Pure Petrol Identification Tips: पेट्रोल में मिलावट से बर्बाद हो सकती है गाड़ी, इन 3 आसान तरीकों से करें शुद्धता की जांच
Pure Petrol Identification Tips: इन 3 आसान तरीकों से जांचें पेट्रोल की शुद्धता
Pure Petrol Identification Tips: देश के कई राज्यों में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और इसी के साथ पेट्रोल पंपों पर तेल में मिलावट करने के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। आम उपभोक्ताओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि ईंधन में पानी, केरोसिन या घटिया स्तर के सॉल्वेंट मिलाए जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ जेब पर डाका पड़ रहा है बल्कि वाहनों के कीमती इंजन भी समय से पहले दम तोड़ रहे हैं। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों ने तीन बेहद सरल और घरेलू उपाय साझा किए हैं, जिनकी मदद से कोई भी आम नागरिक महज कुछ मिनटों में असली और नकली पेट्रोल के अंतर को पकड़ सकता है। इन आसान स्टेप्स को अपनाकर आप अपनी कार और बाइक को किसी बड़े तकनीकी नुकसान से बचा सकते हैं।
ईंधन में मिलावट की बढ़ती खबरों के बीच देश भर के पेट्रोल पंपों पर इन दिनों ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जहां लोग बोतलों में भरे गए पेट्रोल का बदला हुआ रंग दिखाकर हंगामा कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटरों पर अचानक ऐसी गाड़ियों की कतारें लंबी हो गई हैं जिनके प्लग खराब हो चुके हैं या जिनके साइलेंसर से असामान्य रूप से काला या सफेद धुआं निकल रहा है। मैकेनिकों का कहना है कि बीते कुछ हफ्तों में दूषित ईंधन के कारण इंजन सीज होने के दर्जनों मामले सामने आए हैं, जिसने मध्यवर्गीय वाहन मालिकों की चिंता को चरम पर पहुंचा दिया है।
Pure Petrol Identification Tips: ईंधन में मिलावट का खेल आखिर कैसे होता है और इसमें कौन से रसायन मिलाए जाते हैं
जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ बेईमान डीलर पेट्रोल की मात्रा बढ़ाने का अवैध रास्ता चुनते हैं। शुद्ध पेट्रोल के भीतर मुख्य रूप से केरोसिन (मिट्टी का तेल), नेफ्था, औद्योगिक साल्वेंट और कम गुणवत्ता वाले हल्के तेलों का मिश्रण कर दिया जाता है। चूंकि ये रसायन पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ते होते हैं, इसलिए मिलावटखोरों को इसमें बड़ा मार्जिन मिलता है।
इसके अलावा, सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग की जो सीमा तय की गई है, कई बार चोरी-छिपे उससे कहीं ज्यादा मात्रा में एथेनॉल या पानी का मिश्रण कर दिया जाता है। यह मिलावटी ईंधन जब वाहन के कंबशन चैंबर में पहुंचता है, तो वहां पूरी तरह जल नहीं पाता। इसके कारण गाड़ी के इंजन में नॉकिंग की आवाज आने लगती है, पिकअप अचानक गिर जाता है और माइलेज आधा रह जाता है। लंबे समय तक ऐसा ईंधन इस्तेमाल करने से पूरी फ्यूल सप्लाई लाइन ही ब्लॉक हो जाती है।
सफेद कागज का वह जादुई टेस्ट जो पल भर में खोल देता है मिलावट की पूरी पोल
असली और नकली पेट्रोल की जांच करने का सबसे पहला और सटीक तरीका फिल्टर पेपर या एक सादे सफेद कागज के जरिए संभव है। हर पेट्रोल पंप पर नियमानुसार फिल्टर पेपर की व्यवस्था होनी चाहिए और ग्राहक इसकी मांग कर सकते हैं। जांच करने के लिए सफेद कागज या फिल्टर पेपर पर पेट्रोल की दो से तीन बूंदें टपकाएं और करीब दो मिनट तक इंतजार करें।
