Srinagar Airport: पार्किंग के दौरान खंभे से टकराया IndiGo विमान, सभी सुरक्षित
पार्किंग के दौरान VDGS पोल से हुआ संपर्क, यात्रियों को मैनुअल सीढ़ियों से सुरक्षित उतारा गया
Srinagar Airport: जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर स्थित शेख उल-आलम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार सुबह एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया। नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची इंडिगो एयरलाइंस की एक वाणिज्यिक उड़ान सुरक्षित लैंडिंग के उपरांत जब टर्मिनल के एप्रन एरिया में पार्किंग बे की ओर बढ़ रही थी, तभी उसका एक हिस्सा विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) के पोल से टकरा गया। अचानक हुए इस संपर्क और झटके से विमान में सवार यात्रियों के बीच कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बन गया, किंतु गनीमत यह रही कि विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी भी व्यक्ति को कोई शारीरिक चोट नहीं आई है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और श्रीनगर एयरपोर्ट प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह घटना शुक्रवार सुबह ठीक 9:02 बजे घटी। घटना के तत्काल बाद हवाई अड्डे के सुरक्षा प्रोटोकॉल को सक्रिय किया गया और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत यात्रियों को पारंपरिक जेट ब्रिज के बजाय मैनुअल सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर टर्मिनल भवन पहुंचाया गया। विमानन सुरक्षा नियामक यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरपोर्ट सुरक्षा दल ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामले की औपचारिक तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
Srinagar Airport: नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी इंडिगो की फ्लाइट 6E 225
घटनाग्रस्त विमान इंडिगो एयरलाइंस की नियमित उड़ान संख्या 6E 225 थी, जो नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरकर अपने निर्धारित समय पर श्रीनगर पहुंची थी। विमान का आधिकारिक नागरिक विमानन पंजीकरण कोड VT-NOG दर्ज है। रनवे पर विमान का टचडाउन पूरी तरह सुचारु और सुरक्षित रहा था, तथा विमान अपने सामान्य गति से टैक्सीवे से गुजरते हुए टर्मिनल की ओर बढ़ा था।
यह स्पष्ट करना तकनीकी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह कोई हवाई हादसा अथवा रनवे पर लैंडिंग के समय हुआ हादसा नहीं था। विमान पहले ही अपनी उड़ान का सबसे संवेदनशील और जोखिम भरा चरण सुरक्षित रूप से पूरा कर चुका था। वास्तविक घटना उस समय घटी जब विमान को एयरपोर्ट के एप्रन क्षेत्र में स्थित बे नंबर 06 (पार्किंग स्टैंड 6) पर पार्क करने के लिए अंतिम रूप से मोड़ा जा रहा था। इसी दौरान ग्राउंड मूवमेंट की प्रक्रिया में विमान का बाहरी ढांचा वहां स्थापित इलेक्ट्रॉनिक गाइडेंस पोल के संपर्क में आ गया।
सुबह 9:02 बजे का घटनाक्रम: झुक गया वीडीजीएस पोल
एयरपोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, सुबह 9:02 बजे जब विमान निर्धारित मार्किंग रेखा पर मुड़ रहा था, तभी विंग टिप अथवा इंजन काउलिंग का संपर्क वहां लगे विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) के मजबूत खंभे से हुआ। टक्कर का प्रभाव इतना था कि तस्वीरों और प्रारंभिक निरीक्षण में इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन युक्त पोल एक तरफ झुकता हुआ दिखाई दिया।
टक्कर की हल्की आवाज और झटके के तुरंत बाद कॉकपिट क्रू ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर विमान को उसी स्थान पर स्थिर कर दिया। एप्रन पर तैनात ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ, मार्शलर्स और सीआईएसएफ के सुरक्षा कर्मियों ने फौरन चारों तरफ से सुरक्षा घेरा बना लिया और स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक निरीक्षण में जब यह सुनिश्चित हो गया कि ईंधन रिसाव या आग जैसी कोई आपात स्थिति नहीं है, तब राहत एवं निकासी का कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया।
मैनुअल सीढ़ियों के जरिए यात्रियों की सुरक्षित निकासी
चूंकि विमान अपने निर्धारित जेट ब्रिज डॉकिंग पॉइंट तक पूरी तरह संरेखित नहीं हो पाया था, इसलिए यात्रियों को सामान्य एरोब्रिज से उतारना संभव नहीं था। एयरपोर्ट प्रबंधन ने तत्परता दिखाते हुए ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट से मोबाइल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों को विमान के दरवाजों से जोड़ा।
केबिन क्रू ने शांत और संयमित तरीके से यात्रियों को स्थिति से अवगत कराया और उन्हें बिना किसी घबराहट के कतारबद्ध तरीके से विमान से नीचे उतारा। विमान में सवार सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को एयरपोर्ट की शटल बसों के जरिए सीधे आगमन टर्मिनल की ओर रवाना किया गया, जहां उनके सामान की सुगम डिलीवरी कराई गई। यात्रियों ने सुरक्षित बाहर निकलने के बाद राहत की सांस ली और एयरपोर्ट ग्राउंड टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
क्या होता है विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS)?
