Ranchi Students Silent March: हाथों में फूल, जुबान पर खामोशी; जेपीएससी-जेएसएससी में पारदर्शिता की उठाई मांग
JPSC-JSSC में धांधली के खिलाफ छात्रों ने फूल लेकर निकाला मौन मार्च, सरकार से मांगा सुधार
Ranchi Students Silent March: झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर मंगलवार को एक बेहद अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 18वें दिन भी जारी रहा। ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले हजारों की संख्या में छात्र और अभ्यर्थी एकजुट हुए, लेकिन इस बार उनके विरोध का तरीका बिल्कुल अलग था। छात्रों ने हाथों में फूल लेकर और जुबान पर पूरी तरह खामोशी रखकर एक विशाल ‘साइलेंट मार्च’ (मौन जुलूस) निकाला। जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू होकर यह मार्च अल्बर्ट एक्का चौक तक गया। बिना किसी नारेबाजी या शोर-शराबे के, छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सिस्टम में सुधार की अपनी मांग को बेहद मजबूती से सरकार के सामने रखा।
Ranchi Students Silent March: मौन जुलूस: खामोशी से दिया कड़ा संदेश
मंगलवार को निकाले गए इस मार्च की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए नारेबाजी का सहारा नहीं लिया, बल्कि खामोशी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। आमतौर पर छात्र आंदोलनों में उग्र प्रदर्शन और तेज नारेबाजी देखने को मिलती है, लेकिन यहां छात्रों ने अनुशासन का परिचय देते हुए हाथों में फूल थामे रखे। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि उनका यह आंदोलन किसी विशेष व्यक्ति, अधिकारी या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ है जो युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र अपना कई सालों का समय, पैसा और ऊर्जा लगाते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठना उनके टूटते भरोसे का प्रतीक है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और लगातार बढ़ता संघर्ष
जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, गड़बड़ी और भाई-भतीजावाद के आरोपों को लेकर राज्य के छात्र पिछले 25 जुलाई से लगातार सड़क पर उतरे हुए हैं। मंगलवार को यह आंदोलन अपने 18वें दिन में प्रवेश कर गया। इस पूरी अवधि के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार और संबंधित आयोगों तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया है। राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं की साख इस समय दांव पर है और अनियमितताओं के इन गंभीर आरोपों ने पूरे परीक्षा तंत्र पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
क्या हैं आंदोलनरत छात्रों की प्रमुख मांगें?
छात्रों के इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जेपीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली में पूर्ण सुधार लाना है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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पारदर्शिता: परीक्षा की चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए ताकि हर योग्य अभ्यर्थी को निष्पक्ष अवसर मिल सके।
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परीक्षा रद्द करना: जिन परीक्षाओं में पेपर लीक या धांधली के पुख्ता आरोप सामने आए हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
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स्वतंत्र जांच (CBI या न्यायिक आयोग): छात्र मांग कर रहे हैं कि इन कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच सीबीआई (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का एक पैनल बनाकर जांच सौंपी जाए, ताकि जांच एजेंसी पर सरकार का कोई दबाव न हो।
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कड़ी सजा: निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं।
भूख हड़ताल से बिगड़ रही छात्रों की तबीयत, स्वास्थ्य को लेकर चिंता
आंदोलन को और धार देने के लिए 6 प्रदर्शनकारी छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। लगातार बिना खाए-पिए रहने की वजह से इनमें से दो छात्रों की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना ने आंदोलन की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। छात्र संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य की गंभीरता को समझे और जल्द से जल्द उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस निर्णय ले।
सरकार से वार्ता के 6 दौर रहे बेनतीजा
रविवार को जेपीएससी-जेएसएससी मंच के प्रतिनिधियों और झारखंड सरकार के आला अधिकारियों के बीच छठे दौर की वार्ता आयोजित की गई थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह बातचीत भी बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। वार्ता के बाद दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर समस्या के समाधान को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया। लगातार बातचीत विफल होने और सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन न मिलने के कारण ही छात्रों ने अपने आंदोलन को जारी रखने का फैसला किया और मंगलवार को यह विशाल साइलेंट मार्च निकाला।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ऐलान, लेकिन छात्र अभी भी असंतुष्ट
इस बढ़ते दबाव के बीच, झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का महत्वपूर्ण ऐलान किया है। सरकार ने 14वीं जेपीएससी और दो अन्य बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की है। इसे छात्रों की मांगों की दिशा में सरकार का एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र अभी भी इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उनकी मुख्य मांग पूरे सिस्टम में ‘पूर्ण पारदर्शिता’ लाने और दोषियों के खिलाफ ‘स्वतंत्र जांच’ कराने की है, जिस पर वे अब भी अडिग हैं।
Ranchi Students Silent March: युवाओं का भविष्य और व्यवस्था सुधार की दरकार
सरकारी भर्ती परीक्षाएं राज्य के लाखों युवाओं के करियर और सपनों का आधार होती हैं। जब इनमें अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो यह केवल एक परीक्षा का फेलियर नहीं होता, बल्कि यह पूरे सिस्टम की साख को गहरा नुकसान पहुंचाता है। रांची की सड़कों पर हाथों में फूल लिए इन छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना जानते हैं। खामोशी और फूल का यह संयोजन उनके दृढ़ संकल्प और शांति का प्रतीक है, जिसने आम जनता से लेकर प्रशासन तक का ध्यान खींचा है। अब यह राज्य सरकार और आयोगों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं के टूटे हुए भरोसे को बहाल करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।
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