Osteoporosis in Men: सिर्फ महिलाओं को नहीं, पुरुषों को भी कमजोर बना सकती है हड्डियों की यह बीमारी, जानें कारण और बचाव
ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ महिलाओं की बीमारी नहीं है। पुरुषों में भी उम्र, हार्मोनल बदलाव और पोषक तत्वों की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। जानें लक्षण, बचाव और DEXA स्कैन की अहमियत।
Osteoporosis in Men: हड्डियों के धीरे-धीरे खोखले और कमजोर होने की स्थिति यानी ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर केवल महिलाओं, विशेष रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद की समस्या मान लिया जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह धारणा पूरी तरह भ्रामक और खतरनाक है, क्योंकि पुरुष भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व (बोन मिनरल डेंसिटी) और सूक्ष्म ढांचा तेजी से क्षीण होने लगता है, जिससे हड्डियां कांच की तरह भुरभुरी हो जाती हैं। इसे ‘साइलेंट किलर’ या खामोश बीमारी इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसमें न कोई दर्द होता है और न ही कोई स्पष्ट चेतावनी। अधिकांश पुरुषों को इस बीमारी का पता तब चलता है जब सामान्य ठोकर लगने, खांसने या बिस्तर से झुकने जैसी मामूली क्रिया में कलाई, कूल्हे (हिप) या रीढ़ की हड्डी टूट जाती है।
Osteoporosis in Men: पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस को नजरअंदाज करने के मुख्य कारण
समाज में यह सामान्य मान्यता है कि पुरुषों का कंकाल ढांचा महिलाओं की तुलना में अधिक भारी और सघन होता है, इसलिए उन्हें हड्डियों के क्षरण का खतरा नहीं होता। यद्यपि यह सच है कि युवावस्था में पुरुषों में हड्डियों का पीक मास अधिक होता है और उनमें महिलाओं की तरह एस्ट्रोजन में अचानक आने वाली तीव्र गिरावट नहीं देखी जाती, किंतु उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की हड्डियों के पुनर्चक्रण (बोन रीमॉडलिंग) की गति भी धीमी हो जाती है।
पहचान में देरी की सबसे बड़ी वजह नियमित जांच का अभाव और पुरुषों में स्वास्थ्य समस्याओं को दबाने की प्रवृत्ति है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और अंतरराष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, पचास वर्ष से अधिक उम्र के लगभग पांच में से एक पुरुष अपने जीवनकाल में ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर का शिकार होता है। चिंताजनक तथ्य यह भी है कि कूल्हे के फ्रैक्चर के बाद पुरुषों में मृत्यु दर और स्थायी दिव्यांगता का जोखिम महिलाओं की तुलना में अधिक पाया जाता है, क्योंकि अक्सर उनमें इसका निदान बहुत देर से होता है।
पुरुषों की हड्डियां कमजोर होने के प्रमुख जैविक और चिकित्सकीय कारण
बढ़ती उम्र के अलावा पुरुषों में हड्डियों के घनत्व में गिरावट आने के कई ठोस चिकित्सकीय कारण होते हैं, जिनका समय पर आकलन आवश्यक है:
पुरुषों में हड्डियों के निर्माण और उनकी मजबूती को बनाए रखने में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की केंद्रीय भूमिका होती है। उम्र बढ़ने के साथ या हाइपोगोनेडिज्म (हार्मोनल ग्रंथि विकार) के कारण जब टेस्टोस्टेरोन का स्तर असामान्य रूप से कम हो जाता है, तो हड्डियों का पुनर्विकास रुक जाता है और क्षरण तेज होने लगता है।
खानपान में लंबे समय तक कैल्शियम और विटामिन डी का अभाव हड्डियों को भीतर से सोख लेता है। कैल्शियम हड्डियों का मुख्य घटक है, जबकि विटामिन डी आंतों से कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए अनिवार्य है। गतिहीन जीवनशैली, डेस्क जॉब और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण हड्डियों पर जरूरी भार (मैकेनिकल लोड) नहीं पड़ता, जिससे उनकी मजबूती घटती है।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हड्डियों की नई कोशिकाओं (ओस्टियोब्लास्ट्स) को सीधे नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा, अस्थमा, गठिया या त्वचा विकारों में लंबे समय तक ओरल कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं का सेवन, प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में दी जाने वाली एंड्रोजन डिप्राइवेशन थेरेपी (ADT), थायरॉइड का अति-सक्रिय होना, सीलिएक रोग और क्रोनिक किडनी रोग हड्डियों के घनत्व को तेजी से समाप्त करते हैं।
