Sanwaliya Seth Temple: श्रावण मास में 35.66 करोड़ का चढ़ावा, सोने-चांदी की भी रिकॉर्ड बरसात
श्रावण मास में मंदिर को 35.66 करोड़ रुपये के साथ 1.38 किलो सोना और 133 किलो चांदी मिली
Sanwaliya Seth Temple: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं ने एक बार फिर अटूट श्रद्धा और विश्वास का परिचय दिया है। भगवान सांवलिया सेठ के दरबार में आयोजित की गई दानपेटियों की गणना का अंतिम चरण पूरा होने के बाद कुल चढ़ावे का आंकड़ा जारी कर दिया गया है। श्रावण मास की अवधि में भक्तों द्वारा 35 करोड़ 66 लाख 64 हजार 428 रुपये का कुल दान अर्पित किया गया है। नकदी के साथ-साथ इस बार भंडार से 1 किलो 38 ग्राम 300 मिलीग्राम सोना और 133 किलो 653 ग्राम चांदी भी प्राप्त हुई है। यह विशाल दान राशि और बहुमूल्य धातुएं सांवलिया सेठ के प्रति देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को रेखांकित करती हैं।
मंदिर मंडल के अनुसार, 11 अगस्त 2026 से प्रारंभ हुई भंडार गणना का छठा और अंतिम चरण बुधवार को कड़ी सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच संपन्न हुआ। मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने दान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि श्रावण मास के पवित्र अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तों का हुजूम देखने को मिला। भक्तों ने अपनी मनौतियां पूरी होने पर न केवल नकदी बल्कि सोने-चांदी के सिक्के और आभूषण भी बड़ी मात्रा में अर्पित किए। इस अभूतपूर्व चढ़ावे को स्थानीय स्तर पर आस्था की सोने-चांदी वाली बरसात के रूप में देखा जा रहा है।
Sanwaliya Seth Temple: भंडार गणना के विस्तृत आंकड़े: नकदी, ऑनलाइन माध्यम और बहुमूल्य धातुओं की स्थिति
श्री सांवलिया सेठ मंदिर में संपन्न हुई भंडार गणना के दौरान सार्वजनिक दानपेटियों से अकेले 27 करोड़ 89 लाख 54 हजार 347 रुपये की नकद राशि निकली है। इसके अतिरिक्त, मंदिर के भेंट कक्ष, मनीऑर्डर और डिजिटल ऑनलाइन माध्यमों के जरिए 7 करोड़ 77 लाख 10 हजार 81 रुपये की अतिरिक्त राशि प्राप्त हुई है। इन सभी माध्यमों को मिलाकर कुल चढ़ावा 35.66 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। बहुमूल्य धातुओं की बात करें तो सोने का कुल वजन 1 किलो 38 ग्राम 300 मिलीग्राम रहा, जबकि चांदी का कुल वजन 133 किलो 653 ग्राम दर्ज किया गया। विशेष बात यह रही कि पिछली दान गणना की तुलना में इस बार चांदी के वजन में लगभग 30 किलोग्राम की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दान पात्रों की गिनती की पूरी प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की गई। इस दौरान मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी, सदस्य, सुरक्षा कर्मी, स्टोर प्रभारी और राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सार्वजनिक रूप से की गई इस गिनती से मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि श्रावण जैसे पवित्र मास में इतनी बड़ी मात्रा में दान का आना भगवान सांवलिया सेठ की अपरंपार कृपा और भक्तों की असीम श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है।
मेवाड़ के कृष्ण धाम में श्रावण मास के दौरान दिखी श्रद्धालुओं की अपार भीड़
श्री सांवलिया सेठ मंदिर को मेवाड़ क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। इसे स्थानीय लोग ‘मेवाड़ का कृष्ण धाम’ भी कहते हैं। मान्यता है कि सांवलिया सेठ अपने भक्तों के व्यापार, कृषि और पारिवारिक जीवन में हिस्सेदार की तरह कृपा बनाए रखते हैं, जिसके चलते मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार खुले दिल से चढ़ावा अर्पित करते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास में राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु सांवलिया जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर मंडल के पिछले आंकड़ों से तुलना की जाए तो जुलाई 2026 के महीने में कुल 38 करोड़ 23 लाख रुपये से अधिक का चढ़ावा प्राप्त हुआ था। जुलाई की तुलना में हालांकि श्रावण मास में नकद राशि में मामूली कमी देखी गई, लेकिन सोने और चांदी की मात्रा में आई तेजी ने इस महीने के आंकड़ों को बेहद खास बना दिया है। चांदी की मात्रा में 30 किलो की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि भक्त नकदी के साथ-साथ कीमती धातुओं के रूप में भी भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं।
पारदर्शी प्रबंधन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास पर पड़ता प्रभाव
सांवलिया सेठ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि इसका एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक पहलू भी है। मंदिर में आने वाली विशाल दान राशि का उपयोग मंदिर प्रबंधन द्वारा परिसर के विकास, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं के निर्माण, विशाल अन्नक्षेत्र के संचालन और विभिन्न धर्मार्थ गतिविधियों में किया जाता है। दान राशि की गणना नियमित अंतरालों पर की जाती है ताकि व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे। मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने गणना कार्य में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, बैंक कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों का आभार व्यक्त किया।
धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह मंदिर पूरे मेवाड़ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। श्रावण मास जैसे विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की भारी आवक से स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, परिवहन सेवाओं और हस्तशिल्प विक्रेताओं को व्यापक रोजगार मिलता है। इसके अलावा, आजकल डिजिटल माध्यमों से दान करने की सुविधा मिलने के कारण विदेशों और दूर-दराज के क्षेत्रों में बैठे भक्त भी आसानी से मंदिर कोष में अपना योगदान दे रहे हैं।
Sanwaliya Seth Temple: सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की विकास योजनाएं
लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही और भारी मात्रा में आने वाले चढ़ावे को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। मंदिर परिसर में आधुनिक सर्विलांस सिस्टम, पर्याप्त सुरक्षा बल और स्वच्छता की चाक-चौबंद व्यवस्था रखी जाती है। भंडार गणना जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं को समयबद्ध और त्रुटिहीन तरीके से पूरा किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
आने वाले समय में मंदिर मंडल द्वारा श्रद्धालुओं के रुकने, शेड निर्माण, दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुगम बनाने तथा तकनीकी सुविधाओं के विस्तार के लिए नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। राजस्थान के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर सांवलिया सेठ मंदिर का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रावण मास में मिली यह रिकॉर्ड दान राशि और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास यह साबित करता है कि आस्था और भक्ति की यह पवित्र परंपरा समय के साथ और अधिक मजबूत होती जा रही है।
Read More Here