Moringa Plant Care Tips: बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं, घर की बालकनी में गमले में उगाएं सहजन का पौधा
घर की बालकनी में गमले में उगाएं सहजन का पौधा, जानें मिट्टी, धूप, पानी और छंटाई का सही तरीका।
Moringa Plant Care Tips: घर की बालकनी या छत पर बागवानी करने के शौकीन लोगों के लिए सहजन यानी मोरिंगा का पौधा लगाना एक बेहद उपयोगी और सेहतमंद विकल्प है। मोरिंगा को प्रकृति का सुपरफूड माना जाता है, क्योंकि इसकी हरी पत्तियों, फूलों और फलियों में भरपूर मात्रा में विटामिन्स, मिनरल्स, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि सहजन एक बड़ा पेड़ बनता है, इसलिए इसे केवल खुले मैदान या बगीचे में ही लगाया जा सकता है। हकीकत यह है कि सही आकार का गमला, उपयुक्त जल निकासी वाली मिट्टी, भरपूर धूप और समय पर छंटाई करके इसे अपार्टमेंट की सीमित बालकनी में भी आसानी से झाड़ीनुमा आकार में हरा-भरा रखा जा सकता है।
Moringa Plant Care Tips: सहजन के पौधे के लिए सही गमले का चयन और जल निकासी
मोरिंगा तेजी से बढ़ने वाला पौधा है और इसकी मूसला जड़ें (Tap Roots) तेजी से गहराई में जाती हैं। इसलिए बालकनी में इसे लगाने के लिए किसी छोटे या उथले बर्तन के बजाय कम से कम 18 से 24 इंच गहरा और उतना ही चौड़ा मजबूत गमला या ग्रो बैग चुनना चाहिए। यदि आप शुरुआत में 12 इंच के गमले में पौधा लगा रहे हैं, तो कुछ ही महीनों में जब पौधा बड़ा होने लगे, तब उसे बड़े कंटेनर में बदलना आवश्यक हो जाएगा ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
गमले के चयन में सबसे महत्वपूर्ण बात उसकी जल निकासी व्यवस्था है। गमले की तली में कम से कम दो से तीन अच्छे निकासी छिद्र होने चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल सके। मोरिंगा की जड़ें पानी के ठहराव को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करती हैं। यदि गमले में पानी जमा रहेगा, तो जड़ों में फंगस लग जाएगी और पौधा सूखने लगेगा। गमले के छेदों पर ठीकरी या बजरी की एक परत बिछाने के बाद ही उसमें मिट्टी भरनी चाहिए।
पौधे के तीव्र विकास के लिए आदर्श पोटिंग मिक्स
सहजन के पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए भुरभुरी, रेतीली और हवादार मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है। अत्यधिक चिकनी या चिपचिपी मिट्टी में पानी रुकता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है। बालकनी के गमले के लिए एक आदर्श पोटिंग मिक्स तैयार करते समय 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत अच्छी तरह पकी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट), और 20 प्रतिशत कोकोपीट या नदी की मोटी रेत मिलानी चाहिए।
मिट्टी के इस मिश्रण में थोड़ी मात्रा में नीम की खली और एक चम्मच लकड़ी की राख मिला देने से मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और फंगस समाप्त हो जाते हैं। यह मिश्रण गमले के वजन को भी हल्का रखता है, जिससे बालकनी पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता और जड़ों को सांस लेने के लिए भरपूर ऑक्सीजन मिलती रहती है।
बीज और नर्सरी के पौधे से रोपाई की सही तकनीक
बालकनी में मोरिंगा उगाने के लिए दो मुख्य तरीके अपनाए जा सकते हैं, जिसमें अच्छी गुणवत्ता वाले संकर बीजों की बुवाई या नर्सरी से तैयार छोटे पौधे को लाकर लगाना शामिल है। यदि आप बीज से शुरुआत कर रहे हैं, तो ‘पीकेएम-1’ या ‘ओडीसी-3’ जैसी वार्षिक और झाड़ीनुमा किस्मों के बीजों का चयन करें जो गमलों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। बुवाई से पूर्व बीजों को लगभग 10 से 12 घंटे के लिए सामान्य पानी में भिगोकर रख दें, जिससे उनका कड़ा छिलका नरम हो जाता है और अंकुरण तेजी से होता है।