पचास साल के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा? इन संकेतों को पहचानें
पचास से साठ वर्ष की आयु के बाद हड्डियों के क्षरण की गति उनके निर्माण की गति से अधिक तेज हो जाती है। इस उम्र में पुरुषों को अपने शरीर में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। यदि जमीन पर सपाट फिसलने से कलाई या कूल्हे की हड्डी में हेयरलाइन या गंभीर फ्रैक्चर हो जाए, तो इसे सामान्य चोट न मानकर हड्डियों की कमजोरी का पहला संकेत समझना चाहिए।
इसके अलावा, रीढ़ की कशेरुकाओं (वर्टिब्रा) में सूक्ष्म फ्रैक्चर होने पर लगातार पीठ या कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है। समय के साथ शरीर की प्राकृतिक लंबाई में एक से दो इंच तक की कमी आना, कंधे आगे की ओर झुकना या पीठ में कुबड़ापन (काइफोसिस) विकसित होना रीढ़ की हड्डियों के संपीड़न फ्रैक्चर (वर्टिब्रल कम्प्रेशन) का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को केवल बुढ़ापे का सामान्य असर मानकर टालना रीढ़ की स्थायी क्षति का कारण बन सकता है।
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव और हड्डियों को मजबूत रखने के वैज्ञानिक उपाय
हड्डियों के नुकसान को धीमा करने और नई हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए दैनिक जीवनशैली में ठोस बदलाव लाना अनिवार्य है। खानपान में दूध, गाढ़ा दही, पनीर, रागी, सोयाबीन, तिल, बादाम और हरी पत्तेदार सब्जियों को नियमित स्थान दें ताकि शरीर को प्रतिदिन आवश्यक 1,000 से 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम मिल सके।
शरीर में विटामिन डी के पर्याप्त स्तर के लिए सुबह की हल्की धूप में बैठना और चिकित्सकीय परामर्श से विटामिन डी3 के सप्लीमेंट्स का उपयोग करना चाहिए। हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने के लिए ‘वेट-बेयरिंग’ और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज सबसे असरदार साबित होती हैं। तेज गति से टहलना, सीढ़ियां चढ़ना, हल्की जॉगिंग और शरीर की क्षमतानुसार हल्के डंबल उठाना हड्डियों की कोशिकाओं को मजबूत ढांचा बनाए रखने का संदेश देता है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब से पूर्ण दूरी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी है।
Osteoporosis in Men: डेक्सा (DEXA) स्कैन से फ्रैक्चर के खतरे पर नियंत्रण
पचास वर्ष से अधिक आयु के वे पुरुष जिनमें फ्रैक्चर का पारिवारिक इतिहास रहा हो, जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हों, या जिन्हें कमर दर्द और हार्मोनल असंतुलन की शिकायत हो, उन्हें बिना देर किए ‘डेक्सा स्कैन’ (DEXA – डुअल एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पियोमेट्री) कराना चाहिए। यह एक त्वरित, दर्द रहित और सटीक एक्स-रे आधारित परीक्षण है जो रीढ़ और कूल्हे की हड्डियों के टी-स्कोर (T-score) को मापता है।
यदि जांच में ऑस्टियोपेनिया (हड्डियों के क्षरण की प्रारंभिक अवस्था) या पूर्ण ऑस्टियोपोरोसिस पाया जाता है, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार बिस्फोस्फोनेट्स, टेरीपैराटाइड या अन्य लक्षित दवाओं के जरिए हड्डियों के क्षरण को रोकते हैं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर पुरुष इस खामोश बीमारी से अपनी हड्डियों की सुरक्षा कर सकते हैं और बुढ़ापे में भी एक सक्रिय, आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
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