Pune Sex Determination Scam: 12वीं पास व्यक्ति ने चाइनीज डिवाइस से चलाया अवैध रैकेट, 15 हजार तक वसूली, हर महीने 50 महिलाओं की जांच
चाइनीज डिवाइस से 15 हजार तक वसूली, हर महीने 50 महिलाओं की अवैध जांच का खुलासा
Pune Sex Determination Scam: महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक बार फिर महिला सुरक्षा, सामाजिक चेतना और चिकित्सा नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है। जिले की दौंड तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाके में महज 12वीं कक्षा तक पढ़े एक व्यक्ति ने बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री, विशेषज्ञता या लाइसेंस के पोर्टेबल चाइनीज अल्ट्रासाउंड डिवाइस के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध भ्रूण लिंग जांच का धंधा चला रखा था। मुख्य आरोपी अन्नासाहेब गिरी प्रति महिला 5,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक की मोटी फीस वसूल कर यह घिनौना खेल खेल रहा था और जांच के बाद पीड़ित महिलाओं को आगे गैर-कानूनी गर्भपात (Abortion) के लिए अपने नेटवर्क से जुड़े डॉक्टरों के पास सीधे रेफर कर देता था।
स्थानीय यावत पुलिस स्टेशन की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है और इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस संगठित रैकेट से जुड़े पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर एक गुप्त वीडियो वायरल होने के बाद सामने आई यह खौफनाक घटना देश में लिंग अनुपात के असंतुलन, कन्या भ्रूण हत्या और अवैध पोर्टेबल मेडिकल उपकरणों की आसान उपलब्धता जैसी गंभीर समस्याओं को एक बार फिर से राष्ट्रीय बहस और चिंता का मुख्य विषय बना रही है। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे मामले का कड़वा सच, इसकी तकनीकी विसंगतियां और प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा ब्योरा।
आरोपी की शैक्षिक पृष्ठभूमि और अवैध क्लिनिक संचालन का तरीका
इस पूरे अवैध रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड अन्नासाहेब गिरी (42 वर्ष) है, जिसने केवल 12वीं कक्षा तक ही अपनी औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने कुछ समय के लिए बी.फार्मेसी (B.Pharmacy) कोर्स में दाखिला जरूर लिया था, लेकिन पहले ही वर्ष की परीक्षा में बुरी तरह फेल होने के बाद उसने अपनी पढ़ाई हमेशा के लिए छोड़ दी थी। इसके बावजूद, उसने ग्रामीण और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के सामने खुद को एक बड़ा मेडिकल विशेषज्ञ और डॉक्टर की तरह पेश किया और साल 2024 के शुरुआती महीनों से ही इस काली कमाई के धंधे को धड़ल्ले से शुरू कर दिया।
पुणे ग्रामीण पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, आरोपी गिरी हर महीने औसतन 30 से 50 गर्भवती महिलाओं की अवैध रूप से जांच करता था। वह एक बेहद साधारण दिखने वाली और मोबाइल एप्लिकेशन से ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट होने वाली अत्याधुनिक चाइनीज पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस का इस्तेमाल करता था। इस छोटी सी हैंडहेल्ड डिवाइस की स्क्रीन को अपने मोबाइल फोन से जोड़कर वह महिलाओं को उनके गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग बताने का पूरी तरह से झूठा और गैर-कानूनी दावा करता था। इस जांच प्रक्रिया के तुरंत बाद, वह लड़की होने की स्थिति में उन डरे हुए परिवारों को अपने नेटवर्क से जुड़े अन्य निजी डॉक्टरों और क्लीनिकों के पास भेज देता था, जहां मोटी रकम लेकर आगे की अवैध गर्भपात प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता था।
चाइनीज पोर्टेबल डिवाइस की तकनीक और पीसीपीएनडीटी एक्ट का खुला उल्लंघन
इस पूरे घोटाले का सबसे तकनीकी और चौंकाने वाला पहलू आरोपी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वह सस्ती और बिना किसी वैध आयात लाइसेंस के भारतीय ब्लैक मार्केट में बिकने वाली चाइनीज पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन है। यह वायरलेस डिवाइस आकार में इतनी छोटी है कि इसे बेहद आसानी से एक छोटे से बैग में रखकर कहीं भी ले जाया जा सकता था, जिसकी वजह से स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय तक इस अवैध गतिविधि की भनक तक नहीं लगी। यह मशीन सीधे स्मार्टफोन के ब्लूटूथ और एक विशेष चीनी ऐप से कनेक्ट होकर काम करती थी और स्क्रीन पर गर्भ के भीतर के विजुअल्स को सामान्य सोनोग्राफी मशीन की तरह प्रदर्शित करती थी।
