NEET UG 2026 Controversy: अब सुप्रीम कोर्ट में होगी आर-पार! FAIMA ने NTA को हटाने समेत रखी ये 7 बड़ी मांगें

NEET UG 2026 Controversy: FAIMA पहुंची सुप्रीम कोर्ट। पेपर लीक रोकने के लिए डिजिटल सील और CBT मोड की मांग। क्या रद्द होगी NTA की मान्यता? जानें छात्रों का भविष्य।

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NEET UG 2026 Controversy: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET UG) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। साल 2026 की परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों के बाद अब यह लड़ाई देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गई है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि NTA परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कौन सी 7 प्रमुख मांगें रखी हैं और इस याचिका के मायने क्या हैं।

NEET UG 2026 Controversy: क्यों उठा NTA की साख पर सवाल?

याचिका में FAIMA ने साफ़ तौर पर कहा है कि मेडिकल जैसी संवेदनशील परीक्षा को आयोजित करने में NTA की “सिस्टमेटिक विफलता” सामने आई है। बार-बार पेपर लीक होना और तकनीकी खामियों के कारण परीक्षा का रद्द होना यह दर्शाता है कि मौजूदा सिस्टम में बड़े छेद हैं। संगठन का मानना है कि अब समय आ गया है जब इस पूरी व्यवस्था की ओवरहॉलिंग (कायापलट) की जाए।

1. NTA की विदाई और नई एजेंसी का गठन

NEET UG 2026 Controversy
NEET UG 2026 Controversy

FAIMA की सबसे पहली और बड़ी मांग यह है कि NTA को अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि एजेंसी भरोसे की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है। इसकी जगह एक ऐसी नई और तकनीकी रूप से एडवांस संस्था बनाई जाए, जो बिना किसी विवाद के पारदर्शी तरीके से परीक्षा करा सके। छात्रों के मन में NTA को लेकर जो डर और अविश्वास बैठ गया है, उसे दूर करने का यही एकमात्र रास्ता है।

2. रिटायर्ड जज की निगरानी में हो दोबारा परीक्षा

संगठन ने मांग की है कि NEET UG 2026 की परीक्षा दोबारा आयोजित की जाए। लेकिन इस बार पेंच यह है कि FAIMA चाहता है कि यह परीक्षा किसी सरकारी विभाग के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। इसके लिए एक ‘हाईपावर कमेटी’ बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसकी कमान सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज के हाथों में हो। इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर कोई सवाल नहीं उठा पाएगा।

3. कमेटी में शामिल हों साइबर और फॉरेंसिक एक्सपर्ट

सिर्फ जज ही नहीं, FAIMA चाहता है कि इस कमेटी में तकनीकी दिग्गजों को भी जगह मिले। याचिका के अनुसार, कमेटी में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट और बड़े टेक्निकल प्रोफेशनल होने चाहिए। इनका काम यह जांचना होगा कि आखिर पेपर लीक की गुंजाइश कहां से बनती है और भविष्य में किन तकनीकी सुरक्षा उपायों के जरिए इसे 100% फुलप्रूफ बनाया जा सकता है।

4. डिजिटल सील: तकनीक से थमेगी चोरी

अक्सर देखा गया है कि पेपर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान या सेंटर तक पहुंचने से पहले लीक हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए FAIMA ने ‘डिजिटल सील’ का प्रस्ताव रखा है। डिजिटल सील का मतलब है कि प्रश्नपत्रों के बक्से या फाइल्स तभी खुलेंगी जब एक खास समय पर डिजिटल कोड जनरेट होगा। इससे फिजिकल छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

5. नेशनल एग्जाम इंटीग्रिटी कमीशन (NEIC) का सुझाव

एक दूरगामी समाधान के तौर पर FAIMA ने “नेशनल एग्जाम इंटीग्रिटी कमीशन” (NEIC) नाम की एक स्वतंत्र संस्था बनाने की वकालत की है। यह आयोग किसी खास परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि देश में होने वाली सभी बड़ी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की निगरानी करेगा। इसका मुख्य काम होगा परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की धांधली की तुरंत जांच कर कड़ी कार्रवाई करना।

6. CBT मोड: पेन-पेपर को कहें अलविदा

नीट परीक्षा अब तक पारंपरिक पेन और पेपर (OMR) मोड में होती आई है। FAIMA का मानना है कि ओएमआर शीट और फिजिकल पेपर में धांधली की संभावना ज्यादा रहती है। इसलिए याचिका में परीक्षा को पूरी तरह ‘कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट’ (CBT) मोड में शिफ्ट करने की मांग की गई है। डिजिटल मोड में परीक्षा होने से पेपर लीक होने का रिस्क कम होता है और रिजल्ट भी जल्दी और सटीक तरीके से तैयार किए जा सकते हैं।

7. दोषियों पर हो ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई

पेपर लीक माफिया ने लाखों छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया है। FAIMA ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएं—चाहे वो एजेंसी के अंदर के लोग हों या बाहर के रसूखदार माफिया—उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि जब तक मिसाल कायम करने वाली सजा नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे गिरोहों के हौसले बुलंद रहेंगे।

इतिहास दोहरा रहा है खुद को: 2024 की यादें ताजा

यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में माथापच्ची हो रही है। साल 2024 में भी पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स के मुद्दे ने खूब तूल पकड़ा था। उस वक्त भी अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि परीक्षा की “पवित्रता प्रभावित” हुई है। लेकिन ऐसा लगता है कि उस विवाद से कोई सबक नहीं लिया गया, तभी 2026 में हालात और भी खराब हो गए हैं।

NEET UG 2026 Controversy: आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई कर सकता है। अब पूरी नजरें अदालत के रुख और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या सरकार NTA के ढांचे में बदलाव करेगी? क्या वाकई परीक्षा को ऑनलाइन मोड में ले जाया जाएगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही से साफ होंगे।

NEET UG 2026 Controversy: निष्कर्ष

NEET UG 2026 का मामला अब महज एक परीक्षा का मामला नहीं रहा, बल्कि यह देश के शिक्षा तंत्र और लाखों युवाओं के भरोसे का सवाल बन गया है। FAIMA की ये 7 मांगें अगर मान ली जाती हैं, तो यकीनन आने वाले समय में एक पारदर्शी सिस्टम की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, छात्र अपनी किताबों और उम्मीदों के बीच फंसे हुए हैं, बस इसी इंतज़ार में कि इंसाफ जल्द हो।

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