कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति Parakala Prabhakar, नोटबंदी की आलोचना से SIR के विरोध तक

कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति Parakala Prabhakar, नोटबंदी की आलोचना से SIR के विरोध तक

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Parakala Prabhakar: निर्मला सीतारमण केंद्र सरकार में वित्त मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं, जबकि उनके पति परकला प्रभाकर कई बार सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में उन्होंने 23 अक्टूबर 2026 को ‘पीपुल्स मार्च टू रिस्टोर डेमोक्रेसी’ में शामिल होने की बात कही है। यह मार्च चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में निकाला जा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। प्रभाकर का राजनीतिक और वैचारिक सफर जेएनयू से लंदन तक और कांग्रेस से भाजपा व प्रजा राज्यम पार्टी तक फैला है।

परकला प्रभाकर की पढ़ाई और निर्मला सीतारमण से मुलाकात कैसे हुई?

परकला प्रभाकर ने विजयवाड़ा के आंध्र लोयोला कॉलेज से बीए किया। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमए और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। आगे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स गए और 1991 में लंदन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल की। जेएनयू में उनकी मुलाकात निर्मला सीतारमण से हुई। दोनों ‘फ्रीथिंकर्स’ नाम के समूह से जुड़े थे, जहां अलग-अलग राजनीतिक विचारों पर चर्चा होती थी। इसी दौरान दोनों करीब आए और 12 सितंबर 1986 को शादी कर ली। शादी के बाद वे लंदन चले गए। वहां प्रभाकर ने पीएचडी की, जबकि निर्मला सीतारमण ने कुछ समय डेकोर की दुकान में काम किया और बाद में प्राइसवाटरहाउसकूपर्स में पूर्वी यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं पर रिसर्च करने लगीं।

हैदराबाद लौटने के बाद उन्होंने क्या किया?

1990 के दशक की शुरुआत में बेटी के जन्म के बाद परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण हैदराबाद और नरसापुर लौट आए। उनकी बेटी इकलौती संतान हैं। हैदराबाद में प्रभाकर ने मार्केटिंग रिसर्च एजेंसी शुरू की। उन्होंने अपने पिता की याद में एक ट्रस्ट भी बनाया। इसके अलावा दोनों ने मिलकर ‘प्रणव’ नाम से एक स्कूल की शुरुआत की। प्रभाकर का परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है। उनकी मां कांग्रेस की विधायक थीं, जबकि पिता परकला शेषावतारम 1970 के दशक में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे थे।

उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा?

परकला प्रभाकर ने 1994 में कांग्रेस के टिकट पर आंध्र प्रदेश की नरसापुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से उनके करीबी संबंध बने। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। साल 2008 में वे अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी के साथ प्रजा राज्यम पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। हालांकि, बाद में पार्टी से निराश होकर उन्होंने दूरी बना ली। 2014 से 2018 तक वे आंध्र प्रदेश सरकार में कम्युनिकेशन कंसल्टेंट रहे और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था। फिलहाल वे हैदराबाद स्थित कंपनी राइटफोलियो के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

नोटबंदी और बेरोजगारी पर उन्होंने क्या आलोचना की है?

सितंबर 2023 में अपनी किताब ‘द क्रुक्ड टिम्बर ऑफ न्यू इंडिया’ के बारे में बताते हुए प्रभाकर ने नोटबंदी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर नोटबंदी से सुशासन को कोई फायदा हुआ होता, तो केंद्र सरकार इसकी उपलब्धियों का जमकर प्रचार करती। उन्होंने कहा कि कारोबारी काला धन नकद रखने के बजाय जमीन और प्रॉपर्टी में लगाते हैं, ऐसे में नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगाने का दावा सही नहीं लगता। जनवरी 2024 में मंगलुरु में एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि भारत में बेरोजगारी दर 24 प्रतिशत है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। उन्होंने रेलवे में 35 हजार गैर-तकनीकी पदों के लिए 1.25 करोड़ से ज्यादा आवेदनों का उदाहरण दिया। नवंबर 2023 में उन्होंने कहा कि निजी निवेश घटा है, आर्थिक असमानता बढ़ी है और न्यू इंडिया में लोकतंत्र को सिर्फ हर पांच साल में होने वाले चुनाव तक सीमित कर दिया गया है।

एसआईआर विरोध और यूट्यूब चैनल से उनका क्या जुड़ाव है?

21 अक्टूबर 2026 को प्रभाकर ने एक्स पर लिखा कि 23 अक्टूबर को लोकतंत्र की बहाली के लिए जन मार्च है। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर एसआईआर प्रक्रिया खत्म करने की मांग करने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। उनका यूट्यूब चैनल ‘मिडवीक मैटर्स’ भी काफी फेमस है, जहां वे देश के मौजूदा हालात पर चर्चा करते हैं। इस चैनल पर करीब 58 हजार सब्सक्राइबर हैं। वे समसामयिक मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं और अपनी बेबाक राय रखते हैं।

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