Mumbai Ahmedabad Bullet Train: महाराष्ट्र में पहली बार लॉन्च हुआ 100 मीटर लंबा स्टील ब्रिज, 1,405 टन वजन
अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग 9% और बिजली क्षेत्र 12.3% बढ़ा, कैपिटल गुड्स में भी तेज वृद्धि
Mumbai Ahmedabad Bullet Train: भारत की महत्वाकांक्षी और सर्वाधिक प्रतीक्षित मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने महाराष्ट्र सीमा के भीतर परियोजना के पहले विशालकाय स्टील सुपरस्ट्रक्चर ब्रिज की सफल स्थापना (लॉन्चिंग) पूरी कर ली है। ठाणे जिले के भिवंडी तालुका अंतर्गत डाइव-अंजुर गांव के समीप व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 3 (NH-3 / मुंबई-नासिक हाईवे) के ऊपर स्थापित यह इंजीनियरिंग विस्मय लगभग 100 मीटर लंबा और 1,405 मीट्रिक टन वजनी है। महाराष्ट्र के भूभाग पर बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत स्थापित होने वाला यह अपनी तरह का पहला स्टील ट्रस ब्रिज है।
इस परियोजना में सामान्य कंक्रीट वायाडक्ट के स्थान पर स्टील ब्रिजों का चयन उन सामरिक और जटिल भौगोलिक स्थानों के लिए किया जाता है जहां रेलवे अलाइनमेंट को मौजूदा व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अथवा सदानीरा नदियों के ऊपर से बिना नीचे के यातायात को रोके लंबे स्पैन (खंभों के बीच की अधिक दूरी) में गुजारना होता है।
Mumbai Ahmedabad Bullet Train: 17.5 मीटर की ऊंचाई पर सटीक संतुलन
इस 100 मीटर लंबे, 14 मीटर ऊंचे और 14 मीटर चौड़े विशालकाय स्टील ढांचे को जमीन से सीधे उठाकर स्थापित करना असंभव था। परियोजना के इंजीनियरों ने इसके लिए एक अत्यंत परिष्कृत और नियंत्रित विधि अपनाई। हाईवे के किनारे जमीन से लगभग 17.5 मीटर की ऊंचाई पर पहले अस्थायी इस्पात के खंभे (Trestles) तैयार किए गए, जिन पर 22 विशेष स्किड अरेंजमेंट की सहायता से पूरे ढांचे को असेंबल किया गया।
विभिन्न स्टील गर्डरों और प्लेटों को आपस में सुरक्षित और स्थायी रूप से जोड़ने के लिए कुल 54,076 विशेष ‘टॉर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ बोल्ट्स’ (TTHSB) का प्रयोग किया गया। अंतिम लॉन्चिंग के समय 150-150 मीट्रिक टन की भारी खींचने की क्षमता वाले दो स्वचालित हॉलो हाइड्रोलिक जैक और प्री-टेंशन मैकेलॉय बार्स (Macalloy Bars) का इस्तेमाल किया गया। इन जैकों की नियंत्रित खिंचाई से 1,405 टन का यह ढांचा मिलीमीटर की सटीकता के साथ बिना किसी झटके के हाईवे के ऊपर अपने स्थायी पिलरों पर स्थापित हो गया।
रात के सन्नाटे में जटिल ऑपरेशन: हाईवे यातायात रहा पूरी तरह सुरक्षित
जिस स्थान पर इस स्टील ब्रिज को लॉन्च किया गया, वह राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 3 देश के सबसे व्यस्ततम लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई मार्गों में से एक है, जो मुंबई को उत्तरी व मध्य भारत से जोड़ता है। दिन के समय इस मार्ग पर हजारों भारी वाहन, कंटेनर और यात्री बसें गुजरती हैं, जिससे यातायात को रोकना जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता था।
जनसुरक्षा और न्यूनतम व्यवधान को प्राथमिकता देते हुए NHSRCL और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने केवल मध्यरात्रि के समय निर्धारित ‘ट्रैफिक ब्लॉक’ के दौरान लॉन्चिंग प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संपन्न किया। जब हाईवे पर वाहनों की आवाजाही को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ा गया था, उसी सीमित समय में क्रेन, हाइड्रोलिक जैक और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में ढांचे को धीरे-धीरे आगे सरकाया गया। सुबह का यातायात शुरू होने से पहले ही मुख्य स्पैन सुरक्षित रूप से अपनी जगह पर टिका दिया गया।
त्रिची में फैब्रिकेशन और 1,300 किलोमीटर की लंबी लॉजिस्टिक यात्रा
इस इंजीनियरिंग उपलब्धि का एक अत्यंत प्रभावशाली पहलू इसका विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स समन्वय है। इस विशाल स्टील संरचना का प्राथमिक निर्माण कार्य महाराष्ट्र से लगभग 1,300 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिची) स्थित भारी इंजीनियरिंग वर्कशॉप में संपन्न हुआ। त्रिची की कार्यशाला में जापानी और भारतीय मानकों के अनुसार उच्च शक्ति वाले स्टील प्लेटों की प्रिसिजन कटिंग, सीएनसी ड्रिलिंग और उच्च स्तरीय वेल्डिंग की गई।
