Delhi To Valley Of Flowers: 12 घंटे के सफर में पहुंचें फूलों से सजी उत्तराखंड की स्वर्ग जैसी खूबसूरत वादियों में

12 घंटे में पहुंचें फूलों की घाटी, जानें ट्रेक, रूट, परमिट और जरूरी तैयारियां

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Delhi To Valley Of Flowers: भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी और कंक्रीट के जंगलों से दूर प्रकृति की गोद में सुकून तलाश रहे लोगों के लिए उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों में बसा वैली ऑफ फ्लावर्स यानी फूलों की घाटी एक सपनों जैसी जगह है। विश्व धरोहर स्थल के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी यह घाटी मानसून के दिनों में किसी तिलिस्मी दुनिया की तरह खिल उठती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महज 12 घंटे की सड़क दूरी तय करके कोई भी यात्री इस अलौकिक स्थान पर पहुंच सकता है।

गढ़वाल हिमालय के चमोली जिले में स्थित यह घाटी अपनी जैव विविधता और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। जुलाई और अगस्त के महीनों में जब देश के अन्य हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित होता है, उस दौरान यह घाटी 500 से अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों से पूरी तरह ढक जाती है। बादलों से ढके पहाड़, कल-कल बहते बर्फीले झरने और फूलों की मनमोहक सुगंध पर्यटकों को एक जादुई अहसास कराती है।

Delhi To Valley Of Flowers: यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा और वैली ऑफ फ्लावर्स का अनूठा इतिहास

वैली ऑफ फ्लावर्स को साल 2005 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। समुद्र तल से लगभग 8700 फीट से लेकर 12000 फीट तक की ऊंचाई पर फैली यह वादी लगभग 87 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इस राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास बहुत समृद्ध और पारिस्थितिकी की दृष्टि से बेहद नाजुक माना जाता है। 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्मायदे ने रास्ता भटकने के बाद इस खूबसूरत घाटी की खोज की थी और वे इसकी खूबसूरती से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर ‘द वैली ऑफ फ्लावर्स’ नाम से एक प्रसिद्ध किताब ही लिख डाली।

इस घाटी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हर हफ्ते फूलों के रंग बदलते दिखाई देते हैं। किसी हफ्ते यदि पूरी वादी गुलाबी और बैंगनी रंगों से ढकी नजर आती है, तो अगले ही हफ्ते वहां पीले और सफेद फूलों की चादर बिछ जाती है। यहां राज्य पुष्प ब्रह्म कमल, नीले पोपी, कोबरा लिली, एडेलवाइस और बाल्सम जैसे दुर्लभ हिमालयी फूल प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में आसानी से देखने को नहीं मिलते।

जून से अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुलते हैं कपाट

वैली ऑफ फ्लावर्स का मुख्य पर्यटन सत्र बेहद सीमित अवधि के लिए होता है। अत्यधिक बर्फबारी और कठिन मौसम के कारण यह उद्यान साल के बाकी महीनों में पूरी तरह बंद रहता है। हर साल 1 जून से इसके कपाट पर्यटकों के लिए खोल दिए जाते हैं और 31 अक्टूबर को इसे फिर से बंद कर दिया जाता है। हालांकि, यहां आने का सबसे मुफीद और स्वर्णिम समय जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त के अंतिम सप्ताह तक माना जाता है।

मानसून की बारिश के बाद जुलाई-अगस्त में यहां के सभी दुर्लभ पौधे पूरी तरह पुष्पित हो जाते हैं। इस दौरान घाटी अपनी पूरी प्राकृतिक रंगत में होती है। सितंबर के महीने में धीरे-धीरे फूलों के बीज बनने लगते हैं और पूरी वादी सुनहरे भूरे रंग में तब्दील होने लगती है। इसलिए जो पर्यटक फूलों का असली मेला देखना चाहते हैं, उन्हें मानसून के दिनों में ही यहां की यात्रा का खाका तैयार करना चाहिए।

