Neha Bora CJP Protest: नेहा बोरा ने खुद को CJP प्रोटेस्ट से किया अलग, हाई कोर्ट में कहा- वह दूसरे संगठन ने बुलाया था
Neha Bora CJP Protest: नेहा बोरा ने खुद को CJP प्रोटेस्ट से किया अलग, हाई कोर्ट में कहा- वह दूसरे संगठन ने बुलाया था
Neha Bora CJP Protest: दिल्ली हाई कोर्ट में लेफ्ट छात्र संगठन AISA की स्टूडेंट लीडर नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई हुई। उन्होंने दिल्ली पुलिस के नोटिस को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान नेहा बोरा ने कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया। उनके वकील ने कोर्ट में साफ किया कि वे सेंट्रल पार्क में अलग से बुलाए गए आह्वान में शामिल नहीं थीं। वह आह्वान किसी दूसरे संगठन ने दिया था और नेहा बोरा उससे जुड़ी नहीं हैं। वे मंडी हाउस में अपनी मीटिंग से निपट रही थीं।
Neha Bora CJP Protest: नेहा बोरा ने हाई कोर्ट में क्या कहा?
नेहा बोरा की ओर से सीनियर एडवोकेट शंकरनारायणन ने कोर्ट में कहा कि वे एक बात साफ करना चाहते हैं। नेहा बोरा एक अलग कॉल में शामिल नहीं हैं। सेंट्रल पार्क में जो आह्वान दिया गया था, उसे किसी दूसरे संगठन ने बुलाया था। वे उससे जुड़ी नहीं हैं और उसमें शामिल नहीं हैं। वे मंडी हाउस में मीटिंग करने के अपने ही कॉल से निपट रही हैं। वकील ने यह भी कहा कि यह बहुत छोटा मामला है। यह एक नोटिस के बारे में है, जो कथित तौर पर बीएनएसएस के सेक्शन 126 और 130 के तहत जारी किया गया है। नेहा बोरा AISA नाम के संगठन की लीडर हैं।
पुलिस के नोटिस को उन्होंने क्यों चुनौती दी?
नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि उन्हें तिरंगा फहराने के लिए परमिशन की जरूरत नहीं है। उन्होंने पुलिस के “पीस” बॉन्ड भरने के नोटिस को चुनौती दी है। उनके वकील के अनुसार, पुलिस ने बीएनएसएस की धाराओं के तहत नोटिस जारी किया है और वे इस नोटिस के खिलाफ याचिका लेकर कोर्ट पहुंची हैं। मामला मुख्य रूप से इस नोटिस और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर है। कोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि वे किसी दूसरे संगठन के आह्वान से जुड़े नहीं हैं और अपनी अलग गतिविधि से निपट रही थीं।
CJP प्रोटेस्ट से खुद को अलग करने का क्या मतलब है?
सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से यह साफ किया गया कि वे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में बुलाए गए उस आह्वान में शामिल नहीं थीं, जिसे दूसरे संगठन ने दिया था। उनके वकील ने जोर देकर कहा कि वे उस कॉल से जुड़ी नहीं हैं। वे मंडी हाउस में अपनी मीटिंग कर रही थीं। इस बयान से कोर्ट के सामने यह स्थिति रखी गई कि उनकी गतिविधि और दूसरे संगठन के प्रोटेस्ट कॉल को अलग-अलग समझा जाए। नेहा बोरा AISA की लीडर हैं और उनका मामला पुलिस नोटिस को चुनौती देने तक सीमित बताया गया।
कोर्ट में मामले को कैसे पेश किया गया?
नेहा बोरा की याचिका दिल्ली पुलिस के नोटिस के खिलाफ है। वकील ने कोर्ट में कहा कि यह बहुत छोटा मामला है और यह सिर्फ एक नोटिस के बारे में है। नोटिस कथित रूप से बीएनएसएस के सेक्शन 126 और 130 के तहत जारी किया गया है। नेहा बोरा ने तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत न होने की बात कही और पीस बॉन्ड भरने के नोटिस को चुनौती दी। कोर्ट में उनकी ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि वे किसी दूसरे संगठन के सेंट्रल पार्क वाले आह्वान में शामिल नहीं थीं।
आगे की सुनवाई और स्थिति क्या है?
दिल्ली हाई कोर्ट में नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई चल रही है। इसमें उन्होंने पुलिस नोटिस को चुनौती दी है और साथ ही दूसरे संगठन के प्रोटेस्ट कॉल से खुद को अलग किया है। वकील ने साफ किया कि वे मंडी हाउस में अपनी मीटिंग से निपट रही थीं। मामला फिलहाल कोर्ट के समक्ष है और आगे की सुनवाई में नोटिस की वैधता और संबंधित धाराओं पर बहस हो सकती है। नेहा बोरा AISA की स्टूडेंट लीडर हैं और उनका रुख है कि तिरंगा फहराने के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं है।
Read More Here:-
The Paradise OTT Release: नानी की फिल्म से हटाए गए 24 मिनट, सोनाली कुलकर्णी के डांस पर भी चली कैंची
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखती हैं महिलाएं चांद और पति का चेहरा?
बार-बार फोन की नोटिफिकेशन चेक करना सिर्फ आदत या एंग्जायटी का संकेत? जानें एक्सपर्ट की राय