इसके उपरांत, इन विशाल घटकों को विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रेलरों के काफिले पर लादकर अंतर्राज्यीय सीमाओं, घाटों और संकीर्ण सड़कों को पार करते हुए भिवंडी लाया गया। विभिन्न राज्यों के बीच 1,300 किमी का यह परिवहन भारतीय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है, जहां विशाल औद्योगिक कलपुर्जों को सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से परियोजना स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।
गुणवत्ता के वैश्विक मानक: अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग और C5 कोटिंग
बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन की गई है, जिसके चलते इसके ट्रैक और पुलों पर अत्यधिक कंपन और वायुगतिकीय दबाव उत्पन्न होता है। संरचनात्मक अखंडता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण में उपयोग किए गए स्टील के प्रत्येक बैच की शत-प्रतिशत ‘अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग’ (UT) कराई गई, ताकि धातु के भीतर किसी भी प्रकार की सूक्ष्म दरार या आंतरिक दोष न रह जाए।
इसके अतिरिक्त, वेल्डिंग कार्य केवल उन्हीं कुशल तकनीशियनों द्वारा कराया गया जो अंतरराष्ट्रीय वेल्डिंग सोसायटियों और जापानी विशेषज्ञों द्वारा विधिवत प्रमाणित थे। तटीय महाराष्ट्र के आर्द्र और खारे वातावरण से स्टील को जंग लगने से बचाने के लिए पूरे ढांचे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की ‘C5 प्रोटेक्टिव पेंटिंग सिस्टम’ की बहुस्तरीय कोटिंग की गई है, जो इसे दशकों तक जंग और पर्यावरणीय क्षरण से सुरक्षित रखेगी। पुल के दोनों सिरों पर उच्च क्षमता वाली इलास्टोमेरिक बेयरिंग्स लगाई गई हैं जो रेल गुजरने के दौरान पैदा होने वाले झटकों और कंपनों को अवशोषित करेंगी।
कॉरिडोर पर कुल 28 स्टील ब्रिज: 16 का निर्माण हुआ पूरा
508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के संपूर्ण संरेखण (Alignment) में कुल 28 बड़े स्टील ट्रस ब्रिज बनाए जाने हैं। नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 16 स्टील ब्रिजों का निर्माण और स्थापना सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। गुजरात संभाग में भरूच, वडोदरा, सूरत और नवसारी के समीप भारतीय रेलवे के व्यस्त ट्रैकों और नदियों के ऊपर पहले ही कई जटिल स्पैन (जिनमें 130 मीटर तक के स्पैन शामिल हैं) लॉन्च किए जा चुके हैं।
महाराष्ट्र के हिस्से में यह पहली सफलता है, जो राज्य में बुलेट ट्रेन निर्माण की गति में आई तेजी को दर्शाती है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) भूमिगत टर्मिनल, समुद्र के नीचे 21 किमी लंबी सुरंग और ठाणे-पालघर जिलों में तेजी से खड़े हो रहे पिलरों के साथ यह स्टील ब्रिज परियोजना के बुनियादी ढांचे को एक ठोस आकार दे रहा है।
Mumbai Ahmedabad Bullet Train: ‘मेक इन इंडिया’ और आधुनिक भारत की रेल क्रांति
भिवंडी में NH-3 के ऊपर 100 मीटर लंबे स्टील सुपरस्ट्रक्चर का सफल प्रक्षेपण केवल एक पुल का निर्माण नहीं है, बल्कि यह देश के भीतर विश्वस्तरीय अवसंरचना निर्माण की बढ़ती स्वदेशी क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। तमिलनाडु में निर्माण, अंतर्राज्यीय परिवहन और महाराष्ट्र में जापानी तकनीक के समन्वय से सुरक्षित स्थापना यह सिद्ध करती है कि भारतीय उद्योग जगत जटिलतम मेगा-परियोजनाओं को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।
जैसे-जैसे कॉरिडोर के सभी 28 स्टील ब्रिज और वायाडक्ट पूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं, देश की पहली बुलेट ट्रेन का सपना यथार्थ के अत्यंत निकट पहुंचता जा रहा है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर न केवल मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को घटाकर मात्र दो घंटे कर देगा, बल्कि देश के आर्थिक, औद्योगिक और इंजीनियरिंग परिदृश्य को एक क्रांतिकारी गति भी प्रदान करेगा।
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