Prateek Yadav Death Analysis: क्या जरूरत से ज्यादा ‘फिटनेस’ बन गई जान की दुश्मन? जानें हैवी वर्कआउट को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Prateek Yadav Death Analysis: पल्मोनरी एम्बोलिज्म और हैवी वर्कआउट के बीच की वो पतली रेखा, जो बन सकती है जानलेवा।

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Prateek Yadav Death Analysis: समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के अचानक निधन ने सबको चौंका दिया है। महज 38 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रतीक अपनी शानदार फिटनेस और जिम वर्कआउट के लिए युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक एक ही बहस छिड़ गई है, क्या फिट रहने का जुनून भी जानलेवा हो सकता है? क्या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज शरीर के लिए वरदान नहीं, बल्कि अभिशाप बन जाती है?

शुरुआती रिपोर्ट्स में बताया गया है कि प्रतीक यादव लंबे समय से फेफड़ों (Lungs) की समस्या और खून के थक्के (Blood Clots) जमने की बीमारी से जूझ रहे थे। लेकिन उनकी फिटनेस फ्रीक इमेज ने ‘ओवर-एक्सरसाइजिंग’ के खतरों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। आइए, एक अनुभवी नजरिए से समझते हैं कि आखिर शरीर की क्षमता और वर्कआउट के बीच की वो पतली रेखा क्या है, जिसे पार करना खतरनाक हो सकता है।

Prateek Yadav Death Analysis: फिटनेस के प्रति अटूट लगाव, जिम और हैवी लिफ्टिंग के शौकीन थे प्रतीक

प्रतीक यादव राजनीति की चकाचौंध से दूर अपनी एक अलग दुनिया में रहते थे। उन्हें महंगी कारों, जानवरों और सबसे ज्यादा अपनी ‘फिटनेस’ से प्यार था। उनके इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर डालें तो वहां हैवी डेडलिफ्ट, एक्सट्रीम ट्रेनिंग और घंटों पसीना बहाने वाले वीडियो की भरमार है।

एक ऐसा व्यक्ति जो देखने में इतना फिट और सेहतमंद लगे, उसका अचानक यूं चले जाना डराने वाला है। यही वजह है कि आज हर वो युवा डरा हुआ है जो जिम में घंटों बिताता है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर इतना फिट रहने के बाद भी मौत आ सकती है, तो फिर एक्सरसाइज का फायदा क्या?

क्या वाकई ज्यादा एक्सरसाइज सेहत बिगाड़ सकती है?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि एक्सरसाइज करना सेहत के लिए सबसे अच्छा काम है। यह आपके दिल को मजबूत करती है, तनाव दूर करती है और बीमारियों से बचाती है। लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’ यानी किसी भी चीज की अति बुरी होती है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘ओवर-एक्सरसाइजिंग’ (Over-exercising) शरीर के अंगों पर बुरा असर डाल सकती है। लुइसियाना के फिजिकल थेरेपिस्ट डेविड मिरांडा का कहना है कि जब हम अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं ज्यादा मेहनत करते हैं, तो शरीर इसे सहन नहीं कर पाता। इससे दिल की धड़कन का अनियमित होना (Arrhythmia) या अंगों का फेल होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ओवरट्रेनिंग (Overtraining) क्या है और यह कैसे खतरनाक है?

ओवरट्रेनिंग तब होती है जब आप शरीर को रिकवरी का मौका दिए बिना लगातार दबाव डालते हैं।

  • मसल्स की टूट-फूट: हैवी वर्कआउट के दौरान मांसपेशियां फटती हैं, जिन्हें ठीक होने के लिए आराम चाहिए होता है।

  • हृदय पर दबाव: बहुत ज्यादा कार्डियो या हैवी लिफ्टिंग से दिल की दीवारों पर दबाव बढ़ सकता है।

  • इम्यूनिटी का गिरना: जरूरत से ज्यादा थकान शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत को कम कर देती है।

