Vaibhav Suryavanshi: ‘कोई दबाव नहीं था…’, आलोचकों को बल्ले से जवाब देने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने लूटी महफिल
श्रीलंका ए के खिलाफ तूफानी पारी, भारत ए चैंपियन; बिहार के लाल ने लूटी महफिल
Vaibhav Suryavanshi: भारतीय क्रिकेट के घरेलू और जूनियर सर्किट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सनसनी मचाने वाले उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी अद्भुत क्लास का मुजाहिरा किया है। श्रीलंका ए के खिलाफ खेले गए त्रिकोणीय श्रृंखला (Try-Series) के हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में वैभव ने विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए महज 29 गेंदों पर 94 रनों की एक ऐसी आतिशी और तूफानी पारी खेली, जिसने न सिर्फ भारत ए को चैंपियन बनाया बल्कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तकनीक और व्यवहार पर सवाल उठाने वाले तमाम आलोचकों का मुंह भी पूरी कड़ाई से बंद कर दिया। इस ऐतिहासिक खिताबी मुकाबले के बाद जब मीडिया ने उनसे दबाव को लेकर सवाल पूछा, तो इस युवा बल्लेबाज ने बेहद परिपक्वता के साथ मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ‘मैदान पर मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था’। उनके इस बेबाक बयान और कातिलाना बल्लेबाजी ने समूचे क्रिकेट जगत और खेल प्रेमियों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया है।
दांबुला फाइनल का पूरा सांख्यिकीय आलेख: 29 गेंदें, 10 चौके और 8 गगनचुंबी छक्के
श्रीलंका के दांबुला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस फाइनल मैच के रणनीतिक विनिर्देशों पर यदि दृष्टिपात करें, तो टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत ए टीम को सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने रिकॉर्ड तोड़ शुरुआत दिलाई। उन्होंने क्रीज पर आते ही श्रीलंकाई पेसर्स और स्पिनरों के खिलाफ अपनी नेचुरल आक्रामक स्टाइल में खेलना शुरू किया और मैदान के चारों कोनों में चौके-छक्कों की बरसात कर दी। वैभव ने अपनी 94 रनों की कड़क पारी के दौरान महज 29 गेंदों का सामना करते हुए 10 शानदार चौके और 8 भीमकाय गगनचुंबी छक्के जड़े, जिससे टीम का कुल स्कोर निर्धारित ओवरों में 377 रनों के विशालकाय पर्वत तक पहुंच गया।
इस आतिशी पारी के प्रभाव से विरोधी टीम का बॉलिंग अटैक पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया और उनके हौसले पस्त हो गए। मैच के बाद कमेंट्री बॉक्स से जुड़े पूर्व दिग्गज खिलाड़ी संजय मांजरेकर सहित कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समीक्षकों ने वैभव की इस पावर-हिटिंग और कस्टमाइज्ड आक्रामक क्रिकेट प्रणालियों की जमकर सराहना की। सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें ‘बॉस बेबी’ और भारतीय क्रिकेट का अपकमिंग सुपरस्टार कहकर पुकार रहे हैं, जिसके चलते डिजिटल मीडिया के खेल कॉरिडोर्स पर उनके बल्लेबाजी वीडियो रीयल-टाइम वायरल होकर नया रिकॉर्ड सिंक कर रहे हैं।
मैदान पर विवाद से लेकर बल्ले से जवाब तक: आलोचकों की मंदी की मार को गेट पर किया ब्लॉक
इस खिताबी मुकाबले से कुछ दिन पूर्व श्रीलंका ए के खिलाड़ियों के साथ ऑन-फील्ड तीखी नोकझोंक और विवाद को लेकर वैभव सूर्यवंशी को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था। जिम्बाब्वे के एक वरिष्ठ खेल पत्रकार और कुछ घरेलू विशेषज्ञों ने उनके संयम और आक्रामकता पर कड़े सवाल उठाते हुए उन्हें क्रीज पर अनुशासन बनाए रखने की विनियामक सलाह दी थी। लेकिन इस युवा प्रतिभावान खिलाड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी भी प्रकार की खुदरा बहसबाजी के ब्लोटवेयर पैनिक में फंसने के बजाय अपने बल्ले को ही सबसे बड़ा हथियार बनाने की कूटनीति अपनाई।
वैभव की यह 94 रनों की संप्रभु पारी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि बाहरी आलोचनाएं और सोशल मीडिया का दबाव उन्हें तोड़ने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य और संकल्प को सीमाओं के भीतर और अधिक मजबूत बनाता है। महज 15-16 साल की अविश्वसनीय उम्र में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मेगा ऑक्शन के इतिहास में सबसे युवा खिलाड़ी के रूप में अपनी अमिट पहचान दर्ज कराने वाले बिहार के इस लाल ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट विन्यास के लिए उनकी टाइमिंग और पावर का कॉम्बिनेशन तकनीकी रूप से कितना सटीक और परिपक्व है।
Vaibhav Suryavanshi: बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के लिए गर्व का क्षण और सीनियर टीम इंडिया का रोडमैप
मूल रूप से बिहार के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी ने बहुत ही छोटी उम्र में घरेलू क्रिकेट के कड़े मानकों पर खुद को साबित किया है। बिहार जैसे बुनियादी क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों से जूझने वाले प्रांत से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार परफॉर्म करना देश के असंगठित और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा एथलीटों के लिए एक बड़ा प्रोग्रेसिव उदाहरण बनकर उभरा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जूनियर चयनकर्ता और नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के कोच भी वैभव की इस अद्भुत प्रोग्रेसिव खेल प्रतिभा को बारीकी से मॉनिटर कर रहे हैं, और माना जा रहा है कि आगामी सीजनों में उन्हें सीनियर भारतीय क्रिकेट टीम के वॉर्डरोब में एंट्री का संप्रभु टिकट बहुत जल्द हासिल हो सकता है।
निष्कर्ष: संक्षेप में कहें तो त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में ‘कोई दबाव नहीं था’ (Vaibhav Suryavanshi) nकहने वाले वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट को एक नया कड़क विकल्प और आसमान प्रदान किया है। उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जब आपके पास हुनर, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास की असली अचूक चाबी हो, तो मैदान के भीतर या बाहर की कोई भी मंदी की मार आपकी उड़ान को रोक नहीं सकती। क्रिकेट प्रेमी अब इस युवा बॉस बेबी को आगामी आईपीएल सीजन और सीनियर टीम इंडिया की जर्सी में खेलते हुए देखने के लिए उत्सुक हैं।
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