देश के वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट और मेडिकल विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ऐसी किसी भी डायग्नोस्टिक डिवाइस का इस्तेमाल बिना रेडियोलॉजी की डिग्री और भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के पंजीकरण के करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रतिबंधित है। यह कृत्य सीधे तौर पर भारत सरकार के ऐतिहासिक पीसीपीएनडीटी एक्ट, 1994 (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) के कड़े नियमों का खुला और सीधा उल्लंघन है। यावत पुलिस ने कार्रवाई के दौरान इस संदिग्ध चाइनीज डिवाइस और आरोपी के मोबाइल फोन को अपने कब्जे में ले लिया है और इसकी विस्तृत तकनीकी व साइबर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया है।
लाखों की फीस का खेल और संगठित नेटवर्क का चौंकाने वाला विस्तार
पुलिस डायरी और जब्त किए गए दस्तावेजों के अनुसार, इस अवैध भ्रूण लिंग जांच के लिए आरोपी महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति और मजबूरी को देखकर 5,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक की नकदी सीधे वसूलता था। यदि किसी परिवार को यह पता चलता था कि गर्भ में लड़की है और वे आगे गर्भपात (अबॉर्शन) कराना चाहते थे, तो उन्हें इस रैकेट के सबसे मुख्य सदस्य और आयुर्वेदिक डॉक्टर अतुल जाधव के पास भेज दिया जाता था, जिसे पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।
इस संगठित गिरोह की जड़ें केवल पुणे तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि आसपास के अन्य जिलों के दो अन्य एलोपैथिक डॉक्टर भी इस समय पुलिस रडार पर हैं जो फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुणे पुलिस इस समय नरेंद्र ठाकरे नाम के एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति की भी सरगर्मी से तलाश कर रही है, जिसने कथित तौर पर चीन से अवैध रूप से इम्पोर्ट करके यह पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस मुख्य आरोपी गिरी को उपलब्ध कराई थी। इन सभी कड़ियों को जोड़ने से यह साफ हो जाता है कि यह किसी एक अयोग्य व्यक्ति का छोटा-मोटा काम नहीं था, बल्कि इसके पीछे डॉक्टरों, बिचौलियों और मेडिकल सप्लायर्स का एक बहुत बड़ा और सुव्यवस्थित संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने खोला इस काले धंधे का राज
इतने महीनों से पर्दे के पीछे चल रहे इस घिनौने लिंग जांच घोटाले का पर्दाफाश किसी आधिकारिक छापे से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर लीक हुए एक खुफिया वीडियो के माध्यम से हुआ। स्थानीय स्तर पर बनाए गए इस वीडियो में आरोपी गिरी को एक ग्रामीण महिला की अवैध रूप से जांच करते और उसके परिवार से पैसों की डील करते हुए साफ तौर पर देखा जा सकता था। जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट और स्थानीय वॉट्सऐप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हुआ, पुणे का स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया और आनन-फानन में यावत पुलिस स्टेशन में एक लिखित आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने बिना कोई समय गंवाए वीडियो में दिख रहे स्थान पर छापेमारी की और मुख्य आरोपी अन्नासाहेब गिरी को रंगे हाथों दबोच लिया। पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में गिरी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए स्वीकार किया कि वह पिछले दो साल से पुणे के विभिन्न दूरदराज के गांवों में घूम-घूम कर यह अवैध रैकेट चला रहा था। वीडियो के सामने आने से पहले ही सैकड़ों बेबस महिलाएं इस गिरोह के झांसे में आकर अपनी और अपने होने वाले बच्चे की जान को गंभीर खतरे में डाल चुकी थीं।
निष्कर्ष
पुणे के दौंड में सामने आया यह गंभीर मामला हमारे आधुनिक होते समाज की एक बेहद कड़वी, संवेदनहीन और दर्दनाक हकीकत को सबके सामने लाकर खड़ा करता है। महज 12वीं पास एक फेल छात्र द्वारा इतने बड़े पैमाने पर चिकित्सा क्षेत्र में घुसकर भ्रूण लिंग जांच का रैकेट चलाना यह साफ दिखाता है कि कड़े कानूनों के बावजूद जमीन पर कड़ाई से मॉनिटरिंग और अवैध पोर्टेबल मेडिकल डिवाइसेज की बिक्री पर नियंत्रण रखना इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है। पुणे ग्रामीण पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की यह त्वरित कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन इस सामाजिक बुराई का परमानेंट अंत तब तक संभव नहीं है जब तक हमारी सामाजिक सोच में बेटियों को लेकर पूरी तरह से बदलाव नहीं आएगा। प्रशासन को इस नेटवर्क की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना होगा ताकि देवभूमि पर किसी अन्य मासूम अजन्मी बेटी की जान इस तरह के अपराधियों के लालच की भेंट न चढ़ सके।
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