India-Pakistan Relations: भारत ने पाकिस्तानी मंत्री को SCO बैठक का न्योता भेजा

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को SCO के पहले सभ्यता संवाद मंच के लिए आमंत्रित किया है।

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India-Pakistan Relations: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी भारी सैन्य व कूटनीतिक तल्खी के बीच एक बड़ा बहुपक्षीय घटनाक्रम सामने आया है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री को नई दिल्ली आने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। यह आमंत्रण शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तत्वावधान में आयोजित होने वाले पहले ‘सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम’ (सभ्यता संवाद मंच) के तहत दिया गया है। आगामी 20 से 22 नवंबर 2026 तक भारत की मेजबानी में राजधानी दिल्ली में होने वाले इस त्रिदिवसीय सम्मेलन के लिए एससीओ के सभी 10 सदस्य देशों को आमंत्रित किया गया है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को इस फोरम में भाग लेने का न्योता प्रेषित किया है। हालांकि, इस्लामाबाद की ओर से इस बैठक में व्यक्तिगत या वर्चुअल रूप से शामिल होने को लेकर अभी आधिकारिक रुख साफ नहीं किया गया है।

India-Pakistan Relations: ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच पहला बड़ा कूटनीतिक संपर्क

भारत की ओर से भेजा गया यह निमंत्रण इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि बीते डेढ़ वर्षों में दोनों देशों के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमा पार और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर कड़ा प्रहार करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था। उस सैन्य अभियान के बाद से दोनों पड़ोसियों के बीच किसी भी स्तर पर सीधा आधिकारिक संपर्क लगभग पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस निमंत्रण को भारत और पाकिस्तान के बीच किसी द्विपक्षीय बातचीत की बहाली या संबंधों के सामान्य होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत ने यह कदम एससीओ चार्टर की बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं और मेजबान देश के तय प्रोटोकॉल के तहत उठाया है। चूंकि भारत इस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक फोरम की पहली बार मेजबानी कर रहा है, लिहाजा सदस्य देश होने के नाते पाकिस्तान को औपचारिक प्रक्रिया के तहत न्योता भेजना अनिवार्य कूटनीतिक दायित्व का हिस्सा था।

20 से 22 नवंबर तक नई दिल्ली में सजेगा यूरेशियाई सभ्यताओं का साझा मंच

नई दिल्ली में 20 से 22 नवंबर तक आयोजित होने वाला यह सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम यूरेशियाई क्षेत्र के देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-जन के संपर्कों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इस मंच की संकल्पना का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान रखा था। भारत के इस प्रस्ताव को सभी सदस्य देशों का समर्थन मिलने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में इसके आयोजन की औपचारिक घोषणा की थी।
भारत का केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय संयुक्त रूप से इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस तीन दिवसीय फोरम में प्राचीन सभ्यताओं के साझा मूल्यों, बौद्ध धरोहर, पाषाणकालीन कला, समृद्ध साहित्य, पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और आधुनिक डिजिटल युग में रचनात्मक विधाओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य सरकारी सीमाओं से परे जाकर सदस्य राष्ट्रों के विद्वानों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों और युवा संस्कृतिकर्मियों को एक साझा मंच प्रदान करना है।

भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान समेत 10 देशों का ताकतवर यूरेशियाई समूह

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी और यूरेशियाई भूभाग के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाला एक बेहद प्रभावशाली क्षेत्रीय मंच है। वर्तमान में इस संगठन में 10 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। भारत और पाकिस्तान को वर्ष 2017 में इस संगठन की पूर्ण सदस्यता प्राप्त हुई थी।
एससीओ का मुख्य ध्यान क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई (RATS), व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम मसलों पर केंद्रित रहता है। भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि यूरेशिया में वास्तविक आर्थिक सहयोग और व्यापारिक विकास तभी संभव है जब आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को बिना किसी दोहरे मापदंड के समाप्त किया जाए। सांस्कृतिक मंच के जरिए भारत इस पूरे यूरेशियाई क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक सॉफ्ट पावर और लोकतांत्रिक सभ्यतागत विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

India-Pakistan Relations: क्या दिल्ली बैठक से भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलेगी?

पाकिस्तानी मंत्री को आमंत्रण जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या इस पहल से द्विपक्षीय तनाव में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, नई दिल्ली की ओर से सीमा पार आतंकवाद को लेकर अपनी बुनियादी नीति में कोई ढील देने के संकेत नहीं मिले हैं। भारत हमेशा से ‘टेरर और टॉक्स एक साथ नहीं चल सकते’ के सिद्धांत पर अडिग रहा है। एससीओ एक ऐसा बहुपक्षीय मंच रहा है जो दोनों देशों के कटु द्विपक्षीय तनाव से काफी हद तक अछूता रहा है।
इससे पूर्व भी तनाव के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधि एससीओ की बैठकों में शरीक होते रहे हैं। मई 2023 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा में आयोजित एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आए थे। इसके बाद अक्टूबर 2024 में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में भाग लेने इस्लामाबाद पहुंचे थे, हालांकि दोनों ही मौकों पर कोई औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई थी।
अब सबकी निगाहें इस्लामाबाद के अगले रुख पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान अपने मंत्री को नई दिल्ली भेजता है या केवल उच्चायोग के स्तर पर भागीदारी दर्ज कराता है। यदि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल व्यक्तिगत रूप से नई दिल्ली पहुंचता है, तो यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा घटनाक्रम होगा। इसके बावजूद, यह तय माना जा रहा है कि यह यात्रा केवल बहुपक्षीय सांस्कृतिक संवाद तक ही सीमित रहेगी और बिना ठोस द्विपक्षीय प्रगति के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलना बेहद मुश्किल है।

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