बीज को मिट्टी में लगभग एक से डेढ़ इंच की गहराई पर दबाएं और ऊपर से हल्का पानी दें। सामान्यतः सात से दस दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर बाहर आ जाता है। यदि आप नर्सरी से पौधा ला रहे हैं, तो शाम के समय गमले में रोपाई करें ताकि पौधे को नई मिट्टी में स्थापित होने का समय मिल सके और उसकी मुख्य जड़ को कोई नुकसान न पहुंचे।
धूप की आवश्यकता और पानी देने का सही नियम
मोरिंगा मूल रूप से उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा है, जिसे अपनी पत्तियों में भोजन बनाने और तेजी से बढ़ने के लिए भरपूर सीधी धूप की आवश्यकता होती है। बालकनी में गमले को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां प्रतिदिन कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप आती हो। कम धूप या घनी छाया वाली जगह पर रखने से पौधे का तना पतला और कमजोर हो जाता है और पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगती हैं।
सिंचाई के मामले में मोरिंगा को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। गमले में पानी तभी दें जब मिट्टी की ऊपरी दो इंच की सतह पूरी तरह सूखी महसूस हो। गर्मियों के दिनों में जहां रोजाना हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है, वहीं सर्दियों और बारिश के मौसम में सप्ताह में केवल एक या दो बार पानी देना ही पर्याप्त होता है। आवश्यकता से अधिक पानी देना सहजन के पौधे के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है।
छंटाई और पिंचिंग से पौधे को बनाएं घना
सहजन प्राकृतिक रूप से सीधा ऊपर की ओर बढ़ता है। बालकनी की सीमित ऊंचाई में इसे एक सुंदर, घना और झाड़ीनुमा रूप देने के लिए छंटाई (Pruning) करना बेहद आवश्यक कदम है। जब पौधा लगभग तीन फीट की ऊंचाई तक पहुंच जाए, तो उसके मुख्य तने के ऊपरी सिरे की दो से तीन इंच की हल्की छंटाई (Pinching) कर दें। ऐसा करने से मुख्य तने की सीधी बढ़त रुक जाती है और नीचे से कई नई हरी शाखाएं निकलने लगती हैं।
जैसे-जैसे नई शाखाएं बड़ी हों, समय-समय पर उनकी पत्तियों की कटाई घर में इस्तेमाल के लिए करते रहें। लगातार पत्तियों की तुड़ाई और हल्की छंटाई से पौधा बालकनी की छत से नहीं टकराएगा, तना मोटा होगा और आपको सालभर ताजी, पोषण से भरपूर हरी पत्तियां मिलती रहेंगी। छंटाई के लिए हमेशा तेज और साफ कैंची या प्रूनर का उपयोग करना चाहिए।
Moringa Plant Care Tips: जैविक खाद प्रबंधन और कीटों से सुरक्षा के उपाय
गमले की सीमित मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी न हो, इसके लिए हर महीने या 40 दिन के अंतराल पर पौधे की हल्की गुड़ाई करके दो मुट्ठी वर्मीकंपोस्ट या गोबर की खाद देनी चाहिए। पत्तियों की शानदार हरी रंगत और बेहतर विकास के लिए महीने में एक बार सीवीड लिक्विड फर्टिलाइजर का छिड़काव या छाछ (मट्ठा) को पानी में मिलाकर जड़ों में देना भी बहुत लाभकारी सिद्ध होता है।
सहजन के पौधे पर कभी-कभी माहू (एफिड्स), सफेद मक्खी या कैटरपिलर का हमला हो सकता है। किसी भी रासायनिक कीटनाशक के प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि इसकी पत्तियों और फलियों का उपयोग सीधे भोजन में किया जाता है। कीटों से बचाव के लिए 5 मिलीलीटर नीम के तेल को एक लीटर पानी में दो बूंद लिक्विड सोप के साथ मिलाकर हर 15 दिन में पौधे पर अच्छी तरह स्प्रे करना चाहिए। नियमित देखभाल और सही पोषण मिलने पर यह साधारण सा पौधा आपकी बालकनी में संजीवनी की तरह लहलहाता रहेगा।
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