Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अंतरिम आदेश, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों पर फिलहाल न हो सख्त कार्रवाई
शीर्ष अदालत ने राज्यों से जवाब मांगा, नाबालिगों की रिहाई और छात्रों पर राहत के निर्देश
Supreme Court Order: नीट यूजी 2026 परीक्षा के कथित पेपर लीक के विरोध में देश भर में हुए बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शनों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत देने वाला अंतरिम आदेश जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल उन छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई भी कड़ा या दंडात्मक कदम न उठाया जाए जिनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने विभिन्न राज्यों की पुलिस को हिरासत में लिए गए 18 साल से कम उम्र के नाबालिग बच्चों को तुरंत रिहा करने का सख्त निर्देश दिया है और केंद्र सरकार समेत सात राज्यों से जवाब तलब किया है।
देशव्यापी प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और मुख्य मांगें
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) में अनियमितताओं और पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद देश भर के युवाओं और अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश फैल गया था। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में शुरुआत में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर विशाल प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। यह आंदोलन देखते ही देखते उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों में फैल गया। उग्र होते प्रदर्शनों के बीच प्रदर्शनकारियों और छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से आयोजित कराने की मांग उठाई थी।
पुलिस बल प्रयोग के गंभीर आरोप और कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्रों पर अत्यधिक और अनुचित बल का प्रयोग किया। याचिकाओं में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज, पैलेट गन, रबर बुलेट्स, आंसू गैस के गोलों और इलेक्ट्रिक बैटन का प्रयोग किया गया, जिससे कई छात्रों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक छात्र ने अपनी आंख की रोशनी खो दी, जबकि एक महिला अभ्यर्थी और कई पत्रकार भी पुलिस के कथित दुर्व्यवहार और मारपीट का शिकार हुए।
पुलिस और सॉलिसिटर जनरल का पक्ष
दूसरी तरफ, झड़प में घायल हुए पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधियों और सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्वों ने हिंसा भड़काई। कोर्ट में तस्वीरें और वीडियो फुटेज जमा करते हुए बताया गया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से हुए भारी पथराव में 280 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने केवल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीमित कार्रवाई की थी, हालांकि सरकार मामले की किसी भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए पूरी तरह तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश और सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने सभी संबंधित राज्य सरकारों और पुलिस विभागों को निर्देश दिया कि प्रदर्शनों से जुड़े तमाम सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, ड्रोन कैमरे की वीडियो, पुलिस बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संदेशों के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि प्रदर्शनकारी छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा को किसी भी सूरत में सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने साफ किया कि दर्ज एफआईआर (FIR) की सामान्य जांच जारी रह सकती है, लेकिन जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
Supreme Court Order: नाबालिग छात्रों की तत्काल रिहाई का आदेश
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में मानवीय और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्देश दिया कि प्रदर्शनों के दौरान पकड़े गए 18 वर्ष से कम आयु के उन सभी नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए जिनका कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है। राज्यों के पुलिस प्रशासन को जरूरत पड़ने पर इन बच्चों को उनके अभिभावकों के साधारण बॉन्ड पर छोड़ने की छूट दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि युवाओं के भविष्य और उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करना अदालत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
Supreme Court Order: स्वतंत्र जांच (SIT) की आवश्यकता और राज्यों को नोटिस
बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामले में पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों पक्षों की ओर से हिंसा के संकेत मिलते हैं, इसलिए पूरे घटनाक्रम की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर विशेष जांच दल (SIT) के गठन पर विचार करने का संकेत दिया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल के मुख्य सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को भी हलफनामे के जरिए अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
संवैधानिक अधिकार और अगली सुनवाई की तिथि
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Order) ने देश के नागरिकों को संविधान द्वारा प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को रेखांकित किया, साथ ही ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और चिंताओं को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। कोर्ट का यह अंतरिम आदेश दोनों पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास है। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 3 अगस्त 2026 को तय की गई है, जिसमें केंद्र और राज्यों के हलफनामों की समीक्षा के बाद आगे की जांच प्रक्रिया तय होगी।
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