NEET UG 2026 ओएमआर शीट मामला, सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, एनटीए रिकॉर्ड नष्ट करने से पहले अहम फैसला संभव
NEET UG 2026 ओएमआर शीट मामला, सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, एनटीए रिकॉर्ड नष्ट करने से पहले अहम फैसला संभव
NEET UG 2026: मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 से जुड़ा एक विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। एक छात्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को तत्काल सुनवाई करने का निर्णय लिया है। मामला ओएमआर आंसर शीट को चुनौती देने से जुड़ा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) परीक्षा परिणाम के 90 दिन बाद मूल रिकॉर्ड नष्ट करने की अपनी नीति के तहत कल ही ये दस्तावेज समाप्त कर सकती है। नीट यूजी 2026 के नतीजे 16 जुलाई को घोषित किए गए थे, इसलिए 15 अक्टूबर को ठीक 90 दिन पूरे हो रहे हैं।
यह मामला उन हजारों छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन में पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले छात्र गुजरात हाईकोर्ट में अपनी लड़ाई लड़ चुका है, जहां से उसे निराशा हाथ लगी थी। अब सभी की निगाहें कल की सुनवाई पर टिकी हैं।
NEET UG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इतनी जल्दी सुनवाई क्यों तय की?
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने मामले का उल्लेख किया। वकील ने बताया कि एनटीए 90 दिनों की अवधि पूरी होने पर मूल ओएमआर शीट और संबंधित रिकॉर्ड नष्ट कर देगी। अगर ये दस्तावेज नष्ट हो गए तो छात्र अपना पक्ष साबित नहीं कर पाएगा। शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश ने मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करने का संकेत दिया, लेकिन वकील ने जोर देकर कहा कि शुक्रवार तक देर हो जाएगी।
जब वकील ने एनटीए के 90 दिनों वाले नियम का हवाला दिया तो अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए गुरुवार को ही सुनवाई के लिए सहमति दे दी। अब इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तत्काल सुनवाई का मतलब यह नहीं है कि उसने एनटीए की ओर से कोई गड़बड़ी मान ली है। फिलहाल केवल मामले को सुना जाएगा।
छात्र ने पहले गुजरात हाईकोर्ट में क्या कानूनी कदम उठाए थे?
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले छात्र ने सभी उपलब्ध कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया था। उसने सबसे पहले गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया। वहां मामले की सुनवाई हुई और अंततः 12 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने छात्र की इंट्रा-कोर्ट अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट से निराशा मिलने के बाद ही छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया था कि परीक्षा महीनों पहले हो चुकी है तो छात्र इतनी देर से क्यों आया। वकील ने स्पष्ट किया कि छात्र अचानक नहीं आया, बल्कि हाईकोर्ट में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। यह तथ्य मामले की पृष्ठभूमि को समझने में मदद करता है और दिखाता है कि छात्र ने समय रहते अपने स्तर पर कानूनी प्रयास किए थे।
एनटीए के 90 दिन वाले नियम का क्या महत्व है?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के नियमों के अनुसार परीक्षा परिणाम घोषित होने के 90 दिन बाद मूल रिकॉर्ड नष्ट कर दिए जाते हैं। नीट यूजी 2026 के नतीजे 16 जुलाई को आए थे, इसलिए 15 अक्टूबर को यह अवधि पूरी हो रही है। छात्र की याचिका में मुख्य तर्क यही है कि जब मामला अदालत में लंबित हो तो ऐसे महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
अगर कल सुनवाई के दौरान अदालत कोई अंतरिम आदेश देती है तो एनटीए को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश मिल सकते हैं। दूसरी ओर, अगर कोई आदेश नहीं आता तो एजेंसी अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिकॉर्ड नष्ट कर सकती है। यह मुद्दा न केवल इस एक छात्र बल्कि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पारदर्शिता और सबूतों की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं।
कल की सुनवाई से क्या उम्मीद की जा रही है?
15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि क्या एनटीए को ओएमआर शीट और अन्य मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि छात्र की शिकायत में कितनी गंभीरता है। सुप्रीम कोर्ट अभी तक मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सुनवाई के दौरान एनटीए की ओर से भी अपना पक्ष रखा जाएगा।
छात्रों और अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि क्या अदालत परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कोई व्यापक टिप्पणी करती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मूल रिकॉर्ड नष्ट हो जाते हैं तो कानूनी लड़ाई कमजोर पड़ सकती है। इसलिए कल का फैसला इस मामले की दिशा तय करने वाला हो सकता है।
NEET UG 2026: यह मामला नीट यूजी छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
नीट यूजी जैसी परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं और छोटी-सी गलती भी उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है। ओएमआर शीट से जुड़ा यह विवाद मूल्यांकन प्रक्रिया में विश्वास के सवाल को भी उठाता है। जब कोई छात्र अदालत तक पहुंचता है तो मूल दस्तावेजों का सुरक्षित रहना उसके न्याय पाने के अधिकार से जुड़ा होता है।
इस मामले से यह सवाल भी उभर रहा है कि जब कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही हो तो क्या परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी अपनी आंतरिक समयसीमा का हवाला देकर सबूत नष्ट कर सकती है। 15 अक्टूबर की सुनवाई इन सवालों पर कुछ स्पष्टता ला सकती है। फिलहाल सभी संबंधित पक्षों की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
Read More Here:-
Sharad Purnima 2026 कब है? 25 अक्टूबर को मनाएं कोजागरी पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त और खीर की परंपरा
UP Election 2027: कुर्मी वोटबैंक का कितना असर, 50-60 सीटों पर प्रभाव और सत्ता में 40 विधायक