Maruti Suzuki WFH Policy: पेट्रोलियम संकट की आहट के बीच मारुति सुजुकी का बड़ा कदम, कर्मचारियों के लिए लागू किया WFH

Maruti Suzuki WFH Policy: मारुति ने फिर लागू किया WFH नियम

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Maruti Suzuki WFH Policy: क्या देश में वाकई पेट्रोलियम संकट गहराने वाला है? यह सवाल आज हर किसी की जुबान पर है, क्योंकि भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) ने आज यानी देशहित और ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी गंभीर तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच, मारुति सुजुकी ने अपने कॉर्पोरेट दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए तुरंत प्रभाव से वर्क फ्रॉम होम (WFH) नीति को दोबारा लागू कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने मैनेजमेंट और स्टाफ की गैर-जरूरी विदेशी और घरेलू हवाई यात्राओं में भारी कटौती करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

मारुति सुजुकी ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन सप्लाई पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कंपनी का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया राष्ट्रीय आह्वान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देश के नागरिकों और कॉर्पोरेट जगत से ईंधन बचाने, अनावश्यक विदेशी दौरों से बचने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखने की भावुक अपील की थी। मारुति के इस कदम के बाद अब ऑटोमोबाइल सेक्टर सहित देश की दूसरी बड़ी कंपनियों में भी इसी तरह के सख्त कदम उठाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Maruti Suzuki WFH Policy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और मिडल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह

दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical Conflict) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसकी वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव बना दिया है। इसी संकट को भांपते हुए इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन संरक्षण की आदतें अपनाने, अनावश्यक विदेश यात्राओं को टालने और विदेशी मुद्रा खर्च बचाने के लिए सोना खरीदने से परहेज करने का आग्रह किया था।

देश की सबसे बड़ी कार कंपनी होने के नाते मारुति सुजुकी ने इस राष्ट्रीय संकट में जिम्मेदारी दिखाते हुए सबसे पहले कदम बढ़ाया है। कंपनी का मानना है कि इस समय पेट्रोलियम उत्पादों के अंधाधुंध उपयोग को रोकना और विदेशी मुद्रा के खर्च को न्यूनतम स्तर पर लाना न सिर्फ राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह कंपनी के अपने लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

मारुति सुजुकी के वो 5 बड़े फैसले, जिन्होंने कॉर्पोरेट जगत को चौंकाया

कंपनी की ओर से जारी आंतरिक गाइडलाइंस के मुताबिक, कामकाजी प्रक्रियाओं की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। ईंधन बचाने और लागत कम करने के लिए मारुति ने मुख्य रूप से इन 5 कड़े उपायों को तुरंत लागू करने का आदेश दिया है:

  • वर्क फ्रॉम होम (WFH) की वापसी: जहां भी संभव हो, प्रशासनिक और डेस्क जॉब वाले कर्मचारियों को घर से काम करने की पूरी सुविधा दी जाएगी। इससे कर्मचारियों को दफ्तर आने-जाने के लिए रोज होने वाले ईंधन की खपत में भारी कमी आएगी।

  • विदेशी यात्राओं पर सख्त पाबंदी: कंपनी के अधिकारियों की सभी गैर-जरूरी और रूटीन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। केवल उन्हीं विदेशी यात्राओं को मंजूरी मिलेगी, जो बिजनेस के संचालन के लिए बेहद अनिवार्य होंगी।

  • वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा: देश के भीतर होने वाली अंतर-विभागीय और क्लाइंट मीटिंग्स के लिए हवाई यात्रा करने के बजाय अब पूरी तरह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।

  • कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट: जो कर्मचारी दफ्तर आ रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से आपस में कारपूलिंग करने या सार्वजनिक परिवहन के साधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • ऑफिस में ऊर्जा संरक्षण: कंपनी के प्लांट्स और ऑफिस परिसरों में बिजली और ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए विशेष एनर्जी ऑडिट और बचत अभियान शुरू किए गए हैं।

Maruti Suzuki WFH Policy: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव, आम जनता की जेब पर भी भारी असर

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है, इसलिए वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में होने वाली जरा सी भी हलचल देश की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। मिडल ईस्ट संकट के चलते इस महीने सरकार को देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी करनी पड़ी है। आयात लागत (Import Cost) बढ़ने के कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च हो रहा है, जिससे निपटने के लिए सरकार और कॉर्पोरेट दोनों स्तरों पर कड़े फैसले लिए जा रहे हैं।

इस तेल संकट और इनपुट कॉस्ट (लागत मूल्य) में बढ़ोतरी का सीधा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दिखने लगा है। मारुति सुजुकी ने हाल ही में बढ़ती परिचालन और इनपुट लागत का हवाला देते हुए अपनी विभिन्न गाड़ियों की कीमतों में 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में गाड़ियों की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी के लिए कार खरीदना और अधिक महंगा हो जाएगा।

Maruti Suzuki WFH Policy: क्या आईटी और अन्य सेक्टर्स में भी होगी वर्क फ्रॉम होम की वापसी?

मारुति सुजुकी जैसे बड़े और पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के दिग्गज द्वारा वर्क फ्रॉम होम और ट्रैवल कट जैसे सख्त फैसले लेने के बाद, अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि देश के अन्य बड़े कॉर्पोरेट घराने, विशेषकर आईटी (IT), बैंकिंग और सर्विस सेक्टर की कंपनियां भी जल्द ही इस राह पर चल सकती हैं। कोरोना काल के बाद अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वापस दफ्तर बुला लिया था, लेकिन मौजूदा वैश्विक आर्थिक और पेट्रोलियम संकट एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम संस्कृति को वापस लाने की वजह बन रहा है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि देश की टॉप 100 कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को आंशिक रूप से वर्क फ्रॉम होम दे देती हैं और हवाई यात्राओं में 50 फीसदी तक की कटौती करती हैं, तो इससे रोजाना लाखों लीटर ईंधन की बचत होगी। यह बचत सीधे तौर पर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और रुपये की कीमत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरने से रोकने में मदद करेगी। मारुति सुजुकी का यह फैसला दूरदर्शी है और संकट के समय में कॉर्पोरेट जिम्मेदारी की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है।

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