Ramnagar Bulldozer Action: उत्तराखंड के रामनगर में 82 अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, 525 पुलिसकर्मी तैनात
नैनीताल जिले के रामनगर स्थित पूछड़ी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन और वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाया।
Ramnagar Bulldozer Action: उत्तराखंड में सरकारी और आरक्षित वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए प्रशासन का सख्त अभियान जारी है। नैनीताल जिले के रामनगर स्थित संवेदनशील पूछड़ी गांव में शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 की तड़के प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने महाध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के नजदीकी वन क्षेत्र में दशकों से बसे 82 अवैध कच्चे और पक्के निर्माणों को ढहाने के लिए एक साथ कई बुलडोजर, जेसीबी और पोकलैंड मशीनें गरज रही हैं। संभावित विरोध और कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मौके पर 500 से अधिक पुलिसकर्मियों, पीएसी की कंपनियों और राजस्व अधिकारियों का कड़ा पहरा है।
Ramnagar Bulldozer Action: तड़के पांच बजे से गरजीं भारी मशीनें, व्यवस्थित तरीके से शुरू हुआ अभियान
रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि को खाली कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई दिनों से गोपनीय रूपरेखा तैयार की जा रही थी। शनिवार सुबह करीब पांच बजे जब अधिकांश लोग सो रहे थे, तभी वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की देखरेख में भारी मशीनरी के साथ ध्वस्तीकरण दस्ता गांव में दाखिल हुआ। पूर्व निर्धारित योजना के तहत चिह्नित निर्माणों को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर एक साथ ढहाने का काम शुरू किया गया।
कार्रवाई के दायरे में पक्के दोमंजिला मकान, दुकानें, टीन-शेड और चारदीवारियां शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और वन संरक्षण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत ही आरक्षित वन भूमि से यह अतिक्रमण हटाया जा रहा है।
82 निर्माणों पर चल रहा बुलडोजर, नौ मामलों को अदालत से मिली है अंतरिम राहत
वन विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पूछड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दूसरे चरण के तहत कुल 92 अवैध निर्माणकर्ताओं को पहले ही विधिक नोटिस जारी कर स्वयं कब्जा हटाने की अंतिम मोहलत दी गई थी। इनमें से नौ मामलों में कब्जाधारकों ने अदालत की शरण ली थी, जहां प्रकरण विचाराधीन होने और स्थगन आदेश (स्टे) प्रभावी होने के कारण संबंधित नौ ढांचों को फिलहाल इस कार्रवाई से बाहर रखा गया है।
अदालती राहत वाले निर्माणों को छोड़कर शेष 82 अवैध ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है। वन अधिकारियों का कहना है कि नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी भूमि खाली न किए जाने पर नियमानुसार यह बलपूर्वक निष्कासन की कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा का अभेद्य घेरा, दो सुपर जोन और सात जोन में बंटा इलाका
अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी भी प्रकार के पथराव, विरोध-प्रदर्शन या उपद्रव की आशंका को निष्प्रभावी करने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा घेरा तैयार किया है। सुरक्षा व्यवस्था में 525 पुलिसकर्मियों, महिला पुलिस बल और प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) की तीन कंपनियों को मुस्तैद किया गया है।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे पूछड़ी क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टरों में विभाजित किया है। प्रत्येक जोन और सेक्टर में मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस उपाधीक्षक व इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाया गया है। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए छह स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग की गई है और मौके पर दमकल गाड़ियां, एम्बुलेंस तथा चिकित्सा टीमें लगातार तैनात हैं।
तीन किलोमीटर के दायरे में धारा 144 जैसे कड़े प्रतिबंध और सोशल मीडिया पर नजर
कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने पूछड़ी गांव से जुड़े लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में सामान्य आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। केवल स्थानीय निवासियों, बीमार व्यक्तियों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही गहन जांच के बाद सीमित अनुमति दी जा रही है।
इसके साथ ही पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर किसी भी प्रकार की धार्मिक, भड़काऊ या भ्रामक पोस्ट साझा करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में गैर-जमानती मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
पूर्व में दिसंबर 2025 में भी चला था प्रशासन का पीला पंजा
रामनगर का पूछड़ी गांव लंबे समय से वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर चर्चा में रहा है। इससे पहले 7 दिसंबर 2025 को भी वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने इसी गांव में एक बड़ा अभियान चलाकर 51 अवैध ढांचों को ध्वस्त किया था।
तत्कालीन कार्रवाई के बाद शेष बचे भूखंडों की ड्रोन मैपिंग और राजस्व व वन विभाग के संयुक्त सीमांकन के बाद 92 अन्य अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। वन विभाग के अनुसार, पूछड़ी का यह इलाका राजाजी-कॉर्बेट कॉरिडोर और संवेदनशील वन्यजीव गलियारे से सटा हुआ है, जहां मानवीय बस्तियों का अनियंत्रित विस्तार वन्यजीव सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा बन गया था।
Ramnagar Bulldozer Action: अपने ही आशियानों को उजड़ता देख बेबस नजर आए लोग
बुलडोजर कार्रवाई शुरू होने से पहले ही इलाके में गहरा तनाव और हताशा का माहौल देखा गया। प्रशासन के कड़े रुख को भांपते हुए दर्जनों परिवारों ने शुक्रवार देर रात से ही अपने पक्के मकानों से चौखट, खिड़कियां, बिजली के उपकरण और घरेलू सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था।
कार्रवाई के दौरान कई महिलाएं और बुजुर्ग अपने वर्षों पुराने आशियानों को मलबे में तब्दील होते देख फफक पड़े, जिन्हें महिला पुलिसकर्मियों ने समझा-बुझाकर सुरक्षित दूरी पर पहुंचाया। वहीं कुछ महिलाओं की अचानक घबराहट के कारण तबीयत बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया। विस्थापित हो रहे लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे थे और अब अचानक बेघर होने से उनके सामने आजीविका और बच्चों की शिक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उधर, प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि पर्यावरण और वन संपदा की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर वन भूमि पर अनधिकृत कब्जे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
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