Navratri Home Decoration: कम बजट में घर को दें ट्रेडिशनल लुक, इन आसान तरीकों से सजाएं पूजा का कोना

लाल चुनरी, गेंदे के फूल, मिट्टी के दीये और DIY सजावट से घर को दें खूबसूरत ट्रेडिशनल लुक

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Navratri Home Decoration: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होते ही घरों में मां दुर्गा के स्वागत और पूजा-अर्चना की तैयारियां जोरों पर चलने लगती हैं। मां के नौ रूपों की उपासना के साथ-साथ लोग अपने घर और विशेष रूप से पूजा घर को भव्य और पारंपरिक रूप देना चाहते हैं। अक्सर लोगों को लगता है कि घर को आकर्षक रूप देने के लिए बाजार से महंगे सजावटी सामान या प्लास्टिक की कृत्रिम लड़ियां खरीदना जरूरी है। वास्तव में घर में पहले से मौजूद पारंपरिक वस्त्र, ताजे फूल, पत्ते, पीतल के बर्तन और मिट्टी के दीयों का रचनात्मक उपयोग करके बेहद कम खर्च में पूजा के कोने को एक दिव्य और भव्य रूप दिया जा सकता है। इससे भारतीय परंपरा की सात्विकता भी बनी रहती है और बजट पर कोई अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता।

Navratri Home Decoration: बनारसी साड़ी या लाल चुनरी से बनाएं मनमोहक बैकड्रॉप

नवरात्रि और शक्ति की उपासना में लाल, पीले और नारंगी रंगों का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। पूजा स्थल को एक शाही और पारंपरिक रूप देने के लिए किसी महंगे पर्दे के बजाय घर में रखी लाल बनारसी साड़ी, गोटा-पट्टी वाला दुपट्टा या माता की लाल चुनरी को मंदिर की दीवार के पीछे बैकड्रॉप के रूप में लगाया जा सकता है।
चौकी के पीछे दीवार पर इस कपड़े को करीने से पिनअप करें और इसके दोनों छोर पर गेंदे के फूलों या आम के पत्तों की लड़ी लटका दें। यह साधारण सा बैकड्रॉप मंदिर के पूरे कोने को तुरंत एक भव्य और उत्सवपूर्ण रूप प्रदान करता है।

आम के पत्तों और गेंदे के फूलों का पारंपरिक वंदनवार

घर के मुख्य प्रवेश द्वार और पूजा कक्ष की चौखट पर तोरण यानी वंदनवार लगाना शुभता का प्रतीक माना जाता है। बाजार के महंगे और प्लास्टिक वाले तोरण के स्थान पर आम के ताजे पत्तों और गेंदे के पीले व नारंगी फूलों को धागे में पिरोकर प्राकृतिक तोरण तैयार किया जा सकता है।
भारतीय संस्कृति में आम के पत्तों को सकारात्मक ऊर्जा और शुद्धता का संवाहक माना गया है। फूलों की प्राकृतिक खुशबू घर में प्रवेश करते ही त्योहार के आगमन का जीवंत अहसास कराती है और यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल भी रहता है।

प्राकृतिक रंगों और फूलों की पंखुड़ियों से सजी रंगोली

पूजा स्थल के सामने या घर के आंगन में बनी रंगोली सकारात्मक वातावरण का निर्माण करती है। रासायनिक रंगों की जगह रसोई में आसानी से मिलने वाले चावल के आटे, हल्दी और कुमकुम से पारंपरिक मांडना या रंगोली की सुंदर आकृतियां बनाई जा सकती हैं।
यदि आप रंगों का झंझट नहीं चाहते, तो गेंदे और गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों से स्वस्तिक, ॐ या कमल के फूल की आकृति बना सकते हैं। रंगोली के केंद्र और कोनों पर प्रज्वलित मिट्टी के दीये रखने से इसका आकर्षण रात के समय कई गुना बढ़ जाता है।

मिट्टी के दीये और पीतल के दीपकों से जगमगाएं कोना

बिजली की कृत्रिम झालरों की अपेक्षा मिट्टी के पारंपरिक दीयों और पीतल के दीपकों से निकलने वाली पीली रोशनी पूजा के कोने को असीम शांति और दिव्यता प्रदान करती है। घर में पहले से रखे पुराने पीतल या तांबे के दीयों को नींबू और नमक से चमकाकर पूजा चौकी के दोनों तरफ स्थापित किया जा सकता है।
अखंड ज्योति के साथ-साथ चौकी के इर्द-गिर्द सादे मिट्टी के दीयों में थोड़ा सा सिंदूर या हल्दी लगाकर कलावे की बत्ती के साथ प्रज्वलित करें। शाम के समय जलते दीयों की हल्की रोशनी पूरे पूजा कक्ष में एक शांत और ध्यानमग्न माहौल रचती है।

पीतल के उरुली में तैरते फूलों और तैरती मोमबत्तियों का आकर्षण

कम खर्च में घर को एक लक्जरी और एथनिक लुक देने का सबसे सरल तरीका फ्लोटिंग फ्लावर अरेंजमेंट है। इसके लिए किसी चौड़े पीतल, कांसे या कांच के बर्तन (उरुली) में साफ पानी भरकर उसमें गेंदे और ताजे गुलाब की पंखुड़ियां फैला दें।
इसके बीच में एक या दो फ्लोटिंग टी-लाइट मोमबत्तियां या छोटे दीये तैरा दें। इस बर्तन को पूजा चौकी के पास जमीन पर या मुख्य द्वार के कोने में रखने से न केवल घर की शोभा बढ़ती है, बल्कि पानी और फूलों का यह संगम मन को सुकून भी देता है।

बेकार पड़े सामान से तैयार करें पर्यावरण-अनुकूल DIY सजावट

घर में रखी पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं को थोड़े से रचनात्मक विचार से खूबसूरत सजावटी वस्तुओं में बदला जा सकता है। पुरानी कांच की बोतलों या जैम के जार पर जूट की रस्सी (सुतली) लपेटकर और उस पर गोटा लगाकर एक सुंदर फूलदान तैयार किया जा सकता है।
इसी प्रकार कार्डबोर्ड के गोल टुकड़ों पर लाल-पीला कपड़ा या रंगीन कागज चिपकाकर और किनारों पर छोटे शीशे (मिरर) लगाकर दीवार पर लटकने वाले सुंदर वॉल हैंगिंग बनाए जा सकते हैं। परिवार के सदस्यों और बच्चों के साथ मिलकर बनाई गई यह हस्तनिर्मित सजावट त्योहार की खुशियों को दोगुना कर देती है।

Navratri Home Decoration: सजावट के दौरान सुरक्षा और सादगी का रखें संतुलन

त्योहार की सजावट में जगह को सामान से बहुत ज्यादा भरने के बजाय व्यवस्थित और सात्विक रखना आवश्यक है। पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ न हो ताकि पूजा-अर्चना और आरती के समय परिजनों को बैठने में असुविधा न हो।
सबसे महत्वपूर्ण बात सुरक्षा की है। चूंकि पूजा के दौरान लगातार दीये और धूपबत्ती जलती रहती हैं, इसलिए जलते हुए दीयों को बैकड्रॉप के लटकते कपड़ों, पर्दों, कागज की झालरों या सूखे फूलों से हमेशा सुरक्षित दूरी पर रखें। सुरक्षा के साथ की गई सात्विक और पारंपरिक सजावट नवरात्रि के नौ दिनों को सचमुच पावन और यादगार बना देती है।

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