Indian Railways: राजधानी की स्पीड से दौड़ेंगी 400 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें, यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत
राजधानी जैसी रफ्तार से दौड़ेंगी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें, यात्रियों का बचेगा समय
Indian Railways: भारतीय रेलवे देशभर के करोड़ों मध्यमवर्गीय और रोजमर्रा के यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी लेकर आया है। रेलवे बोर्ड ने एक नए और महत्वाकांक्षी महा-प्लान को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिसके तहत देश के विभिन्न रेल कॉरिडोर्स पर चलने वाली लगभग 350 से 400 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम परिचालन गति को 110 किलोमीटर प्रति घंटे के पुराने ढांचे से बढ़ाकर सीधे 130 किलोमीटर प्रति घंटे के कड़क स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 130 किमी प्रति घंटे की यह तीव्र रफ्तार वर्तमान में केवल देश की प्रीमियम रेलगाड़ियों जैसे राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत एक्सप्रेस तक ही पूरी तरह सीमित थी। रेल मंत्रालय के इस बड़े और कूटनीतिक फैसले से लंबी दूरी का सफर तय करने वाले आम यात्रियों के समय की एक बहुत बड़ी बचत होगी और भारतीय रेल यात्रा पहले से कहीं अधिक आरामदायक, सुलभ तथा तेज गति वाली बन जाएगी।
भारतीय रेलवे इस दूरगामी योजना को देशव्यापी स्तर पर पूरी कड़ाई के साथ चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से लागू करने की तैयारी में जुट गया है। पहले चरण के तहत उन विशिष्ट रेल रूटों और रेलखंडों को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जा रही है, जहां पटरियों का सुदृढ़ीकरण (Track Upgradation), आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक एलएचबी (LHB) कोचों की उपलब्धता पहले से ही शत-प्रतिशत पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार का यह बड़ा कदम भारतीय रेल नेटवर्क को वैश्विक मानकों के समकक्ष विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा प्रोग्रेसिव प्रयास है, जो न केवल यात्री सुविधाओं को अपग्रेड करेगा बल्कि देश के समूचे रेल नेटवर्क की परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) को भी एक बिल्कुल नई ऊंचाई प्रदान करेगा। आइए देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन पोर्टल्स की प्रामाणिक समाचार शैली के अनुसार जानते हैं रेलवे के इस महा-प्लान की पूरी इनसाइड स्टोरी, रूटों का चयन और इसके पीछे का तकनीकी गणित।
रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना, 400 एक्सप्रेस ट्रेनों को मिलेगा राजधानी एक्सप्रेस जैसा कड़क रश
भारतीय रेलवे के बेड़े में शामिल सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें अब तक पटरियों की क्षमता और पुराने कोचों के डिजाइनों के चलते अधिकतम 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक ही सीमित रखी जाती थीं। लेकिन नए वित्तीय कैलेंडर के कड़े सुरक्षा मानकों के सफल ऑडिट के बाद, रेलवे बोर्ड ने इन ट्रेनों को भी प्रीमियम राजधानी एक्सप्रेस जैसी 130 किमी प्रति घंटे की हाई-स्पीड श्रेणी में अपग्रेड करने के कूटनीतिक प्रस्ताव को अपनी सैद्धांतिक और विधिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के दायरे में प्रारंभिक तौर पर लगभग 350 से 400 मुख्य एक्सप्रेस गाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनके रैक को पूरी तरह से आधुनिक जर्मन तकनीक वाले एलएचबी कोचों में बदला जा चुका है।
