PM Modi Statement on Iran War: UAE पर ईरान का हमला, 3 भारतीय घायल, PM मोदी ने की कड़ी निंदा, क्षेत्रीय शांति पर भारत की नजर

फुजैराह तेल केंद्र पर हमला, PM मोदी की कड़ी निंदा, भारत ने कहा- नागरिकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य

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PM Modi Statement on Iran War: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में यूएई के प्रमुख तेल केंद्र फुजैराह को निशाना बनाया गया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। दुखद बात यह है कि इस घटना में तीन भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे नागरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के खिलाफ बताया है।

हमले की पूरी घटना क्या?

यूएई के अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन को निशाना बनाते हुए 15 मिसाइलें और 4 ड्रोन दागे। हालांकि यूएई के एयर डिफेंस ने अधिकांश खतरों को विफल कर दिया, लेकिन एक ड्रोन तेल संयंत्र तक पहुँचने में सफल रहा। इसके परिणामस्वरूप फुजैराह तेल डिपो में भीषण आग लग गई। यह क्षेत्र हॉर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित होने के कारण वैश्विक तेल व्यापार के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारतीयों की वर्तमान स्थिति क्या?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस हमले की चपेट में आने से तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। भारतीय दूतावास ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क साधा। राहत की बात यह है कि तीनों घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें उचित चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। दूतावास की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए है और उनके परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले को पूरी तरह से “अस्वीकार्य” करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। पीएम ने ट्वीट कर यूएई के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त की और शांतिपूर्ण कूटनीतिक समाधान की अपील की। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए हॉर्मुज स्ट्रेट जैसे जलमार्गों की सुरक्षा को अनिवार्य बताया।

भारत-यूएई संबंध कितने महत्वपूर्ण?

यूएई में लगभग 40 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और विकास में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। इसके अलावा, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यूएई से आयात करता है। दोनों देशों के बीच हुए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) ने इन रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। ऐसे में यूएई की सुरक्षा और स्थिरता सीधे तौर पर भारत के सामरिक और आर्थिक हितों से जुड़ी हुई है।

क्षेत्रीय तनाव का कारण क्या?

यह हमला ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे लंबे विवाद का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में हुए सीजफायर के बावजूद ईरान की इस कार्रवाई ने क्षेत्र में अस्थिरता का नया दौर शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, उसे बाधित करने की कोशिशें वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। यूएई में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से फोन पर बात कर सुरक्षा स्थिति और शांति बहाली पर चर्चा की है। भारत इस समय ईरान और यूएई दोनों के साथ संतुलित कूटनीतिक संवाद बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर?

फुजैराह जैसे प्रमुख तेल निर्यात केंद्र पर हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। भारत अपनी घरेलू तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों और सामरिक तेल भंडार (Strategic Reserves) के प्रबंधन पर विचार कर रहा है। सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठा रही है ताकि क्षेत्रीय शांति बहाल हो सके और वैश्विक व्यापार मार्ग सुरक्षित बने रहें।

PM Modi Statement on Iran War: निष्कर्ष

मध्य पूर्व की वर्तमान नाजुक स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यूएई के साथ भारत की यह एकजुटता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों में भी भारत की भूमिका को अहम बनाएगी। फिलहाल, पूरा विश्व इस उम्मीद में है कि बातचीत के जरिए इस तनाव को जल्द से जल्द कम किया जा सकेगा।

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