Indian Railway New Logo: भारतीय रेलवे का बदलने जा रहा है लोगो, रेल मंत्रालय ने दी मंजूरी, जानिए क्या है बड़ी वजह
Indian Railway New Logo: भारतीय रेलवे का बदलेगा लोगो, अब दिखेंगे 18 सितारे
Indian Railway New Logo: भारतीय रेल की दशकों पुरानी पहचान में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है, जिसके तहत रेल मंत्रालय ने रेलवे के आधिकारिक लोगो को बदलने की मंजूरी दे दी है। आगामी एक जून से देश की जीवनरेखा कही जाने वाली भारतीय रेलवे का नया प्रतीक चिह्न प्रभावी हो जाएगा, जिसमें मौजूदा सत्रह सितारों की जगह अब अठारह सितारे अपनी चमक बिखेरेंगे। देश में एक नए रेलवे जोन के गठन के बाद प्रशासनिक और भौगोलिक आवश्यकताओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
Indian Railway New Logo: देश की जीवनरेखा को मिलने जा रही है नई पहचान
रेलवे बोर्ड के गलियारों से लेकर देश के कोने कोने में दौड़ने वाली ट्रेनों तक इस समय एक ही चर्चा सबसे ऊपर है कि भारतीय रेल का चेहरा बदलने वाला है। किसी भी बड़े संगठन के लिए उसका लोगो उसकी साख और इतिहास का प्रतीक होता है। भारतीय रेल के मामले में भी यह बात पूरी तरह लागू होती है। वर्तमान में दिखने वाले प्रतीक चिह्न को बदलने का आधिकारिक आदेश जारी हो चुका है। पिछले सप्ताह रेल मंत्रालय के अधीन काम करने वाले रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों को आवश्यक दस्तावेज और निर्देश भेज दिए हैं। एक जून से भारतीय रेल की इस नई पहचान को हर जगह स्थापित कर दिया जाएगा।
दिल्ली के रेल भवन में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस समय नए बदलाव को लेकर तैयारियों का दौर चल रहा है। स्टेशन परिसरों, प्रशासनिक दस्तावेजों, लेटरहेड्स और ट्रेनों के इंजनों पर इस नए प्रतीक चिह्न को लगाने की कवायद शुरू की जा चुकी है। रेल यात्रियों के बीच भी सोशल मीडिया पर इस नए बदलाव को लेकर कौतूहल देखा जा रहा है। लोग इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस प्रतीक चिह्न में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी।
दक्षिण तट रेलवे के गठन के बाद क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव
इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य वजह देश में एक नए रेलवे जोन की शुरुआत होना है। भारत सरकार ने रेलवे के प्रशासनिक ढांचे को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अठारहवें जोन के रूप में दक्षिण तट रेलवे (South Coast Railway) के गठन का फैसला किया था। इस नए जोनल रेलवे का मुख्यालय आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में बनाया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह नया जोन आगामी एक जून से पूरी तरह क्रियाशील यानी फंक्शनल हो जाएगा।
चूंकि भारतीय रेल के लोगो में बने सितारे देश के विभिन्न क्षेत्रीय रेलवे जोन का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए इस नए अठारहवें जोन को सम्मान और पहचान देने के लिए प्रतीक चिह्न में एक नया सितारा जोड़ना अनिवार्य हो गया था। तकनीकी रूप से विजयवाड़ा मुख्यालय वाले दक्षिण तट रेलवे के अस्तित्व में आते ही रेलवे का पुराना सत्रह सितारों वाला लोगो इतिहास का हिस्सा बन जाएगा। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने और प्रशासनिक काम को आसान बनाने के लिए नए जोन बनाए जाते हैं, और लोगो में बदलाव इसी विकास क्रम का एक हिस्सा है।
नौ सितारों से अठारह सितारों तक का सफर और इतिहास
भारतीय रेलवे के प्रतीक चिह्न का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है और यह समय समय पर देश की राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को दर्शाता रहा है। अगर हम इसके विकास क्रम पर नजर डालें, तो साल 2003 से पहले तक रेलवे के इस लोगो के घेरे में केवल नौ सितारे हुआ करते थे। उस दौर में देश के रेल नेटवर्क को नौ प्रमुख जोनों में ही बांटा गया था। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के समय देश में रेलवे का बड़ा विस्तार हुआ और सात नए जोन बनाए गए। इसके साथ ही प्रतीक चिह्न में सितारों की संख्या बढ़कर सोलह हो गई थी।
इतिहास का अगला पड़ाव साल 2010 में आया, जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए मेट्रो रेलवे कोलकाता को एक अलग और स्वतंत्र रेलवे जोन के रूप में मान्यता दे दी। कोलकाता मेट्रो को यह विशेष दर्जा मिलने के बाद रेलवे के लोगो में सितारों की संख्या सत्रह हो गई थी। अब विजयवाड़ा के दक्षिण तट रेलवे के जुड़ने से यह संख्या अठारह तक पहुंच गई है। लोगो के केंद्र में धुआं उड़ाता हुआ पारंपरिक डब्ल्यूजी स्टीम इंजन वैसे ही बरकरार रहेगा, जो रेलवे के गौरवशाली और ऐतिहासिक सफर की याद दिलाता है।
देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और आम जनता पर क्या होगा इसका असर
इस प्रशासनिक फैसले का सीधा असर रेलवे के कामकाज की गति और आम जनता की सुविधाओं पर पड़ने की उम्मीद है। नए जोन के क्रियाशील होने से आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि विजयवाड़ा में मुख्यालय बनने से नई ट्रेनों की शुरुआत, स्टेशनों का आधुनिकीकरण और रेलवे लाइनों के दोहरीकरण जैसे काम स्थानीय स्तर पर ही तेजी से तय हो सकेंगे।
आंध्र प्रदेश के एक स्थानीय रेल उपयोगकर्ता संघ के सदस्य आर. कृष्णमूर्ती का कहना है कि नए जोन के आने से इस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। अब हमें छोटे-छोटे फैसलों के लिए दूसरे राज्यों में स्थित मुख्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके साथ ही, इस पूरे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी संभावना है क्योंकि नए जोन के लिए अलग प्रशासनिक अमले और नई भर्तियों की जरूरत होगी।
Indian Railway New Logo: रेल भवन में शुरू हुई जमीनी स्तर पर बदलाव की तैयारियां
एक जून की समयसीमा को देखते हुए रेलवे के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और प्रिंटिंग प्रेसों को चौबीसों घंटे काम पर लगा दिया गया है। देश के हजारों स्टेशनों पर लगे पुराने बोर्ड, टिकट बुकिंग काउंटरों पर दिखने वाले निशान और रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट्स को अपडेट करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मुख्य प्रशासनिक दस्तावेजों पर तुरंत नया लोगो लागू होगा, जबकि ट्रेनों के डिब्बों और इंजनों पर इसे धीरे धीरे पेंट या स्टिकर के माध्यम से बदला जाएगा ताकि सरकारी खजाने पर अचानक भारी वित्तीय बोझ न पड़े।
इस बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर भी रेल प्रशंसकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग पुराने लोगो वाली ट्रेनों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, तो कुछ लोग नए अठारह सितारों वाले प्रतीक चिह्न के स्वागत के लिए पोस्ट लिख रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बदलाव केवल एक सितारा बढ़ने का नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े परिवहन तंत्र के निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
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