तकनीकी विज्ञान के दृष्टिकोण से, पुराने पारंपरिक आईसीएफ (ICF) कोचों की तुलना में ये नए एलएचबी कोच हल्के, स्टेनलेस स्टील से निर्मित और अत्यधिक सुरक्षित एंटी-टेलीस्कोपिक तकनीक पर आधारित होते हैं, जो आपातकालीन परिस्थितियों में 160 किमी प्रति घंटे तक की तीव्र गति को भी बेहद आसानी से सहन करने का माद्दा रखते हैं। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस समय देश के सभी प्रमुख रेल जोनों में नए कस्टमाइज्ड टाइम-टेबल (समय सारणी) की समीक्षा और रूट-वाइज तकनीकी तैयारियों की लाइव मैपिंग का काम पूरी मुस्तैदी से चल रहा है। इस स्पीड अपग्रेडेशन के धरातल पर उतरते ही देश के सालाना लगभग 40 से 45 करोड़ आम रेल यात्रियों को सीधे तौर पर एक बहुत बड़ा लॉजिस्टिक्स और ट्रैवलिंग फायदा मिलना तय माना जा रहा है।
Indian Railways: लंबी दूरी के सफर में होगी घंटों की बड़ी बचत, आम आदमी के बजट में आएगा ‘राजधानी’ का आनंद
ट्रेनों की गति को 110 से बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटे करने का सीधा और सबसे बड़ा क्रांतिकारी लाभ देश के उन यात्रियों को मिलेगा जो लंबी दूरी की अंतरराज्यीय यात्राएं करते हैं। सांख्यिकीय और मौसमी कड़ियों के आधार पर किए गए एक फॉरेंसिक विश्लेषण के अनुसार, इस गति वृद्धि के बाद दिल्ली से मुंबई, दिल्ली से कोलकाता, लखनऊ से मुंबई और पटना से दिल्ली जैसे व्यस्ततम रेल रूटों पर चलने वाली आम एक्सप्रेस ट्रेनों के यात्रा समय में सीधे दो से चार घंटे की एक बहुत बड़ी और स्थाई कमी दर्ज की जाएगी। समय की यह बचत न केवल व्यावसायिक और जरूरी आपातकालीन यात्राओं पर जाने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि इससे स्टेशनों पर होने वाली ट्रेनों की लेट-लतीफी और अनावश्यक आउटर सिग्नलों पर खड़ी रहने की पुरानी समस्या भी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
रेलवे की इस प्रोग्रेसिव नीति का सबसे खूबसूरत सामाजिक पहलू यह है कि अभी तक 130 किमी प्रति घंटे की तीव्र और आरामदायक रफ्तार का आनंद केवल वही संपन्न लोग उठा पाते थे जो राजधानी या वंदे भारत जैसी महंगी प्रीमियम ट्रेनों का उच्च किराया वहन करने में सक्षम थे। लेकिन इस नए और कस्टमाइज्ड अपग्रेड के बाद, देश का गरीब और मध्यमवर्गीय रेल यात्री भी अपनी सामान्य एक्सप्रेस और स्लीपर क्लास की टिकट पर उसी प्रीमियम ‘राजधानी स्पीड’ का पूरा आनंद पूरी संप्रभुता के साथ ले सकेगा। यह बड़ा फैसला सीधे तौर पर सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की मूल राष्ट्रीय भावना को जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत करता है, जहां बिना किसी आर्थिक भेदभाव के देश के हर एक नागरिक को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बराबर सुविधाएं हासिल हो रही हैं।
बुनियादी ढांचे का कड़ा सुदृढ़ीकरण: हेवी रेल्स, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और फुल इलेक्ट्रिफिकेशन
किसी भी रेल नेटवर्क पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाना केवल इंजनों को तेज दौड़ाने का खेल नहीं है, बल्कि इसके लिए समूचे ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी कड़ाई के साथ तकनीकी उन्नयन करना अनिवार्य होता है। भारतीय रेलवे इस महा-योजना को सफल और शत-प्रतिशत सुरक्षित बनाने के लिए देश के ‘गोल्डन क्वाड्रिलेटरल’ (स्वर्णिम चतुर्भुज) और उसके डायगोनल रूटों पर बुनियादी ढांचे को अभेद्य मजबूती देने के काम को युद्धस्तर पर पूरा कर रहा है। इसके तहत पुराने कमजोर रेल ट्रैक्स को हटाकर उनकी जगह अत्यधिक वजन और गति सहने वाली ’60 केजी हेवी रेल्स’ पटरियों को बिछाया जा चुका है, साथ ही पटरियों के नीचे लगे स्लीपर्स की डेंसिटी (घनत्व) को भी अपग्रेड किया गया है।
इसके अतिरिक्त, ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए देश के सभी मुख्य रेलवे स्टेशनों और केबिनों को पुराने मैकेनिकल सिग्नलों से मुक्त करके पूरी तरह से अत्याधुनिक ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ और स्वचालित सिग्नलिंग प्रणालियों से लैस कर दिया गया है। देश के शत-प्रतिशत ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का पूर्ण विद्युतीकरण (100% Electrification) भी इस हाई-स्पीड विजन को एक बहुत बड़ी रीढ़ प्रदान कर रहा है, जिससे भारी-भरकम हॉर्सपावर वाले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव इंजनों को पटरियों पर अपनी पूरी आक्रामक क्षमता के साथ दौड़ने की कस्टमाइज्ड पावर हासिल होती है। रेलवे की यह नई आधुनिकीकरण यात्रा वंदे भारत और फ्रेट कॉरिडोर्स (DFCs) के सफल भारतीय मॉडल से सीख लेकर आगे बढ़ रही है।