दिल्ली से गोविंदघाट तक की सड़क यात्रा और सबसे सुगम मार्ग

दिल्ली से वैली ऑफ फ्लावर्स तक पहुंचने का सबसे लोकप्रिय रास्ता सड़क मार्ग ही है। दिल्ली से ऋषिकेश, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और जोशीमठ होते हुए गोविंदघाट पहुंचा जाता है। दिल्ली से गोविंदघाट की कुल दूरी लगभग 500 किलोमीटर है, जिसे अपनी निजी गाड़ी या टैक्सी के माध्यम से करीब 12 घंटों में आसानी से पूरा किया जा सकता है। आप चाहें तो ऋषिकेश या हरिद्वार तक ट्रेन या वोल्वो बस से पहुंचकर वहां से आगे के लिए सीधी टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।

हवाई सफर पसंद करने वाले यात्रियों के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। वहां से सड़क मार्ग के जरिए जोशीमठ और गोविंदघाट आसानी से पहुंचा जा सकता है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गोविंदघाट ही इस पूरी पैदल यात्रा का मुख्य बेस कैंप माना जाता है, जहां से वाहनों की आवाजाही समाप्त हो जाती है और मुख्य ट्रेक की शुरुआत होती है।

घांघरिया बेस कैंप तक का 13 किलोमीटर का पैदल ट्रेक

गोविंदघाट पहुंचने के बाद फूलों की घाटी की पैदल यात्रा शुरू होती है। गोविंदघाट से पुलना गांव तक का करीब 4 किलोमीटर का रास्ता अब वाहनों के लिए सुगम हो गया है। पुलना गांव से आगे घांघरिया के लिए लगभग 13 किलोमीटर का पैदल ट्रेक तय करना होता है। यह ट्रेक मध्यम कठिनाई श्रेणी का माना जाता है, जो लक्ष्मण गंगा नदी के किनारे-किनारे घने जंगलों और पर्वतीय मोड़ों से होकर गुजरता है।

जो यात्री पैदल चलने में असमर्थ हैं या जिनके साथ बच्चे और बुजुर्ग हैं, वे घांघरिया तक पहुंचने के लिए खच्चर, पिट्ठू या डोली की सेवाएं ले सकते हैं। हालांकि, प्राकृतिक नजारों का असली आनंद पैदल चलने वाले ट्रेकर्स ही उठा पाते हैं। रास्ते में जगह-जगह साफ पानी के झरने, छोटे विश्राम स्थल और चाय-नाश्ते की दुकानें मौजूद हैं। घांघरिया ही वह अंतिम पड़ाव है जहां पर्यटकों के लिए रात में ठहरने के लिए होटल, लॉज और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।

घांघरिया से मुख्य घाटी तक का अंतिम सफर और परमिट प्रक्रिया

घांघरिया पहुंचने के बाद अगले दिन तड़के वैली ऑफ फ्लावर्स के लिए मुख्य ट्रेक शुरू किया जाता है। घांघरिया से वैली ऑफ फ्लावर्स का मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है। यह क्षेत्र वन विभाग के कड़े नियमों के तहत संरक्षित है, इसलिए घाटी में प्रवेश करने के लिए हर पर्यटक को वन विभाग के चेकपोस्ट से निर्धारित शुल्क चुकाकर प्रवेश परमिट लेना अनिवार्य होता है। सुरक्षा कारणों से परमिट जारी करते समय पर्यटकों को अपना सरकारी पहचान पत्र भी जमा या प्रदर्शित करना पड़ता है।

घाटी के भीतर पर्यावरण संरक्षण के बेहद सख्त नियम लागू हैं। राष्ट्रीय उद्यान होने के नाते यहां किसी भी प्रकार का रात्रि विश्राम पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सभी पर्यटकों को दोपहर बाद 4 बजे से पहले घाटी से वापस घांघरिया लौटना पड़ता है। घाटी के भीतर किसी भी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री, बोतलें या गंदगी फैलाना कानूनन अपराध है और पकड़े जाने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

