेस्को का पूर्ण विश्व धरोहर स्थल नहीं बन जाता, किंतु यह वैश्विक संरक्षण विशेषज्ञों, पर्यटकों और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने का सबसे बड़ा प्राथमिक मंच माना जाता है।

उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकालीन कला, खगोलशास्त्र और वराह अवतार का अनुपम संगम

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बेतवा नदी के समीप स्थित उदयगिरि की पहाड़ियों पर तराशी गई गुफाएं इस सूची का प्रमुख आकर्षण हैं। चौथी शताब्दी के उत्तरार्ध और पांचवीं शताब्दी के आरंभिक कालखंड (गुप्त साम्राज्य) के दौरान विकसित यह रॉक-कट परिसर हिंदू और जैन पवित्र वास्तुकला के शुरुआती विकास का सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। इस परिसर में कुल 20 गुफाएं हैं, जिनमें सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ और कुमारगुप्त प्रथम के काल के महत्वपूर्ण ब्राह्मी अभिलेख उत्कीर्ण हैं।

कलात्मक दृष्टि से गुफा संख्या 5 में चट्टान को काटकर उकेरा गया भगवान विष्णु के वराह अवतार का विशाल पैनल भारतीय मूर्तिकला का शिखर माना जाता है। इसमें भगवान वराह को हिरण्याक्ष का वध कर भूदेवी (पृथ्वी) को प्रलयकारी समुद्र से बाहर लाते हुए अत्यंत ओजस्वी मुद्रा में दिखाया गया है। इसके अलावा गुफा संख्या 13 में शेषशायी विष्णु की विशाल प्रतिमा और खगोलीय संरेखण (Solstice Alignment) के अनुरूप गुफाओं का विन्यास प्राचीन भारत के उन्नत ज्यामितीय और स्थापत्य ज्ञान को प्रमाणित करता है।

बाघ गुफाओं के भित्तिचित्र: विंध्य की गोद में बौद्ध कला का स्वर्णिम अध्याय

मध्य प्रदेश के धार जिले में विंध्याचल की दक्षिणी ढलानों पर बाघनी नदी के तट पर बलुआ पत्थर की चट्टानों को काटकर बनाई गई नौ बौद्ध गुफाओं (Bagh Caves) को भी इस सूची में गौरवपूर्ण स्थान दिया गया है। पांचवीं से छठी शताब्दी ईस्वी के मध्य निर्मित ये गुफाएं बौद्ध भिक्षुओं के विहार और चैत्य के रूप में उपयोग में लाई जाती थीं।

बाघ गुफाओं की सबसे बड़ी ख्याति इनके प्राचीन भित्तिचित्र (Fresco/Tempera Paintings) हैं, जिनकी कलात्मक शैली और रंग-संयोजन की तुलना सीधे महाराष्ट्र की विश्वविख्यात अजंता गुफाओं से की जाती है। इन चित्रों में भगवान बुद्ध के जीवन, जातक कथाओं के साथ-साथ तत्कालीन शास्त्रीय नृत्य, संगीत, संगीत वाद्ययंत्रों और दरबारी जीवन की जीवंत झांकी देखने को मिलती है। यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होने से इन नाजुक भित्तिचित्रों के दीर्घकालिक रासायनिक और वैज्ञानिक संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग मिलने की राह आसान होगी।

गिन्नौरगढ़ किला: मालवा और गोंडवाना की ऐतिहासिक सैन्य वास्तुकला

मध्य प्रदेश के सीहोर और रायसेन जिलों के वन क्षेत्र के मध्य एक दुर्गम पहाड़ी पर अवस्थित गिन्नौरगढ़ किला (Ginnorgarh Fort) मध्य भारत के मध्यकालीन इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह किला ऐतिहासिक रूप से गोंड राजवंश और विशेष रूप से वीरांगना रानी कमलापति के जीवन और शासनकाल से गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रकृति की गोद में स्थित यह दुर्ग स्थापत्य की दृष्टि से जल संरक्षण प्रणालियों, विशाल बावड़ियों, सुरक्षा प्राचीरों और रणनीतिक बुर्जों का बेजोड़ उदाहरण है। गोंड, मालवा सुल्तानों और बाद में भोपाल के नवाबों के अधीन रहे इस किले का चयन यह दर्शाता है कि यूनेस्को की सूची में अब मध्य भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और क्षेत्रीय राजनीतिक इतिहास से जुड़े प्रतीकों को भी समुचित प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।

