दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 92 भारत के, जानें 2026 में भीषण गर्मी के असली कारण और बचाव के उपाय
2026 की भीषण गर्मी के पीछे अल नीनो और हीट डोम का हाथ; 55% भारत हाई रिस्क जोन में।
Heatwave India: इस साल भारत में गर्मी ने हर पिछला रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है। AQI.in के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 92 भारत में हैं और टॉप 20 में 19 भारतीय शहर शामिल हैं। हीट डोम, अल नीनो, अर्बन हीट आइलैंड और जलवायु परिवर्तन मिलकर इस संकट को और गहरा बना रहे हैं। भारत के 55 प्रतिशत हिस्से पर हाई हीट रिस्क का खतरा मंडरा रहा है।
Heatwave India: इस साल गर्मी इतनी भीषण क्यों है, जो पहले कभी नहीं थी
जब अप्रैल में ही पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने लगे तो समझिए कि यह सामान्य गर्मी नहीं है। भारतीय मौसम विभाग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि इस बार मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक रहेगा।
AQI.in के आंकड़े बताते हैं कि टॉप 20 सबसे गर्म स्थानों में से 19 भारत में हैं। बिहार का भागलपुर, ओडिशा का तालचेर और पश्चिम बंगाल का आसनसोल इस सूची में सबसे आगे हैं जहां तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
Heatwave India: हीट डोम क्या होता है और यह कैसे तापमान बढ़ाता है
अगर आपने कभी किसी बर्तन को ढककर गैस पर रखा हो तो समझिए हीट डोम भी ठीक उसी तरह काम करता है। वायुमंडल में उच्च दबाव का एक क्षेत्र बनता है जो एक अदृश्य ढक्कन की तरह काम करता है और गर्म हवा को ऊपर उठने से रोककर जमीन के पास ही कैद कर लेता है।
इस प्रक्रिया में तापमान तेजी से और लगातार बढ़ता रहता है। जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार हीट डोम की घटनाएं अब पहले की तुलना में अधिक लंबे समय तक बनी रहती हैं और यही वजह है कि एक बार गर्मी पड़ने के बाद राहत मिलने में ज्यादा वक्त लग रहा है।
Heatwave India: अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का मेल कितना खतरनाक है
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि अल नीनो और ला नीना अब जलवायु संकट के साथ मिलकर मौसम के पूरे पैटर्न को बदल रहे हैं। NOAA और ECMWF के आकलन के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो बनने की संभावना 62 प्रतिशत है और अगस्त से अक्टूबर के बीच यह बढ़कर 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो पिछले डेढ़ दशक से धरती का औसत तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ है। 2026 में यह वृद्धि 1.44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई है और विशेषज्ञ मान रहे हैं कि 2027 में यह पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी।
Heatwave India: शहरों में रातें भी गर्म क्यों हो रही हैं और इसे क्या कहते हैं
पहले गर्मी दिन में पड़ती थी और रात होते ही राहत मिल जाती थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। कंक्रीट की इमारतें और डामर की सड़कें दिन भर सूरज की गर्मी सोखती हैं और रात में उसे धीरे-धीरे छोड़ती हैं, जिससे रातें भी गर्म रहती हैं।
मौसम विज्ञान की भाषा में जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो तो उसे ‘सीवियर वार्म नाइट’ कहा जाता है। 2025 की एक मॉडलिंग स्टडी के अनुसार 2015 से 2100 के बीच गर्म रातें हर दशक में 10 से 13 दिन और बढ़ सकती हैं।
Heatwave India: गर्म रातों से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दिन की गर्मी के बाद रात में शरीर को ठंडा होने और ठीक होने का मौका मिलता है। लेकिन जब रातें भी गर्म रहती हैं तो यह प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया बाधित हो जाती है और शरीर पर दोहरा बोझ पड़ता है।
इससे डिहाइड्रेशन, नींद न आना, उच्च रक्तचाप, थकान, चिड़चिड़ापन और हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। साल 1998 से 2017 के बीच दुनियाभर में करीब 1.66 लाख लोगों की मौत हीटवेव से हुई थी और भारत में 2023 में अकेले 48,000 हीटस्ट्रोक के मामले और 159 मौतें दर्ज की गई थीं।
Heatwave India: भारत के कितने जिले हाई हीट रिस्क जोन में हैं
CEEW की 2025 की जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार भारत के 734 जिलों में से 417 जिले यानी आधे से भी ज्यादा जिले हाई या वेरी हाई हीट रिस्क जोन में आ चुके हैं। इसका मतलब यह है कि देश की आधी से अधिक आबादी भीषण गर्मी के सीधे खतरे में है।
भारत का 55 प्रतिशत भू-भाग हाई हीट रिस्क की श्रेणी में आ चुका है। CSE की रिपोर्ट चेताती है कि 2030 तक ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत के कुल कार्य घंटों में से 5.8 प्रतिशत की हानि होने का अनुमान है जो आर्थिक नुकसान के लिहाज से बेहद गंभीर है।
Heatwave India: गर्मी से बचने के लिए आम नागरिक क्या कर सकते हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। पानी और तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
घरों में खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगाएं ताकि सूरज की गर्मी अंदर कम आए। पेड़ लगाना, छत पर सफेद रंग का पेंट करना और आसपास हरियाली बढ़ाना लंबे समय में तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
निष्कर्ष
भारत में भीषण गर्मी अब केवल मौसमी असुविधा नहीं रही, यह एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य और आर्थिक संकट बन चुकी है। हीट डोम, अल नीनो और अर्बन हीट आइलैंड का यह खतरनाक मेल आने वाले वर्षों में और विकराल रूप लेगा। जरूरत है कि सरकार, नागरिक समाज और हर व्यक्ति मिलकर हरियाली बढ़ाने, कंक्रीट पर निर्भरता घटाने और जलवायु अनुकूल जीवनशैली अपनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। गर्मी से लड़ाई अकेले नहीं जीती जा सकती, यह सामूहिक जिम्मेदारी है।
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