ED Action: पेपर लीक मामलों पर ED का बड़ा एक्शन, कई राज्यों में PMLA केस दर्ज; 40 करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध मनी नेटवर्क की जांच तेज

कई राज्यों में PMLA केस दर्ज, 40 करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध नेटवर्क पर नजर

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ED Action: देशभर में विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ केंद्र सरकार की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निर्णायक और व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, गुवाहाटी और कर्नाटक समेत कई राज्यों में आयोजित परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बाद ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दी है।

जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान अब केवल पेपर लीक कराने वाले गिरोहों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अवैध वित्तीय नेटवर्कों को पूरी तरह ध्वस्त करना है जिनके जरिए अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये ऐंठकर परीक्षाओं की शुचिता से खिलवाड़ किया गया।

ED Action: नीट और झारखंड जेपीएससी-जेएसएससी मामलों में भी कसता जा रहा है शिकंजा

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पेपर लीक मामले में भी जल्द ही औपचारिक रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की ईसीआईआर (ECIR) दर्ज कर देशव्यापी स्तर पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, झारखंड में आयोजित 14वीं जेपीएससी (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली को लेकर रांची स्थित ईडी क्षेत्रीय कार्यालय ने राज्य पुलिस और सीआईडी (CID) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सीजीएल (CGL) परीक्षा 2024 में हुई अनियमितताओं और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर भी ईडी अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जल्द ही इसमें भी पृथक मामला दर्ज किया जा सकता है।

40 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की आशंका, मनी ट्रेल खंगालने में जुटी एजेंसी

शुरुआती जांच और पूर्व में हुई राज्य स्तरीय पड़ताल से संकेत मिले हैं कि इन परीक्षा घोटालों के पीछे करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक का एक विशाल नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि ओएमआर शीट (OMR Sheets) में हेरफेर करने, चयन सूची में मनचाहा नाम दर्ज कराने और साक्षात्कार में अतिरिक्त अंक दिलवाने के बदले अभ्यर्थियों से भारी-भरकम राशि वसूली जाती थी।

ईडी अब इस पूरी अवैध कमाई के उद्गम, प्रवाह और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए आरोपियों और बिचौलियों के बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल पेमेंट्स और अचल संपत्तियों की सघन पड़ताल कर रही है। कानून के मुताबिक अपराध से अर्जित इस संपत्ति (Proceeds of Crime) को कुर्क (Attach) करने की दिशा में भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।

छापेमारी के दौरान जब्त हुए आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण

इससे पूर्व सीआईडी द्वारा झारखंड के रांची, हजारीबाग, पलामू और धनबाद सहित 18 प्रमुख ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए थे। जांच अधिकारियों को इन ठिकानों से भारी मात्रा में ब्लैंक चेक, अभ्यर्थियों के ओरिजिनल एडमिट कार्ड, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियां, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण मिले थे।

इन जब्त डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। ईडी इन पुख्ता सबूतों को आधार बनाकर मनी ट्रेल की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है ताकि सिंडिकेट में शामिल सफेदपोशों और मुख्य सरगनाओं को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

प्रतियोगी परीक्षाओं की साख और युवाओं का भविष्य दांव पर

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान से लेकर बिहार और झारखंड तक पेपर लीक की घटनाओं ने देश के लाखों मेधावी और परिश्रमी युवाओं के मनोबल को गहरा धक्का पहुंचाया है। वर्षों की कठिन मेहनत और आर्थिक तंगी के बावजूद तैयारी करने वाले युवाओं का भरोसा पारदर्शी चयन प्रक्रिया से उठने लगा था।

ऐसे समय में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा घोटालों के आर्थिक पहलुओं की जांच अपने हाथ में लेना एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जब तक इस तरह के घोटालों में शामिल माफियाओं की संपत्तियों को जब्त कर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे अपराधों पर पूर्ण विराम लगाना संभव नहीं होगा।

ED Action: आगे की रणनीति, कुड़की, गिरफ्तारी और देशव्यापी समन्वित कार्रवाई

आने वाले दिनों में ईडी की टीमों द्वारा कई राज्यों में एक साथ बड़ी छापेमारी, संदिग्धों से पूछताछ और गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई संपत्तियों को अटैच करने का सिलसिला तेज होने की पूरी संभावना है।

केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य स्तरीय पुलिस के बीच आपसी तालमेल से चल रही इस समानांतर जांच का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करना और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाना है। प्रवर्तन निदेशालय के इस कड़े रुख से देश भर के अभ्यर्थियों में एक बार फिर निष्पक्ष न्याय और व्यवस्था में सुधार की नई उम्मीद जगी है।

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