Somvar Vrat 2026: भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से दूर होंगी बाधाएं, जानें व्रत की संपूर्ण विधि, पूजन सामग्री, नियम, मंत्र और धार्मिक लाभ
सोमवार व्रत में शिव-पार्वती की पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और पारण की पूरी विधि जानें
Somvar Vrat 2026: सनातन धर्म और वैदिक परंपरा में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी प्रमुख देवी-देवता को समर्पित माना गया है। इसी क्रम में सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव भगवान शिव और माता पार्वती की अराधना के लिए सबसे पावन और फलदायी दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का व्रत रखने से साधक को मानसिक शांति, पारिवारिक सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने, दांपत्य जीवन में मधुरता लाने और कुंडली के चंद्र दोष के निवारण के लिए सोमवार का उपवास अत्यंत चमत्कारी माना गया है।
सावन मास के सोमवार और सोलह सोमवार के व्रत का महत्व धार्मिक ग्रंथों में विशेष रूप से वर्णित है। यदि कोई भक्त निष्काम या सकाम भाव से नियमपूर्वक सोमवार का व्रत करता है, तो भगवान आशुतोष उसकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते हैं।
Somvar Vrat 2026: सोमवार व्रत के लिए आवश्यक पूजन सामग्री की पूरी सूची
भगवान शिव अत्यंत भोले माने जाते हैं और वे मात्र एक लोटा शुद्ध जल और प्रेमपूर्वक अर्पित किए गए बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। फिर भी सोमवार व्रत की संपूर्ण और विधिवत पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्रियों का होना आवश्यक माना गया है।
पूजा के लिए एक तांबे या पीतल का लोटा, गंगाजल या शुद्ध जल, कच्चा गाय का दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (पंचामृत निर्माण हेतु) तैयार रखना चाहिए। इसके साथ ही तीन पत्तियों वाले बिना कटे-फटे बेलपत्र (बिल्व पत्र), सफेद सुगंधित पुष्प, धतूरा, भांग, मदार (आक) के फूल, श्वेत चंदन, बिना टूटा हुआ अक्षत (चावल), पवित्र भस्म, धूपबत्ती, गाय के घी का दीपक, कपूर, कलावा (मौली), जनेऊ, फल, मिष्ठान्न और नैवेद्य की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। साधक को स्वयं धारण करने के लिए स्वच्छ श्वेत अथवा हल्के रंग के वस्त्र तैयार रखने चाहिए।
प्रातःकाल स्नान, संकल्प और वेदी निर्माण की तैयारी
सोमवार के दिन व्रत रखने वाले जातक को सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर गंगाजल युक्त जल से स्नान करना चाहिए और शुद्ध, धुले हुए श्वेत या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। काले या अत्यधिक गहरे नीले रंग के वस्त्रों से इस दिन परहेज करना शास्त्रसम्मत माना गया है।
स्नान के उपरांत पूजा स्थल या घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। वहां एक स्वच्छ चौकी पर सफेद या लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, अथवा पारद या स्फटिक शिवलिंग स्थापित करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव के सम्मुख व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय मन में अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए कहें कि हे देवाधिदेव महादेव, मैं आपके इस पावन सोमवार व्रत का पूरी श्रद्धा और निष्ठा से पालन करने का संकल्प लेता/लेती हूं, मेरी पूजा स्वीकार कर मनोकामना पूर्ण करें।
पंचामृत से शिवलिंग अभिषेक की प्रामाणिक और चरणबद्ध विधि
भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का सबसे अधिक आध्यात्मिक महत्व है। अभिषेक की शुरुआत सर्वप्रथम एक पतली धारा के रूप में शुद्ध गंगाजल या ताजे जल से करें। जल अर्पित करते समय निरंतर पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का मन ही मन उच्चारण करते रहें।
जल के पश्चात पंचामृत के पांचों द्रव्यों से क्रमानुसार अभिषेक किया जाता है। सबसे पहले कच्चा गाय का दूध अर्पित करें, उसके बाद दही, फिर शुद्ध देसी घी, शहद और अंत में शक्कर अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिव पूजा में हमेशा कच्चे दूध का ही प्रयोग करना चाहिए, उबला हुआ दूध शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। पंचामृत से अभिषेक पूर्ण होने के बाद शिवलिंग को पुनः स्वच्छ गंगाजल की धारा से अच्छी तरह धोकर शुद्ध करें और साफ सूती वस्त्र से पोंछें।
शिवलिंग पर पूजन सामग्री का अर्पण और मंत्र जप
अभिषेक संपन्न होने के उपरांत शिवलिंग पर श्वेत चंदन का त्रिपुंड लगाएं और थोड़ी सी भस्म अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाएं। ध्यान रहे कि चावल का एक भी दाना टूटा हुआ न हो। इसके पश्चात बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पत्ते का चिकना भाग नीचे यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए।
बेलपत्र के साथ धतूरा, मदार के फूल, सफेद कनेर या अन्य ताजे फूल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। माता पार्वती को सिंदूर, रोली, अक्षत और सुहाग सामग्री अर्पित करें, किंतु शिवलिंग पर कभी भी हल्दी, सिंदूर या तुलसी पत्र न चढ़ाएं। इसके बाद घी का दीपक और धूपबत्ती प्रज्वलित करें। फिर रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का शांत चित्त से जप करें। मंत्र जप के उपरांत सोमवार व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक श्रवण करें।
आरती, नैवेद्य समर्पण और पारण के महत्वपूर्ण नियम
कथा और मंत्र जप की समाप्ति के बाद कपूर जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की भावपूर्ण आरती उतारें। आरती के उपरांत भगवान को मौसमी फल, सफेद मिष्ठान्न या गेहूं के आटे व गुड़ से बने चूरमे का भोग लगाएं। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
सोमवार व्रत के नियमों की बात करें तो साधक को पूरे दिन ब्रह्मचर्य और सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। इस दिन पूर्ण निराहार अथवा फलाहार (फल, गाय का दूध और सेंधा नमक युक्त सात्विक आहार) लिया जा सकता है। साधारण नमक, अन्न, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग अनिवार्य है। शाम के समय पुनः आरती और पूजन करने के बाद फलाहार ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है। जो लोग पूर्ण निर्जला उपवास रखते हैं, वे अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह सूर्योदय के बाद ही अन्न ग्रहण कर व्रत का समापन करते हैं।
Somvar Vrat 2026: सोमवार व्रत के आध्यात्मिक लाभ और वैवाहिक सुख की प्राप्ति
धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक आख्यानों के अनुसार माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या और सोमवार व्रतों का अनुष्ठान किया था। इसी कारण यह व्रत योग्य वर की प्राप्ति और शीघ्र विवाह के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
जो जातक लगातार मानसिक तनाव, अवसाद, आर्थिक तंगी या पारिवारिक कलह से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत एक अचूक आध्यात्मिक औषधि का कार्य करता है। चंद्रमा के अधिपति देवता स्वयं भगवान शिव हैं, अतः सोमवार की पूजा से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है जिससे मानसिक चंचलता समाप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि कोई भक्त 16 सोमवार का संकल्प लेता है, तो उसे बिना किसी व्यवधान के 16 सप्ताह तक निरंतर इस नियम का पालन करना चाहिए। निष्काम भाव से की गई शिव आराधना साधक के समस्त कष्टों को हरकर उसे मोक्ष और आनंद की ओर ले जाती है।
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