शुद्ध पेट्रोल की यह खासियत होती है कि वह हवा के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से वाष्पीकृत (उड़) हो जाता है। अगर पेट्रोल पूरी तरह असली है, तो वह कागज से गायब हो जाएगा और वहां सफेदी वैसी ही बनी रहेगी, यानी कोई दाग नहीं दिखेगा। इसके विपरीत, यदि पेट्रोल में केरोसिन, नेफ्था या कोई अन्य तैलीय केमिकल मिलाया गया होगा, तो पेट्रोल उड़ने के बाद भी कागज पर एक गहरा, चिपचिपा या पीले रंग का धब्बा छोड़ जाएगा। यह धब्बा इस बात का सीधा प्रमाण है कि आपको बेचा जा रहा ईंधन शुद्ध नहीं है।
पानी के साथ पेट्रोल का व्यवहार कैसे उजागर कर देता है छुपा हुआ रसायन
दूसरा तरीका रसायन विज्ञान के एक बेहद साधारण नियम पर काम करता है और इसे कांच के एक साफ गिलास की मदद से आजमाया जा सकता है। एक पारदर्शी गिलास में थोड़ा सा पानी लें और उसमें थोड़ा पेट्रोल मिला दें। इसके बाद गिलास को हल्का सा हिलाकर कुछ सेकंड के लिए स्थिर छोड़ दें।
शुद्ध पेट्रोल का घनत्व पानी से कम होता है, जिसके कारण वह पानी में कभी नहीं घुलता और गिलास के ऊपरी हिस्से में अपनी एक अलग और बिल्कुल साफ परत बना लेता है। इस स्थिति में आपको पानी और पेट्रोल की दो अलग-अलग लाइनें साफ दिखाई देंगी। लेकिन, अगर पेट्रोल में एथेनॉल की अत्यधिक मात्रा या कोई अन्य घुलनशील केमिकल मिलाया गया होगा, तो पानी के भीतर एक तीसरी धुंधली परत बनती दिखाई देगी या फिर पेट्रोल और पानी की सीमा रेखा आपस में मिक्स होती हुई नजर आएगी। ऐसी स्थिति दिखने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
रंग और महक की विसंगति से कैसे करें नकली और घातक ईंधन की पहचान
तीसरा तरीका हमारी इंद्रियों यानी देखने और सूंघने की क्षमता पर आधारित है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल को एक खास रंग दिया जाता है, जो आमतौर पर हल्का पीला या हल्का नारंगी-गुलाबीपन लिए हुए होता है। अगर पेट्रोल पंप पर नोजल से निकलने वाला तेल आपको बहुत ज्यादा गहरा, मटमैला, सफेद या धुंधला दिखाई दे, तो समझ जाएं कि इसमें कुछ गड़बड़ है।
इसके साथ ही, असली पेट्रोल की अपनी एक विशिष्ट और तीखी गंध होती है जिससे हर वाहन चालक वाकिफ होता है। लेकिन अगर गाड़ी की टंकी खुलवाते समय या पेट्रोल भरवाते समय आपको उसमें से मिट्टी के तेल (केरोसिन) की महक आए, या फिर पेंट थिनर जैसी अजीब कड़वी गंध महसूस हो, तो यह इस बात का साफ इशारा है कि ईंधन के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की गई है। मिलावटी तेल की यह महक इतनी अलग होती है कि थोड़ी सी सजगता से इसे तुरंत पहचाना जा सकता है।
मिलावट पकड़े जाने पर प्रशासन और तेल कंपनियों से कहां और कैसे करें शिकायत
यदि आपको इन जांचों के दौरान या गाड़ी चलाने के अनुभव से यह पक्का अंदेशा हो जाए कि पेट्रोल में मिलावट की गई है, तो चुप बैठने के बजाय तुरंत इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इसके लिए एक राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1915 जारी किया हुआ है, जिस पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
इसके अलावा, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के अपने खुद के कस्टमर केयर नंबर और शिकायत पोर्टल भी हैं। शिकायत करते समय पेट्रोल पंप का पूरा नाम, पता और तेल भरवाने की रसीद अपने पास जरूर रखें। उपभोक्ता मामलों के कानूनी विशेषज्ञ एडवर्ट कश्यप के मुताबिक, मिलावटी ईंधन बेचना एक दंडनीय अपराध है और शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित पेट्रोल पंप का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।
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