विमानन क्षेत्र में आधुनिक हवाई अड्डों पर सुरक्षित पार्किंग सुनिश्चित करने के लिए Visual Docking Guidance System (VDGS) एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण माना जाता है। यह प्रणाली पार्किंग बे के ठीक सामने एक ऊंचे खंभे पर स्थापित होती है, जिसमें लेजर सेंसर्स, इंफ्रारेड कैमरे और डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन लगे होते हैं।
जब कोई विमान टैक्सीवे से बे की ओर बढ़ता है, तो यह प्रणाली पायलट को दृश्य संकेत देती है कि विमान सही केंद्रीय रेखा (Centerline) पर है या नहीं, उसकी गति कितनी है और उसे सटीक रूप से किस बिंदु पर रुकना (Stop) है। आधुनिक विमानन में यह व्यवस्था पारंपरिक मैनुअल मार्शलर की भूमिका को स्वचालित बनाती है। श्रीनगर में हुई इस घटना में जांच का मुख्य बिंदु यही रहेगा कि क्या सिस्टम ने गलत डेटा दर्शाया था, क्या सेंसर में कोई तकनीकी खराबी थी, अथवा कॉकपिट क्रू या ग्राउंड मार्शलिंग से विमान के मोड़ के समय कोई मानवीय चूक हुई।
विमान को हुए नुकसान का तकनीकी मूल्यांकन और ग्राउंडिंग
घटना के उपरांत इंडिगो के संबंधित एयरबस विमान को सुरक्षा मानकों के तहत तुरंत ग्राउंड (AOG – Aircraft on Ground) कर दिया गया है। इंडिगो के विमान रखरखाव इंजीनियरों और डीजीसीए के सुरक्षा निरीक्षकों की एक संयुक्त टीम विमान के उस हिस्से की विस्तृत जांच कर रही है जो पोल के सीधे संपर्क में आया था।
विमानन सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी संरचना से टकराने के बाद विमान के विंग्स, विंगलेट्स, नेविगेशन लाइट्स और संरचनात्मक त्वचा (Aircraft Skin) की अल्ट्रासोनिक और गैर-विनाशकारी परीक्षण (NDT) तकनीकों के जरिए सूक्ष्म आंतरिक क्षति की पड़ताल की जाती है। जब तक एयरवर्थनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं हो जाता और डीजीसीए से आवश्यक सुरक्षा मंजूरी प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक विमान को किसी भी व्यावसायिक उड़ान के लिए सेवा में नहीं लगाया जाएगा।
हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह सामान्य
इस घटना के बावजूद श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समग्र परिचालन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। एयरपोर्ट निदेशक ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि घटना केवल एक विशिष्ट पार्किंग बे (बे नंबर 06) तक सीमित थी, जिसके चलते रनवे, अन्य टैक्सीवे और शेष सभी पार्किंग स्टैंड पूरी तरह चालू रहे।
श्रीनगर से देश के अन्य महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ और जम्मू के लिए संचालित होने वाली सभी निर्धारित उड़ानों का आगमन और प्रस्थान अपने तय समय-सारणी के अनुसार सुचारु रूप से जारी रहा। सामान्य यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर किसी भी स्तर पर कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं होने दिया गया।
Srinagar Airport: जांच के दायरे में तकनीकी और संचालन संबंधी पहलू
एयरपोर्ट प्रशासन और उड्डयन नियामक ने साफ किया है कि घटना के कारणों पर किसी भी तरह का पूर्व-अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। सक्षम तकनीकी अधिकारियों द्वारा शुरू की गई उच्चस्तरीय जांच में कई महत्वपूर्ण कोणों को शामिल किया गया है।
जांच दल पार्किंग के समय की एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ऑडियो रिकॉर्डिंग, विमान के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR), फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और एप्रन एरिया में लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का गहन विश्लेषण कर रहा है। इसके अतिरिक्त, उस समय ड्यूटी पर मौजूद ग्राउंड मार्शलर्स और पायलटों के आधिकारिक बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। इस जांच का प्राथमिक उद्देश्य न केवल इस घटना की वास्तविक जिम्मेदारी तय करना है, बल्कि भविष्य में देश के किसी भी हवाई अड्डे पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा सिफारिशें जारी करना भी है।
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