Srinagar Jail Escape: श्रीनगर सेंट्रल जेल से दो विचाराधीन कैदी फरार, दीवार फांदकर भागे आरोपी; पूरे कश्मीर में हाई अलर्ट, पुलिस ने जारी किया लुकआउट नोटिस
श्रीनगर सेंट्रल जेल की दीवार फांदकर दो कैदी फरार, पुलिस ने पूरे कश्मीर में बढ़ाई सख्ती
Srinagar Jail Escape: जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर स्थित अति-सुरक्षित मानी जाने वाली सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए दो विचाराधीन कैदियों के फरार होने की एक सनसनीखेज और गंभीर घटना सामने आई है। रविवार की सुबह घटित हुई इस घटना ने जेल प्रशासन, स्थानीय पुलिस और घाटी में तैनात सुरक्षा तंत्र के होश उड़ा दिए हैं। दोनों कैदी जेल परिसर की सामने वाली मुख्य सुरक्षा दीवार को फांदकर भागने में सफल रहे। इस दुस्साहसिक फरारी के तुरंत बाद पूरे कश्मीर संभाग में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस और कारागार विभाग ने तत्काल प्रभाव से संयुक्त तलाशी अभियान छेड़ते हुए दोनों आरोपियों की पहचान, तस्वीरों और व्यक्तिगत विवरण के साथ व्यापक स्तर पर लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। घाटी के सभी निकास मार्गों, अंतरराज्यीय सीमाओं, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा जांच कड़ी कर दी गई है। गंभीर और जघन्य अपराधों में बंद इन दोनों बंदियों के भागने के बाद जेल के आंतरिक सुरक्षा ढांचे और निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Srinagar Jail Escape: फरार कैदियों की पहचान और उनके खिलाफ दर्ज गंभीर मुकदमों का विवरण
श्रीनगर सेंट्रल जेल से फरार होने वाले दोनों विचाराधीन बंदी अलग-अलग राज्यों और जिलों से ताल्लुक रखते हैं तथा दोनों के विरुद्ध अत्यंत संवेदनशील आपराधिक मामले दर्ज हैं। फरार पहले कैदी की पहचान फरमान खान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से राजस्थान राज्य के सदनपोरा का निवासी है और उसके पिता का नाम अब्दुल गनी खान है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार फरमान खान को 23 जून 2026 को न्यायिक हिरासत के तहत श्रीनगर सेंट्रल जेल में दाखिल कराया गया था।
फरमान खान के खिलाफ गांदरबल जिले के लार पुलिस थाने में प्राथमिकी संख्या 19/2026 दर्ज है। उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और धारा 87 के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण संबंधी पॉक्सो (POCSO) कानून की धारा 3 और 4 के तहत नाबालिग से दुष्कर्म और उत्पीड़न के संगीन आरोप लगाए गए हैं।
फरार होने वाले दूसरे कैदी की पहचान मुख्तार अहमद गुर्जर के रूप में की गई है, जो दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के अंतर्गत आने वाले संगलन चित्तरगुल का रहने वाला है और उसके पिता का नाम मोहम्मद रफीक है। मुख्तार अहमद के खिलाफ श्रीनगर के सौरा पुलिस थाने में प्राथमिकी संख्या 20/2026 पंजीकृत है। उस पर भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) व 65(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत गंभीर कानूनी कार्रवाई चल रही थी। दोनों ही आरोपी विचाराधीन अवस्था में जेल के भीतर बंद थे और उनके मामलों की न्यायिक सुनवाई विभिन्न अदालतों में लंबित थी।
घटना की कार्यप्रणाली और जेल की सुरक्षा प्रणाली में सेंध
श्रीनगर की सेंट्रल जेल को जम्मू-कश्मीर के सबसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले कारागार परिसरों में गिना जाता है, जहां नियमित रूप से कई सुरक्षा परतों का पहरा रहता है। ऐसे कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद रविवार की तड़के दोनों बंदियों द्वारा सामने की दीवार फांदकर भाग निकलना सुरक्षा प्रणाली की एक बेहद चिंताजनक विफलता माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक विभागीय सूचनाओं के अनुसार, कैदियों ने सुबह की गिनती और पहरेदारों के बदलाव के सटीक समय का लाभ उठाया।
उन्होंने परिसर के एक सुनसान हिस्से में पहुंचकर दीवार के ऊपर लगी कंटीली तारों और सुरक्षा अवरोधों को लांघने का सुनियोजित रास्ता निकाला। इस घटना के सामने आते ही जेल महकमे में हड़कंप मच गया और तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। कारागार महानिदेशक स्तर से इस पूरे मामले की प्रशासनिक और तकनीकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पहरे पर तैनात सुरक्षाकर्मियों, सीसीटीवी कैमरों और संतरी चौकियों से इतनी बड़ी चूक किस स्तर पर हुई।
पूरे कश्मीर संभाग में रेड अलर्ट और सघन तलाशी अभियान
फरारी की खबर मिलते ही कश्मीर जोन पुलिस, राज्य जांच एजेंसी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने समूची घाटी में व्यापक नाकेबंदी कर दी है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के चेहरे और विवरण वाले विस्तृत पोस्टर सार्वजनिक स्थानों, चौराहों, टैक्सी स्टैंडों और पेट्रोल पंपों पर चस्पा कर दिए हैं। अनंतनाग, गांदरबल, बडगाम और पुलवामा जनपदों में विशेष कार्य बल (STF) की कई टीमों को तलाशी और छापेमारी के काम पर लगाया गया है।