सुरक्षा तंत्र और कवच (KAVACH) प्रणाली का कड़ा सुरक्षा चक्र, जोखिम प्रबंधन का समाधान
ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों रेल यात्रियों के जीवन की सुरक्षा करना भारतीय रेलवे की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। रेलवे बोर्ड ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर केवल उन्हीं ट्रेनों को दौड़ाया जाएगा जो पूरी तरह से आधुनिक एलएचबी रैक से सुसज्जित होंगी; पुराने आईसीएफ कोचों वाली गाड़ियों को इस हाई-स्पीड श्रेणी में कतई शामिल नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, मानवीय भूलों के कारण होने वाली रेल दुर्घटनाओं को पूरी तरह से रोकने और जोखिम प्रबंधन के स्थाई समाधान के रूप में भारतीय रेल पटरियों और इंजनों पर स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली यानी ‘कवच’ (KAVACH) को बहुत तेजी से इंटीग्रेट किया जा रहा है, जो एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आने की स्थिति में ब्रेक लगाकर उन्हें आपस में टकराने से स्वतः ही बचा लेता है।
इसके अलावा, रेल इंजनों के चालकों (लोको पायलट्स) और ट्रैकों का रखरखाव करने वाले गैंगमैन व तकनीकी कर्मचारियों को भी तेज गति वाली इन ट्रेनों के कस्टमाइज्ड संचालन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण (Specialized Training) संस्थानों में कड़ा अभ्यास कराया जा रहा है। रेल पटरियों के दोनों ओर घने रिहायशी इलाकों और मवेशियों को ट्रैक पर आने से रोकने के लिए कंक्रीट की मजबूत दीवारें (Boundary Walls) भी बनाई जा रही हैं। आर्थिक मोर्चे पर देखा जाए तो ट्रेनों की रफ्तार और समयबद्धता में होने वाला यह ऐतिहासिक सुधार सीधे तौर पर रेलवे के राजस्व (Revenue) को कई गुना ऊंचा उठाएगा, क्योंकि समय की बचत होने से ज्यादा से ज्यादा लोग हवाई या सड़क मार्ग के बजाय सुरक्षित रेल यात्रा को अपनी पहली पसंद बनाएंगे, जिससे देश की समूची अर्थव्यवस्था को एक नई और कड़क गति प्राप्त होगी।
निष्कर्ष: विकसित भारत 2047 के संकल्प की ओर बढ़ते भारतीय रेल के मजबूत कदम
समग्र रूप से देखा जाए तो भारतीय रेलवे द्वारा देश की 400 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को राजधानी एक्सप्रेस की कड़क रफ्तार देने का यह ऐतिहासिक फैसला देश के परिवहन इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर और स्वर्णिम अध्याय साबित होने जा रहा है। यह पहल केवल ट्रेनों की गति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े और दूरदर्शी विजन के तहत आगे बढ़ रहे ‘विकसित भारत 2047’ के उस राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर पूरी प्रामाणिकता के साथ साकार करती है, जहां देश के हर एक नागरिक को तेज, पूरी तरह सुरक्षित, आधुनिक और सबसे सस्ती यात्रा करने का एक मौलिक वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा।
इस महा-योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जहां हमारी तकनीकी टीमें, रेल इंजीनियर और डिस्टिलरी डिपो चौबीसों घंटे अपना कड़ा पसीना बहा रहे हैं, वहीं देश के आम नागरिकों का भी यह राष्ट्रीय कर्तव्य बनता है कि वे रेल यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें, रेल संपत्तियों को नुकसान न पहुंचाएं और पर्यावरण अनुकूल इस हरित परिवहन माध्यम का पूरा सम्मान करते हुए अपनी यात्रा को हमेशा-हमेशा के लिए सुरक्षित और आनंदमयी बनाएं। भारतीय रेल अब नए आसमान को छूने और देश की प्रगति की रफ्तार को कई गुना तेज करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
read more here