Sudan Drone Attack: सूडान के न्याला में व्यस्त बाजार पर भीषण ड्रोन हमला, 100 से अधिक लोगों की मौत; 150 से ज्यादा घायल

सूडान के दक्षिण दारफुर स्थित न्याला में तानकोंग बाजार पर हुए ड्रोन हमले में 100 से अधिक लोगों की मौत की खबर है।

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Sudan Drone Attack: गृहयुद्ध की भीषण आग में झुलस रहे अफ्रीकी देश सूडान से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। पश्चिमी दारफुर क्षेत्र के सबसे बड़े शहर न्याला में एक खचाखच भरे स्थानीय बाजार पर घातक ड्रोन हमला किया गया, जिसमें 100 से अधिक निर्दोष नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई। इस भयावह हमले में 150 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और मासूम बच्चों की बताई जा रही है। यह खूनी हमला ऐसे समय में हुआ है जब सूडानी सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच सत्ता पर नियंत्रण को लेकर जारी संघर्ष बेहद हिंसक मोड़ ले चुका है। मानवाधिकार संगठनों ने इस कत्लेआम की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध करार दिया है और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग उठाई है।

Sudan Drone Attack: शाम के वक्त खरीदारी कर रहे निहत्थे नागरिकों पर बरसे बम

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह बर्बर हमला दक्षिण दारफुर की प्रांतीय राजधानी न्याला के डुमाया उपनगरीय इलाके में स्थित तानकोंग बाजार में हुआ। सोमवार शाम को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग रोजमर्रा की जरूरी खाद्य सामग्री खरीदने और स्थानीय ढाबों पर भोजन करने के लिए बाजार में जुटे हुए थे। उसी दौरान आसमान से आए एक मानवरहित लड़ाकू विमान (ड्रोन) ने सीधे भीड़भाड़ वाले इलाके पर भारी विस्फोटक गिरा दिए।

धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई दी और बाजार में चारों तरफ आग और धुएं का गुबार फैल गया। विस्फोट के तुरंत बाद चारों ओर चीख-पुकार मच गई। हमले के वक्त बाजार में फल-सब्जियों और खाद्यान्न के दर्जनों ठेले व दुकानें मौजूद थीं, जो मलबे में तब्दील हो गईं। हमले के बाद जमीन पर केवल शव और खून से लथपथ घायल लोग दिखाई दे रहे थे, जिससे पूरा इलाका किसी युद्धक्षेत्र के कब्रिस्तान जैसा नजर आने लगा।

खून से पटे अस्पताल, टुक-टुक और गधा गाड़ियों से लाए गए घायल

हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संस्था ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (एमएसएफ) ने राहत कार्य शुरू किया। संस्था ने जानकारी दी है कि न्याला स्थित उनके अस्पताल में हमले के तुरंत बाद 36 शव लाए गए, जबकि आपातकालीन कक्ष में 150 से अधिक गंभीर रूप से घायल नागरिकों का इलाज किया गया। अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन-रात एक करके घायलों की जान बचाने का प्रयास किया।

परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने के कारण स्थानीय लोग अपने घायल परिजनों को टुक-टुक (ऑटो रिक्शा) और गधा गाड़ियों पर लादकर किसी तरह अस्पताल पहुंचा रहे थे। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में अधिकांश लोग छर्रों के गहरे घाव, अंगों के कटने और गंभीर जलने की स्थिति से जूझ रहे हैं। सूडान में जारी संघर्ष के चलते पहले से ही बुनियादी दवाओं, एनेस्थीसिया और जीवनरक्षक उपकरणों का भारी संकट बना हुआ है, जिसके कारण घायलों के इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सूडानी सेना पर लगा सीधे हमले का आरोप, अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

न्याला शहर पिछले कई महीनों से विद्रोही अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के वास्तविक प्रशासनिक नियंत्रण में है। स्थानीय मानवाधिकार वकीलों के प्रमुख समूह ‘इमरजेंसी लॉयर्स’ और आरएसएफ के प्रतिनिधियों ने इस हवाई हमले के लिए सूडानी सशस्त्र बलों (सेना) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि सैन्य नेतृत्व जानबूझकर घनी आबादी वाले बाजारों और रिहायशी ठिकानों को निशाना बना रहा है, ताकि प्रतिद्वंद्वी गुट पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।

इमरजेंसी लॉयर्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि वे इस नरसंहार की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराएं। उनका कहना है कि युद्ध के अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नागरिक ठिकानों, बाजारों और अस्पतालों पर हमला करना पूरी तरह निषिद्ध है। हालांकि, सूडानी सेना की तरफ से इस हमले और जनहानि को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत सफाई जारी नहीं की गई है।

अप्रैल 2023 से जल रहा है देश, दुनिया के सबसे बड़े भुखमरी संकट की आहट

सूडान में सत्ता संघर्ष की यह खूनी जंग अप्रैल 2023 में शुरू हुई थी, जब सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और अर्धसैनिक बल प्रमुख मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेती) के बीच सेना के एकीकरण को लेकर मतभेद खुलकर युद्ध में बदल गए। बीते अठारह महीनों के दौरान इस युद्ध ने दारफुर, खार्तूम और अल-जजीरा प्रांतों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध के चलते अब तक 20 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और एक करोड़ से अधिक लोग अपने घरों को छोड़कर बेघर हो गए हैं। देश की लगभग दो-तिहाई आबादी यानी करीब 3.4 करोड़ लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं और उन्हें तत्काल आपातकालीन मानवीय सहायता की दरकार है।

Sudan Drone Attack: ड्रोन युद्ध ने आम नागरिकों के जीवन को बनाया सबसे असुरक्षित

इस गृहयुद्ध में दोनों पक्षों द्वारा ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा काल साबित हो रहा है। बीते कुछ सप्ताहों में दोनों ही पक्षों ने बिजली ग्रिडों, पानी के संयंत्रों, पशु बाजारों और विस्थापित शिविरों पर दर्जनों ड्रोन हमले किए हैं।

न्याला के बाजार पर हुए इस हमले ने वैश्विक समुदाय के सामने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि युद्धरत गुटों की क्रूरता के बीच निहत्थे नागरिकों के जीवन की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत दखल देकर हथियारों की आपूर्ति और हवाई हमलों पर रोक नहीं लगाई, तो दारफुर क्षेत्र आने वाले दिनों में इतिहास के सबसे भयानक मानवीय संकट का गवाह बनेगा।

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