चूंकि मुख्तार अहमद गुर्जर का पैतृक निवास अनंतनाग के ग्रामीण क्षेत्र में है, इसलिए उस इलाके के संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों के घरों और जंगलों से जुड़े रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर फरमान खान के राजस्थान के मूल निवासी होने के कारण केंद्र शासित प्रदेश से बाहर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों, बनिहाल टनल, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर गहन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की राज्य पुलिस एजेंसियों को भी इस संबंध में औपचारिक सूचना और अलर्ट साझा कर दिया गया है।
श्रीनगर जेल की सुरक्षा पर पूर्व में भी उठ चुके हैं सवाल
श्रीनगर सेंट्रल जेल में सुरक्षा खामियों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी इस जेल परिसर के भीतर से अवैध संचार उपकरण, मोबाइल फोन और अन्य गैरकानूनी सामग्री की बरामदगी को लेकर कई बार छापेमारी और विवाद सामने आ चुके हैं। जेल के भीतर कैदियों तक प्रतिबंधित वस्तुओं की पहुंच और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर पहले भी प्रशासनिक स्तर पर चेतावनियां दी गई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च सुरक्षा वाले कारागारों में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, थर्मल कैमरे, मोशन सेंसर्स और 360-डिग्री नाइट विजन कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी अनिवार्य होती है। दीवार फांदने जैसी घटना यह स्पष्ट करती है कि या तो जेल के भौतिक सुरक्षा तंत्र में बुनियादी खामियां मौजूद थीं या फिर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई। आंतरिक जांच समिति अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इन कैदियों को जेल के भीतर या बाहर से किसी व्यक्ति द्वारा कोई साजो-सामान या तकनीकी मदद पहुंचाई गई थी।
आम जनता से पुलिस की विशेष सतर्कता अपील और हेल्पलाइन
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आम नागरिकों, वाहन चालकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से इस संवेदनशील मामले में अत्यंत सतर्क रहने की अपील जारी की है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी नागरिक को इन दोनों आरोपियों में से कोई भी संदिग्ध परिस्थितियों में नजर आए, तो वे स्वयं उन्हें पकड़ने या उनके साथ सीधे टकराव में पड़ने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं।
नागरिकों को तुरंत निकटतम पुलिस थाने, आपातकालीन पुलिस सहायता नंबर 112 या लुकआउट नोटिस में जारी विशेष नियंत्रण कक्ष के नंबरों पर फोन करके जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सटीक और विश्वसनीय सूचना देने वाले नागरिकों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें विभाग की ओर से उचित नकद पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भी जनता से किसी भी प्रकार की अपुष्ट अफवाहों से बचने और केवल अधिकृत पुलिस बुलेटिन पर भरोसा करने का आग्रह किया गया है।
Srinagar Jail Escape: जेल सुरक्षा सुधारों की आवश्यकता और आगामी प्रशासनिक कार्रवाई
श्रीनगर सेंट्रल जेल से दो विचाराधीन बंदियों के भागने की इस अप्रत्याशित घटना ने कारागार प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा को अनिवार्य बना दिया है। गृह विभाग और जेल प्रशासन अब पूरे केंद्र शासित प्रदेश की सभी केंद्रीय और जिला जेलों के सुरक्षा ऑडिट की तैयारी में जुट गया है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि कारागारों की बाउंड्री वॉल पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर आधारित अलार्म सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त कैमरों की तैनाती तत्काल की जानी चाहिए ताकि किसी भी अनाधिकृत गतिविधि का वास्तविक समय में पता चल सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्राथमिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही ड्यूटी में घोर लापरवाही बरतने वाले जेल कर्मचारियों और सुरक्षा प्रभारियों के विरुद्ध कठोर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त पकड़े जाने के बाद इन दोनों आरोपियों पर कारागार से भागने के जुर्म में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अलग से नया आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिससे उनकी न्यायिक प्रक्रिया और सजा की अवधि और अधिक सख्त हो जाएगी। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां युद्धस्तर पर दोनों की तलाश में जुटी हुई हैं।
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