CJP Protest Delhi: बांग्लादेश जैसा सत्ता परिवर्तन चाहती है कांग्रेस? प्रशांत भूषण के बयान और BJP के आरोप के बाद बवाल
CJP Protest Delhi: बांग्लादेश जैसा सत्ता परिवर्तन चाहती है कांग्रेस? प्रशांत भूषण के बयान और BJP के आरोप के बाद बवाल
CJP Protest Delhi: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और वोट चोरी के आरोपों से शुरू हुई सियासी लड़ाई अब रेजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन की बहस तक पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर बांग्लादेश जैसे आंदोलन के जरिए सरकार को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। वहीं विपक्ष का कहना है कि उसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में सुधार और लोकतंत्र की रक्षा करना है। प्रशांत भूषण के बयान और नेहा बोरा के बांग्लादेश संदर्भ के बाद विवाद तेज हो गया। राजनाथ सिंह समेत कई भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा। कांग्रेस ने जवाब दिया कि वे चुनाव के जरिए सरकार बदलना चाहते हैं।
प्रशांत भूषण के बयान से शुरू हुआ विवाद
15 अक्टूबर को दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर कथित मनमानी जारी रही तो सत्ता परिवर्तन जरूर होगा। उन्होंने कहा कि नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की मांग करने का अधिकार है। उनके इस बयान को भाजपा ने विपक्ष के आंदोलन के पीछे सत्ता परिवर्तन की मंशा के रूप में पेश किया। भाजपा का दावा है कि विरोध-प्रदर्शनों के जरिए सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। विपक्ष हालांकि इसे लोकतांत्रिक अधिकार बता रहा है।
बांग्लादेश के आंदोलन का क्यों हुआ जिक्र
विवाद में बांग्लादेश का संदर्भ तब जुड़ा जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने 14 अक्टूबर को बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत में दिख रहा जेन-जेड आंदोलन सबसे पहले बांग्लादेश में शुरू हुआ था और वहां के आंदोलन से सीख लेने की जरूरत है। बांग्लादेश में जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन बाद में व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया। पांच अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा। भाजपा ने नेहा बोरा के बयान को भारत में भी इसी तरह के सत्ता परिवर्तन की कोशिश से जोड़ दिया।
राजनाथ सिंह और अन्य भाजपा नेताओं के आरोप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर को कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर युवाओं को अराजकता की राजनीति में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए मोहरा बनाया जा रहा है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रशांत भूषण के बयान का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल मतदाता सूची में सुधार नहीं बल्कि सरकार बदलना है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी विपक्ष पर आंदोलन के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस और सीजेपी पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई निर्णायक सबूत पेश किए जाने की जानकारी नहीं है।
कांग्रेस का जवाब और अभिजीत दीपके का स्पष्टीकरण
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह के आरोपों पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष ने कभी यह छिपाया ही नहीं कि वह चुनाव के जरिए भाजपा सरकार को हराना चाहता है। उन्होंने 1977 के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है। खेड़ा के मुताबिक विपक्ष का लक्ष्य भी इसी संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए सत्ता परिवर्तन करना है। सीजेपी के चीफ अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनके संगठन का उद्देश्य सरकार बदलना नहीं बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनकी जगह निष्पक्ष नियुक्ति की मांग करना है। उन्होंने कहा कि संगठन जवाबदेही चाहता है। सीजेपी एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
एसआईआर से शुरू हुई लड़ाई अब राजनीतिक आरोपों तक पहुंची
इस पूरे विवाद की शुरुआत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध से हुई थी। अब भाजपा इसे सरकार को अस्थिर करने की कोशिश बता रही है जबकि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनाव सुधार की बात कर रहा है। फिलहाल रेजीम चेंज को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। असली सवाल यही है कि राजनीतिक बदलाव की मांग को लेकर चल रहा यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।
प्रशांत भूषण के बयान और बांग्लादेश आंदोलन के संदर्भ के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश का आरोप लगाया। राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने युवाओं को मोहरा बनाने और अस्थिरता फैलाने की बात कही। कांग्रेस ने कहा कि वे चुनाव के जरिए सरकार बदलना चाहते हैं। अभिजीत दीपके ने साफ किया कि उनका लक्ष्य मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना है न कि सरकार बदलना। एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध से शुरू हुआ विवाद अब रेजीम चेंज की बहस तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। आगे का राजनीतिक घटनाक्रम तय करेगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है।
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