Cyclone Arnab: आंध्र प्रदेश में चक्रवात का खतरा, कई राज्यों में बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात अर्णब के आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका के बीच IMD ने भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की।

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Cyclone Arnab Latest News: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय प्रचंड चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ का असर अब भारतीय उपमहाद्वीप के तटीय और मैदानी इलाकों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चक्रवात की गति और तीव्रता को देखते हुए आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक समेत देश के 7 प्रमुख राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। समुद्र के ऊपर लगातार गहराते दबाव और तटीय दिशा में इसके तेज प्रवाह के कारण 100 से लेकर 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने आम नागरिकों, किसानों और मछुआरों से अपील की है कि वे प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और मौसम बुलेटिन पर लगातार नजर बनाए रखें।

Cyclone Arnab Latest News: आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर चक्रवात अर्णब का सबसे तीव्र असर

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार चक्रवात अर्णब का केंद्र तेजी से आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय क्षेत्र की ओर अग्रसर हुआ है। 28 अक्टूबर की सुबह से ही बापटला, विशाखापत्तनम, काकीनाडा और मछलीपट्टनम के तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। समुद्र में कई मीटर ऊंची विनाशकारी लहरें उठ रही हैं, जिसके चलते निचले तटीय गांवों में समुद्र के खारे पानी का भराव होने की गंभीर आशंका बन गई है।

राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर तटीय बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों को सुरक्षित चक्रवात आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर दिया है। तटीय क्षेत्रों में सभी प्रकार की मछली पकड़ने की गतिविधियों और नौका विहार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। बिजली लाइनों और पेड़ों के गिरने की आशंका को देखते हुए त्वरित राहत टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में विद्युत और सड़क संपर्क तुरंत बहाल किया जा सके।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश, निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा

चक्रवात अर्णब का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका बड़ा दायरा पड़ोसी राज्यों को भी प्रभावित कर रहा है। ओडिशा के दक्षिणी और आंतरिक जिलों—जैसे मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा और गंजम में 28 अक्टूबर को अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। इन इलाकों में पहाड़ी नदियों के अचानक उफान पर आने और संवेदनशील ढलानों पर भूस्खलन होने की चेतावनी जारी की गई है।

वहीं, मध्य भारत के प्रमुख राज्य छत्तीसगढ़ में 28 और 29 अक्टूबर को मौसम का सबसे आक्रामक रूप देखने को मिल सकता है। बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर समेत समूचे दक्षिणी छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश की संभावना के चलते जलभराव और मौसमी नालों के उफनने का खतरा गहरा गया है। लगातार होने वाली इस तेज बारिश से धान की पकी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जिसके लिए कृषि विभाग ने किसानों को खेत से जल निकासी के प्रबंध दुरुस्त रखने की सलाह दी है।

झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बदलेगा मौसम का मिजाज

जैसे-जैसे चक्रवाती तंत्र मुख्य भूभाग की ओर अंदरूनी यात्रा तय करेगा, इसका असर पूर्वी और मध्य भारत के अन्य हिस्सों में भी साफ महसूस होगा। झारखंड के दक्षिणी भागों और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में 28 से 30 अक्टूबर के दौरान गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर चल सकता है। पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों जैसे पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना में तटीय हवाओं की गति तेज रहेगी, जबकि उत्तर बंगाल के पहाड़ी जिलों में भी मध्यम से भारी वर्षा का अंदेशा जताया गया है।

मध्य प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी संभागों में भी नमी भरी हवाओं के प्रवेश से आसमान में घने बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। जबलपुर, बालाघाट और शहडोल संभाग के कई जिलों में तेज बौछारों के साथ तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की जाएगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हर जिले में बारिश का स्तर एक समान नहीं रहेगा, लेकिन आकाशीय बिजली चमकने और अचानक तेज झोंकेदार हवाएं चलने की स्थिति में लोगों को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।

कर्नाटक के आंतरिक और तटीय इलाकों में भी जनजीवन पर असर

दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में भी इस चक्रवाती तंत्र के बाहरी बादलों के प्रभाव से व्यापक वर्षा का अनुमान है। तटीय कर्नाटक के साथ-साथ उत्तर आंतरिक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण यातायात बाधित होने और शहरी सड़कों पर जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। बेंगलुरु, मैसूर और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी।

खुले क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों, फल-सब्जी उत्पादक किसानों और दैनिक यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव वाले रास्तों और अंडरपासों से गुजरने से बचें। स्थानीय प्रशासन ने नगर निकायों को जलनिकासी पंप तैयार रखने और नालों की सफाई की निगरानी करने के कड़े आदेश दिए हैं ताकि शहरों में आवागमन सामान्य बना रहे।

Cyclone Arnab Latest News: केंद्र और राज्य सरकारें हाई अलर्ट पर, राहत एवं बचाव के कड़े प्रबंध

चक्रवात अर्णब से उत्पन्न होने वाले किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने प्रभावित सभी सातों राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठकें की हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की दर्जनों अतिरिक्त कंपनियों को आधुनिक कटर मशीनों, लाइफ जैकेट्स और मोटर नौकाओं के साथ रणनीतिक ठिकानों पर तैनात कर दिया गया है। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और नौसेना के जहाजों को भी समुद्र में किसी भी बचाव अभियान के लिए स्टैंडबाय मोड पर रखा गया है।

नागरिकों से विशेष आग्रह किया गया है कि वे आंधी-तूफान के समय पुराने जर्जर मकानों, विशाल वृक्षों, होर्डिंग्स और बिजली के ट्रांसफार्मरों के पास शरण लेने से पूरी तरह बचें। तेज वज्रपात के समय खुले मैदानों, जल स्रोतों या मोबाइल टावरों के पास खड़ा होना प्राणघातक हो सकता है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि चक्रवात के आगे बढ़ने की दिशा और उसकी तीव्रता में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव आ सकता है, इसलिए आम लोग केवल आधिकारिक बुलेटिनों पर ही विश्वास करें।

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