Gandhinagar Municipal Election: गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, गांधीनगर नगर निगम में शून्य सीट, वोट शेयर 17% से ज्यादा गिरा

Gandhinagar Municipal Election: गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, गांधीनगर नगर निगम में शून्य सीट, वोट शेयर 17% से ज्यादा गिरा

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Gandhinagar Municipal Election: गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) को एक बड़ा झटका लगा है। गांधीनगर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीएमसी) के 44 सीटों पर हुए चुनाव में अरविंद केजरीवाल की पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। नतीजे मंगलवार को जारी हुए, जिसमें भाजपा ने 38 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को 5 सीटें मिलीं। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई।

सबसे बड़ी बात यह रही कि आप का वोट शेयर पिछले चुनाव की तुलना में भारी गिरावट के साथ महज 4.37 प्रतिशत रह गया। 2021 में पार्टी ने 21.77 प्रतिशत वोट हासिल किए थे और एक सीट भी जीती थी। इस बार पूरे शहर में आप को केवल 23,894 वोट मिले। भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 56.46 प्रतिशत हो गया, जबकि कांग्रेस का भी 36.93 प्रतिशत तक पहुंचा।

Gandhinagar Municipal Election: गांधीनगर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव के नतीजे क्या रहे?

जीएमसी की 44 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने अपना दबदबा बरकरार रखा और 38 सीटें जीत लीं। कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि एक सीट निर्दलीय को मिली। आप के खाते में एक भी सीट नहीं आई। कुल मतदान में भाजपा को 56.46 प्रतिशत वोट मिले, कांग्रेस को 36.93 प्रतिशत और आप को 4.37 प्रतिशत। निर्दलीय उम्मीदवारों को 1.75 प्रतिशत और बहुजन समाज पार्टी को 0.16 प्रतिशत वोट मिले।

भाजपा को पिछले चुनाव की तुलना में तीन सीटें कम मिलीं, लेकिन उसके वोट शेयर में 10 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ। 2021 में भाजपा का वोट शेयर 46.49 प्रतिशत था। कांग्रेस का वोट शेयर भी 28.02 प्रतिशत से बढ़कर 36.93 प्रतिशत हो गया। नतीजे मंगलवार को आए और इनसे गुजरात की राजनीति में मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

2021 के मुकाबले आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन कितना गिरा?

2021 के जीएमसी चुनाव में आप ने एक सीट जीती थी और 21.77 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। उस समय पार्टी गुजरात में अपनी जमीन तलाश रही थी और परिणाम उसके लिए संतोषजनक माने गए थे। इस बार स्थिति पूरी तरह बदल गई। पार्टी न केवल खाता खोलने में नाकाम रही, बल्कि वोट शेयर 17 प्रतिशत से अधिक गिरकर 4.37 प्रतिशत पर आ गया।

पूरे गांधीनगर में आप को महज 23,894 वोट मिले। यह आंकड़ा पार्टी के लिए चिंताजनक माना जा रहा है, खासकर तब जब गुजरात में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। पार्टी के संगठन महासचिव मनोज सोराठिया ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे गांधीनगर की जनता के जनादेश को स्वीकार करते हैं और संगठन की कमियों को दूर करके आने वाले समय में पार्टी को मजबूत करेंगे।

भाजपा और कांग्रेस को इस गिरावट से क्या फायदा हुआ?

आप की कमजोरी का सीधा फायदा भाजपा और कांग्रेस दोनों को मिला। भाजपा का वोट शेयर 46.49 प्रतिशत से बढ़कर 56.46 प्रतिशत हो गया। कांग्रेस ने भी अपने वोट शेयर में इजाफा किया और 28.02 प्रतिशत से 36.93 प्रतिशत तक पहुंची। दोनों पार्टियों ने आप के खोए हुए वोटों का एक हिस्सा अपने पक्ष में कर लिया।

भाजपा के लिए यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने सीटों में थोड़ी कमी के बावजूद वोट प्रतिशत में बड़ी बढ़त हासिल की। कांग्रेस को भी कुछ राहत मिली क्योंकि उसके वोट शेयर में सुधार देखा गया। गुजरात जैसे राज्य में जहां भाजपा का मजबूत आधार है, वहां विपक्षी दलों के बीच वोट बंटने का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

द्वारका उपचुनाव में आप की जीत का क्या मतलब है?

गांधीनगर के नतीजों के बीच एक सकारात्मक खबर भी आई। देवभूमि द्वारका जिले की भड़थर जिला पंचायत सीट पर हुए उपचुनाव में आप के उम्मीदवार विरुभाई कंडोरिया ने जीत हासिल की। उन्होंने 3,500 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। पार्टी ने इसे किसानों के एकजुट होने का नतीजा बताया।

गोपाल इटालिया ने कहा कि यह जीत बीजेपी के सत्ता के अहंकार का जवाब है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार सूखे की स्थिति पर ध्यान नहीं देती तो 2027 के विधानसभा चुनावों में भी ऐसा ही परिणाम देखने को मिल सकता है। यह जीत गांधीनगर के नतीजों के बीच पार्टी के लिए कुछ राहत देने वाली मानी जा रही है, हालांकि स्थानीय चुनावों और विधानसभा चुनावों की प्रकृति अलग होती है।

Gandhinagar Municipal Election: अगले साल के गुजरात विधानसभा चुनावों पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

गांधीनगर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के नतीजे गुजरात में आप के विस्तार की कोशिशों पर सवाल खड़े करते हैं। पार्टी लंबे समय से राज्य में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस बार का प्रदर्शन कमजोर रहा। वोट शेयर में भारी गिरावट से संकेत मिलता है कि पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर काम करने की जरूरत है।

भाजपा ने अपने आधार को और मजबूत किया है, जबकि कांग्रेस भी कुछ सुधार दिखा रही है। आप के लिए अब चुनौती यह है कि वह गांधीनगर जैसे शहरी क्षेत्रों में खोए हुए जनाधार को वापस पा सके। पार्टी का कहना है कि वह कमियों को दूर करेगी और मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह नतीजा पार्टी के लिए एक चेतावनी की तरह है।

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