कितनी एक्सरसाइज है ‘परफेक्ट’? जानिए क्या कहता है विज्ञान

अक्सर लोग जोश-जोश में आकर जिम में घंटों बिताते हैं, लेकिन अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (US Health Department) के मानक कुछ और ही कहते हैं। एक औसत वयस्क के लिए जो गाइडलाइंस तय की गई हैं, वो कुछ इस प्रकार हैं:

गतिविधि का प्रकार प्रति सप्ताह समय (मिनट)
मॉडरेट फिजिकल एक्टिविटी (पैदल चलना, साइकिलिंग) 150 से 300 मिनट
इंटेंस एक्सरसाइज (दौड़ना, हैवी जिम) 75 से 150 मिनट
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग) कम से कम 2 दिन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप हर हफ्ते 150 मिनट भी मध्यम गति से एक्सरसाइज करते हैं, तो आप काफी हद तक फिट रह सकते हैं। प्रतीक यादव जैसे लोग जो ‘एक्सट्रीम ट्रेनिंग’ करते थे, उनके लिए रिकवरी और मेडिकल चेकअप और भी जरूरी हो जाता है।

प्रतीक यादव की मौत की असली वजह: क्या कहते हैं डॉक्टर?

हालांकि जनता के बीच फिटनेस को लेकर चर्चा गरम है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि प्रतीक की मौत की वजह उनके फेफड़ों की पुरानी बीमारी थी। उन्हें लंग्स में ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) की समस्या थी। मेडिकल भाषा में इसे ‘पल्मोनरी एम्बोलिज्म’ (Pulmonary Embolism) कहा जाता है, जो बेहद जानलेवा हो सकता है।

अगर कोई पहले से ही फेफड़ों या दिल की बीमारी से जूझ रहा है और उस पर हैवी वर्कआउट का दबाव डालता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। हालांकि, प्रतीक के मामले में क्या उनके वर्कआउट ने उनकी बीमारी को ट्रिगर किया? यह सवाल अभी भी जांच का विषय है। असली सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।

Prateek Yadav Death Analysis: जिम जाने वालों के लिए 5 जरूरी ‘गोल्डन रूल्स’

एक अनुभवी राइटर के तौर पर, मैं उन सभी युवाओं को कुछ सलाह देना चाहूंगा जो फिट रहना चाहते हैं:

  1. शरीर की आवाज सुनें: अगर आपको वर्कआउट के दौरान चक्कर आ रहे हैं, सीने में भारीपन लग रहा है या सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो तुरंत रुक जाएं। जिम ‘ईगो’ दिखाने की जगह नहीं है।

  2. पर्याप्त नींद लें: जिम में मसल्स नहीं बनतीं, मसल्स तब बनती हैं जब आप सो रहे होते हैं। 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है।

  3. मेडिकल चेकअप: अगर आप हैवी वेट उठाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले अपना हार्ट चेकअप (ECG/TMT) और लंग्स का चेकअप जरूर कराएं।

  4. ट्रेनर की सलाह: बिना किसी एक्सपर्ट की देखरेख के भारी वजन न उठाएं। गलत पॉश्चर जानलेवा हो सकता है।

  5. डाइट का संतुलन: केवल सप्लीमेंट्स के भरोसे न रहें। घर का खाना और प्राकृतिक पोषण ही शरीर की असली नींव है।

Prateek Yadav Death Analysis: निष्कर्ष, फिटनेस जरूरी है, जुनून नहीं

प्रतीक यादव का जाना दुखद है और यह हमें एक बड़ा सबक दे गया है। फिट रहना बहुत अच्छी बात है और हर किसी को इसके लिए प्रयास करना चाहिए। लेकिन फिटनेस का मतलब केवल ‘मजबूत मांसपेशियां’ या ‘सिक्स पैक एब्स’ नहीं है। असली फिटनेस का मतलब है, अंदरूनी अंगों का स्वस्थ होना, मानसिक शांति और लंबी आयु।

हमें यह समझना होगा कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। जो वर्कआउट आपके दोस्त के लिए सही है, जरूरी नहीं कि वो आपके लिए भी सही हो। अपनी लिमिट पहचानें और स्वस्थ रहें, न कि खुद को ‘ओवरट्रेन’ करके संकट में डालें।

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