सावधानियां, आवश्यक गियर और मौसम के अनुसार सही तैयारी

चूंकि फूलों की घाटी का मुख्य सत्र मानसून के दौरान ही होता है, इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले सही कपड़ों और आवश्यक गियर्स का चुनाव करना बहुत जरूरी है। इस मौसम में पहाड़ों पर अचानक बारिश होना बहुत आम बात है। इसलिए यात्रियों को अपने साथ उच्च गुणवत्ता वाला वाटरप्रूफ रेनकोट, बैकपैक कवर और वाटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज जरूर रखने चाहिए। साधारण जूते बारिश की फिसलन में खतरनाक साबित हो सकते हैं, इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूतों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

इसके अलावा, ऊंचाई पर स्थित होने के कारण घांघरिया में शाम और रात के समय तापमान काफी गिर जाता है। ऐसे में हल्के ऊनी कपड़े, थर्मल इनर, विंडचीटर और वाटरप्रूफ ग्लव्स साथ रखना बहुत फायदेमंद रहता है। ट्रेकिंग के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है, इसलिए अपने साथ पानी की बोतल और ऊर्जा देने वाले सूखे मेवे या चॉकलेट्स जरूर रखें। यदि आप पहली बार उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्रेकिंग कर रहे हैं, तो किसी प्रशिक्षित गाइड को साथ लेना सुरक्षित रहता है।

हेमकुंड साहिब और आसपास के धार्मिक व पर्यटन स्थल

वैली ऑफ फ्लावर्स की यात्रा की एक बड़ी खासियत यह है कि इसके साथ अन्य प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण भी आसानी से जोड़ा जा सकता है। घांघरिया से ही एक रास्ता सिखों के विश्व प्रसिद्ध पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब की ओर जाता है। घांघरिया से हेमकुंड साहिब का ट्रेक लगभग 6 किलोमीटर का है, जो थोड़ा कठिन चढ़ाई वाला है। समुद्र तल से 15000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब में बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच एक पवित्र सरोवर और भव्य गुरुद्वारा स्थित है।

इसके अलावा, वैली ऑफ फ्लावर्स की यात्रा के दौरान श्रद्धालु गोविंदघाट से आगे जाकर भगवान विष्णु के प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ के दर्शन भी कर सकते हैं। जोशीमठ में स्थित नृसिंह मंदिर, औली के खूबसूरत स्कीइंग रिजॉर्ट और माणा गांव (भारत का पहला गांव) जैसे आकर्षण भी इस यात्रा मार्ग पर ही स्थित हैं। इन सभी स्थलों को मिलाकर चार से पांच दिनों का एक बेहतरीन टूर प्लान तैयार किया जा सकता है।

Delhi To Valley Of Flowers: पर्यटकों के लिए बजट, ठहरने की व्यवस्था और यात्रा की संपूर्ण योजना

दिल्ली से वैली ऑफ फ्लावर्स की तीन से चार दिन की यात्रा का बजट बेहद किफायती रखा जा सकता है। ऋषिकेश से गोविंदघाट के लिए शेयरिंग टैक्सी या राज्य परिवहन की बसें काफी सस्ते दर पर मिल जाती हैं। घांघरिया में ठहरने के लिए बजट होटल से लेकर मध्यम श्रेणी के लॉज आसानी से मिल जाते हैं। हालांकि, जुलाई और अगस्त के पीक सीजन में यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए ठहरने की व्यवस्था पहले से ही ऑनलाइन बुक कर लेना सुरक्षित माना जाता है।

प्रकृति प्रेमियों के लिए वैली ऑफ फ्लावर्स केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवन में कम से कम एक बार अनुभव किया जाने वाला अद्भुत अहसास है। हरी-भरी वादियों में खिले लाखों फूल, शुद्ध पर्वतीय हवा और अलौकिक सन्नाटा इंसान को आधुनिक जीवन के तमाम तनावों से मुक्त कर देता है। यदि आप भी इस मानसून अपने परिवार या दोस्तों के साथ किसी अविस्मरणीय सफर पर जाने की सोच रहे हैं, तो उत्तराखंड की यह फूलों से सजी घाटी आपका स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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