चंबल घाटी के मंदिर समूह: बटेश्वर, पदावली और ककनमठ का अद्भुत वास्तुशिल्प

चंबल घाटी से जुड़ी नई प्रविष्टि ‘Group of Temples of the Chambal Valley’ के अंतर्गत तीन प्रमुख पुरातात्विक स्थलों—बटेश्वर, पदावली और ककनमठ को एक संयुक्त समूह के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह नई प्रविष्टि पूर्व से टेंटेटिव लिस्ट में दर्ज ‘चंबल घाटी के शैल चित्र स्थलों’ (Rock Art Sites) से सर्वथा भिन्न है और विशुद्ध रूप से मंदिर स्थापत्य पर केंद्रित है।

मुरैना जिले के बटेश्वर में 8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य प्रतिहार शैली में निर्मित लगभग 200 छोटे-बड़े बलुआ पत्थर के मंदिरों का विशाल संकुल है, जिसे मलबे के ढेर से वैज्ञानिक पद्धति (एनास्टिलोसिस) द्वारा पुनर्जीवित किया गया है। पदावली का 10वीं सदी का गढ़ी मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और कामुक मूर्तियों के कारण ‘मिनी खजुराहो’ के नाम से जाना जाता है, जबकि सिहोनिया में 115 फीट ऊंचा 11वीं सदी का कच्छपघात कालीन ककनमठ शिव मंदिर बिना किसी गारे-सीमेंट के केवल पत्थरों के संतुलन पर टिका हुआ विस्मयकारी वास्तु चमत्कार है।

सत्याग्रह के ऐतिहासिक स्थल: भारत और दक्षिण अफ्रीका का साझा अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव

सूची की पांचवीं प्रविष्टि एक ट्रांस-नेशनल (बहु-देशीय) प्रस्ताव है, जिसका शीर्षक ‘The Sites of Satyagraha: The Emergence and Institutionalization of the Non-Violent Movement’ रखा गया है। यह प्रस्ताव बीसवीं सदी के सबसे बड़े राजनीतिक व नैतिक हथियार ‘सत्याग्रह’ के जन्म और उसके क्रमिक विकास को भौगोलिक कड़ियों के जरिए रेखांकित करता है।

इस संयुक्त प्रस्ताव में कुल नौ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका के दो वे ऐतिहासिक स्थान सम्मिलित हैं जहां गांधीजी के अहिंसा के विचारों ने आकार लिया—पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन (जहां गांधीजी को ट्रेन से फेंके जाने के बाद सत्याग्रह का विचार उपजा) और डरबन के पास स्थित फीनिक्स सेटलमेंट। वहीं भारत के सात प्रमुख केंद्रों में गुजरात का साबरमती आश्रम और कोचरब आश्रम, मुंबई का मणि भवन, वर्धा का सेवाग्राम आश्रम, पुणे का आगा खान पैलेस और नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति (बिड़ला हाउस) शामिल हैं।

UNESCO Tentative List: भारतीय विरासत का बढ़ता वैश्विक दायरा

सितंबर 2026 के इस आधिकारिक अद्यतन के साथ भारत की यूनेस्को अस्थायी सूची में 78 संपत्तियों का दर्ज होना देश के समृद्ध इतिहास, वास्तुकला और दर्शन के प्रति वैश्विक समुदाय के बढ़ते सम्मान को प्रमाणित करता है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश की चार अनूठी धरोहरों का एक साथ चयनित होना राज्य के पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय रोजगार के लिए स्वर्णिम अवसर लेकर आया है।

अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और संस्कृति मंत्रालय के समक्ष मुख्य चुनौती इन पांचों धरोहरों के लिए विस्तृत ‘नामांकन डोजियर’ (Nomination Dossiers) और प्रभावी ‘हेरिटेज मैनेजमेंट प्लान’ तैयार करने की होगी, ताकि आने वाले वर्षों में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के वार्षिक सम्मेलनों में इन्हें अंतिम विश्व धरोहर स्थल के रूप में प्रतिष्ठापित कराया जा सके।

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